सच्चा धर्म Questions and Answers Summary Inter 1st Year Hindi

Andhra Pradesh BIEAP AP Inter 1st Year Hindi Study Material उपवाचक 2nd Lesson सच्चा धर्म Questions and Answers Summary.

Inter 1st Year Hindi सच्चा धर्म Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
“सच्चा धर्म” एकांकी का सारांश लिखिए ?
उत्तर:
ऐतिहासिक संदर्भ के माध्यम से व्यक्ति मूल्यों और सामाजिक मूल्यों की रक्षा के साथ राष्ट्रीय चेतना के भाव को परिपुष्ट करनेवाला यह एकांकी सेठ गोविन्द दास की क्रांतिकारी सामाजिक दृष्टि को प्रकट करता है |

इस नाटक में शिवाजी अपने कौशल से जब औरंगजेब के कारागार से मुक्त होते हैं, तब से अपने पुत्र सम्भाजी को दिल्ली के एक महाराष्ट्रीय ब्राह्मण पुरुषोत्तम के घर में छिपा देते हैं । इस घटना की भनक औरंगजेब को लगती हैं वह इसकी सत्यता के प्रतिपादन हेतु अपने दो सैनिकों को पुरुषोत्तम के पास भेजते है।

पुरुषोत्तम की सत्यनिष्ठा और आचारनिष्ठा चतुर्दिक चर्चित है। इसे औरंगजेब के सैनिक भी अच्छी तरह से जानते हैं कि पुरुषोत्तम कभी असत्य संभाषण नही करते हैं और न किसी के साथ बैठकर भोजन करते हैं। पुरुषोत्तम ने संभाजी को अपना भांजा घोषित कर दिया था | औरंगजेब के सैनिक पुरुषोत्तम से वचनबद्ध होते हैं कि यदि वे अपने भाजे के साथ एक थाली में भोजन कर लेते हैं तो सैनिक स्वीकार कर लेंगे कि पुरुषोत्तम के यहाँ रहनेवाला लड़का सम्भाजी नही हैं |

पुरुषोत्तम और उनकी पत्नी अहिल्या के मध्य इस तथ्य को लेकर बराबर चिंतन चलता है कि इस परिस्थिति में क्या करना हैं ? अहिल्या अपने पति को समझाती है कि उन्हें असत्यवादन नही करना चाहिए इसी में भलाई भी हैं । एक तो असत्य वचन करके वे आचार भ्रष्ट नहीं होंगे दूसरे औरंगजेब उन्हें इस हेतु पुरस्कृत भी कर सकता हैं। पुरुषोत्तम अपना निर्णय पहले ही व्यक्त कर चुके हैं।

उन्होंने स्पष्ट कर दिया हैं ” अनेक बार सत्य के स्थान पर मिथ्या भाषण सत्य से बड़ी वस्तु होती है, जीवन में धर्म से बड़ी कोई चीज नहीं है, धर्म की रक्षा यदि असत्य से होती हैं तो असत्य, सत्य से बड़ा हो जाता है, अपने इसी सिद्धांत को प्रमाणित करने के लिए पुरुषोत्तम सम्भाजी के साथ एक थाली में बैठकर भोजन करते है। पुरुषोत्तम इस प्रकार अपने संपूर्ण आचारनिष्ठ कर्मकांड से विचलित होकर भी अपने व्यक्ति मूल्य और सामाजिक मूल्य की रक्षा करते है” ।

सम्भाजी की रक्षा के उद्देश्य जहाँ राष्ट्रीय भावना से अनुप्रेरित हैं, वहाँ आश्रित को अभय का वातावरण प्रदान करने की भावना भी इसमें निहित है । इन महत उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए वैयक्तिक आचार निष्ठा को खंडित का यूग धर्म की महत्ता को भी प्रतिपादित किया गया है । नाटक में पुरुषोत्तम को केन्द्रीय पात्र के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।

