Andhra Pradesh BIEAP AP Inter 2nd Year Hindi Study Material Pdf उपवाचक Chapter 3 जोंक Questions and Answers Summary.
Inter 2nd Year Hindi जोंक Questions and Answers
मूल्यांकन हेतु
अ. “जोंक” एकांकी का सारांश लिखिए ।
जवाब.
हिंदी के प्रसिद्ध पुकांकीकार उपेंद्रनाथ अश्क का बहुचर्चित तीन वर्गीय दृश्योंवाला एकाकी, ‘जोक’ है। मध्य-वर्गीयों समाज की समस्याओं, रुदियों और कमजोरियों का यथा चित्रण का वर्णण है, यह एकांकी ।
भोलानाथ मध्यवर्ग का व्यक्ति है । उसके आर्धिक संपाधन सीमित हैं । वह नवविवाहित है । वह पत्नी कमला समेत दो कमरों वाले छोटेसे छर में रहता है । उसके मित्र प्रो० आनंद भी है । भोलानाथ घबराया हुआ आकर आनंद को बताता है कि घर में एक बिना बुलाया मेहमान बनवरीलाल आरहा है । वह पहले भी एक दिन के लिए आकर सात दिन रहा । एक और भोलानाथ बेरोजगार व्यक्ति है, नौकरी की तलाश में है। दूसरी ओर आमदनी शून्य है। घर तो दोनों के लिए भी सुविधाजनक नहीं है।
फिर से बनवरीलाल के आनेपर कमला नाराज होती है । बनवरीलाल भोलानाथ के मूल निवास स्थान यानी राहों का निवासी है। इससे भोलानाथ बनवरीलाल से चले जाने को खुलकर नही कह सकता । शिष्टाचार बनाए रखते हुए दोनों मित्र बनवरीलाल के तुरंत चले जाने की युक्ति करते हैं।
अपने मित्र आनंद की सलाह से तरह तरह की चालें चलाता है । बहाने बनाता है | बनवरीलाल इन सब को समझता हुआ उनलोगों से ज्यादा होशियार सिद्ध करता है । वह आनंद पर चोरी का आरोप लगाकर उसे पड़ोसियों से पिटवा देता है। सभी यत्न विफल होते हैं ।
अंतमें भोलानाथ सूचित करता है कि वह पत्नी के साथ गुरदासपुरजा रहा है, तो बनवरीलाल भी उसके साथ जाने को तैयार होता है । जोंक की तरह ।
इस प्रकार, एकांकीकार अश्क जी इस एकांकी द्वारा संदेश देते हैं कि बनवरीलाल जैसे जोंकों से सावधान रहना चाहिए ।
आ. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्तरूप में दीजिए ।
प्रश्न 1.
भोलानाथ किस बात से परेशान था ?
जवाब.
भोलानाथ मध्यवर्ग का व्यक्ति था । उसके आर्धिक संसाधन सीमित थे। वह नवविवाहित था । वह पत्नी कमला समेत दो कमरों वाले छोटे-से घर में रहता था । घर भी उनके लिए सुविधाजनक नहीं था । इनके साथ दोस्त प्रो० आनंद भी था | भोलानाथ बेरोजगार व्यक्ति था । नौकरी की तलाश में था । उसकी आमदनी न के बराबर थी ।