पुरुषोत्तम की राष्ट्रीय भावना उसके समयानुकूल कर्तव्य भाव को जागृत कर सच्चे धर्म की स्थापना करती है। पुरुषोत्तम की पत्नी स्वार्थ केन्द्रित अधिक है । इसलिए उसका चिंतन व्यावहारिक होते हुए भी तत्कालीन परिस्थति में धर्मानुकूल नहीं है | संपूर्ण एकांकी परिस्थिति के अनुसार परिवर्तित धर्म के स्वरूप को महत्व प्रदान करती हैं, यह लेखक का क्रांतिकारी दृष्टिकोण हैं ।

सच्चा धर्म Questions and Answers Summary Inter 1st Year Hindi

सच्चा धर्म Summary in Hindi

एकांकीकार का परिचय

सेठ गोविन्द दास का जन्म 1896 में जबलपुर के एक संपन्न धार्मिक मनोवृत्ति से युक्त परिवार में हुआ । इनके पितामह गोकुल दास का इनके व्यक्तित्व पर विशेष प्रभाव रहा । इन्होंने बारह वर्ष की उम्र में ही ” चम्पावती” नामक उपन्यास की रचना की । 1916 में उन्होंने “श्री शारदा ” साहित्यिक मासिक का प्रकाशन किया । स्वाधीनता आंदोलन में भाग लेकर वे जेल भी गये । अधिकांश साहित्य की रचना उन्होंने वहीं पर किया था । उन्होंने अधिकतर ऐतिहासिक और पौराणिक कथानकों पर आधारित नाटकों की रचना की । इसके अलावा एकांकी, रेखाचित्र और संस्मरण आदि की भी रचनाएँ की हैं । उनका निधन सन् 1974 में हुआ था ।

उनकी प्रमुख रचनाएँ

प्रमुख एकांकी संग्रह : सप्तरश्मी, एकादशी, चतुष्पाद पंचभूत आदि ।
प्रमुख रचनाएँ : विजय बेलि, सिंहल द्वीप, भिक्षु से गृहस्थ और गृहस्थ से भिक्षु, अशोक, भारतेन्दु हरिश्चंद्र, रहीम आदि ।
ऐतिहासिक नाटक : हर्ष, शशिगुप्त, शेरशाह, कुलीनता ।
पौराणिक नाटक : कर्तव्य, कर्ण ।
सामाजिक नाटक : प्रकाश, सेवापथ, सिद्धांत स्वातंत्र्य ।
समस्यामूलक नाटक : हिंसा या अहिंसा, प्रेम या पाप, बड़ा पापी कौन है |

सारांश

ऐतिहासिक संदर्भ के माध्यम से व्यक्ति मूल्यों और सामाजिक मूल्यों की रक्षा के साथ राष्ट्रीय चेतना के भाव को परिपुष्ट करनेवाला यह एकांकी सेठ गोविन्ददास की क्रांतिकारी सामाजिक दृष्टि को प्रकट करता है ।

इस नाटक में शिवाजी अपने कौशल से जब औरंगजेब के कारागार से मुक्त होते हैं, तब से अपने पुत्र सम्भाजी को दिल्ली के एक महाराष्ट्रीय ब्राह्मण पुरुषोत्तम के घर में छिपा देते हैं । इस घटना की भनक औरंगजेब को लगती हैं वह इसकी सत्यता के प्रतिपादन हेतु अपने दो सैनिकों को पुरुषोत्तम के पास भेजते है । पुरुषोत्तम की सत्यनिष्ठा और आचारनिष्ठा चतुर्दिक चर्चित है ।

इसे औरंगजेब के सैनिक भी अच्छी तरह से जानते हैं कि पुरुषोत्तम कभी असत्य संभाषण नहीं करते हैं और न किसी के साथ बैठकर भोजन करते हैं। पुरुषोत्तम ने संभाजी को अपना भांजा घोषित कर दिया था । औरंगजेब के सैनिक पुरुषोत्तम से वचनबद्ध होते हैं कि यदि वे अपने भांजे के साथ एक थाली में भोजन कर लेते हैं तो सैनिक स्वीकार कर लेंगे कि पुरुषोत्तम के यहाँ रहनेवाला लड़का सम्भाजी नही हैं ।

पुरुषोत्तम और उनकी पत्नी अहिल्या के मध्य इस तथ्य को लेकर बराबर चिंतन चलता है कि इस परिस्थिति में क्या करना हैं ? अहिल्या अपने पति को समझाती है कि उन्हें असत्यवादन नही करना चाहिए. इसी में भलाई भी हैं । एक तो असत्य वचन करके वे आचार भ्रष्ट नहीं होंगे दूसरे औरंगजेब उन्हें इस हेतु पुरस्कृत भी कर सकता हैं। पुरुषोत्तम अपना निर्णय पहले ही व्यक्त कर चुके हैं।

उन्होंने स्पष्ट कर दिया हैं ‘“अनेक बार सत्य के स्थान पर मिथ्या भाषण सत्य से बड़ी वस्तु होती है, जीवन में धर्म से बड़ी कोई चीज़ नहीं है, धर्म की रक्षा यदि असत्य से होती है तो असत्य, सत्य से बड़ा हो जाता है, अपने इसी सिद्धांत को प्रमाणित करने के लिए पुरुषोत्तम सम्भाजी के साथ एक थाली में बैठकर भोजन करते है। पुरुषोत्तम इस प्रकार अपने संपूर्ण आचारनिष्ठ कर्मकांड से विचलित होकर भी अपने व्यक्ति मूल्य और सामाजिक मूल्य की रक्षा करते है” ।

सम्भाजी की रक्षा के उद्देश्य जहाँ राष्ट्रीय भावना से अनुप्रेरित हैं, वहाँ आश्रित को अभय का वातावरण प्रदान करने की भावना भी इसमें निहित है । इन महत उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए वैयक्तिक आचार निष्ठा को खंडित का यूग धर्म की महत्ता को भी प्रतिपादित किया गया है। नाटक में पुरुषोत्तम को केन्द्रीय पात्र के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।

पुरुषोत्तम की राष्ट्रीय भावना उसके समयानुकूल कर्तव्य भाव को जागृत कर सच्चे धर्म की स्थापना करती है। पुरुषोत्तमकी पत्नी स्वार्थ केन्द्रित अधिक हैं । इसलिए उसका चिंतन व्यावहारिक होते हुए भी तत्कालीन परिस्थिति में धर्मानुकूल नहीं है । संपूर्ण एकांकी परिस्थिति के अनुसार परिवर्तित धर्म के स्वरूप को महत्व प्रदान करती हैं, यह लेखक का क्रांतिकारी दृष्टिकोण हैं ।

बहू की विदा Questions and Answers Summary Inter 1st Year Hindi

सच्चा धर्म Summary in English

This one -Act Play ‘Sachhaa Dharm’, which strengthens the sence of national consciousness along with protecting individual and social values through the historical context, reveals the revolutionary social vision of the writer Seth Govind Das.

In this play, when Shivaji is released from Aurangzeb’s prison with his skill, he hids his son Sambhaji in the house of Purushottam, a Maharashtrian Brahmin n in Delhi. Aurangze gets its clue and sends two of his soldiers to Purushottam to prove its truth. Purushottam’s truthfulness and moral integrity are well-known everywhere.

Aurangzeb’s soldiers also know very well that Purushottam never tells a lie and never sits and eats with anyone. Purushottam had declared Smbhaji as his nephew. Aurangzeb’s soldiers make a promise to Purushottam that if he eats food in the same plate with his nephew, then the soldiers will accept that the boy living with Purushottam is not Sambhaji.

On this, discussion is going on between Purushottam and his wife Ahilya. Ahilya convinces to her husband that he should not tell lies, it is good for him. Firstly, he will not corrupt his conduct by telling lies, secondly Aurangzeb can also reward him for this. Purushottam has already expressed his decision.

He has made it clear many times speaking lies in place of truth is a bigger thing than truth, there is nothing bigger than Dharma in life, if Dharma is protected by lies, then lies become bigger than truth, to prove this principle of his, Purushottam sits with Sambhaji and eats food in the same plate. In this way, purushotham protects his personal and social values even after deviating from his completely ethical rituals.

While the objective of protecting Sambhaji is inspired by national sentiments, it also contains the sentiment of providing an environment of security to the dependent. It gives importance to the form of religion changed according to the situation of complete solitude; this is the revolutionary view of the writer.

सच्चा धर्म Summary in Telugu

చారిత్రిక సందర్భం ద్వారా జాతీయ చైతన్యం, వ్యక్తిగత సామాజిక మూల్యాల రక్షణతోపాటు వివరించే ఏకాంకి “సచ్ఛాధర్మ్”. విప్లవాత్మకమైన సామాజిక దృష్టి గల దీని రచయిత సేఠ్ గోవింద్ దాస్.

ఈ నాటకంలో శివాజీ తన తెలివితేటలతో ఔరంగజేబు జైలు నుండి తప్పించుకొని వచ్చిన తన కొడుకు శంభాజీని ఢిల్లీలో ఉన్న మహారాష్ట్ర బ్రాహ్మణుడు పురుషోత్తముని ఇంట దాస్తాడు. ఔరంగజేబుకు దీని గురించి ఉప్పందగా, నిజం రాబట్టటానికి తన ఇద్దరు సైనికులను ఔరంగజేబు పంపిస్తాడు. పురుషోత్తముని నిజాయితీ, నైతిక విలువలు అందరికీ ఎరుకే. ఔరంగజేబు సైనికులకు కూడా, పురుషోత్తముడు ఎన్నడు అసత్యం పలకడని, ఎవరితోనూ కలసి భోజనం చేయడని, తెలుసు. శంభాజీ తన మేనల్లుడని ప్రకటిస్తాడు. పురుషోత్తముడు ఒకే ప్లేటులో తన మేల్లుడుతో కలిసి భోజనం చేస్తే కనుక ఆ పిల్లవాడు పురుషోత్తముని మేనల్లుడే అని నమ్ముతామని సైనికులు పురుషోత్తమునికి షరతు విధిస్తారు.

దీని గురించి పురుషోత్తమునికి తన భార్య అహిల్య మధ్య చర్చ కొనసాగుతుంది. తను అబద్ధాలాడరాదు, తను మంచి కొరకే అని భార్య అహిల్య భర్తను ఒప్పించ చూస్తుంది. మొదటగా, అసత్యాలు పలికి తన సద్గుణానికి మచ్చ తేరాదు, రెండవది దీనికి ఔరంగజేబు బహుమతి ఇస్తాడు. పురుషోత్తముడు తన నిర్ణయాన్ని తెలియజేసే ఉన్నాడు. సత్యం స్థానంలో అనేక సార్లు అసత్యం పలికినా అది సత్యం కంటే ఇంకా పెద్దది, మహత్తరమైనది. జీవితంలో ధర్మం కంటే పెద్దది. మహత్తరమైనది, మించినది ఏదీ లేదు. ధర్మం అసత్యాలతో రక్షింపబడితే ఆ అసత్యాలు సత్యం కన్నా మిన్న, మహత్తరమైనది.

ఈ సూత్రాన్ని, ఈ ధర్మాన్ని నిరూపించటానికి పురుషోత్తముడు శంభాజీతో కూర్చొని ఒకే కంచంలో తనతోపాటు భుజిస్తాడు. ఈ విధంగా పురుషోత్తముడు తన వ్యక్తిత్వ విలువలు, సామాజిక విలువలు కాపాడటం కోసం తన నైతిక ధర్మాన్ని ఫణంగా పెడతాడు. శంభాజీ రక్షణ ఉద్దేశ్యం జాతీయ భావనతో ప్రేరితమవ్వడమే కాదు, ఆశ్రితునికి అభయం చేకూర్చే భావన ఇమిడి ఉంది. ఈ ఏకాంకి పరిస్థితికనుగుణంగా పరివర్తిత ధర్మం స్వరూపానికి ప్రాధాన్యం కలిగిస్తుంది. ఇది రచయిత విప్లవ దృష్టికోణం.

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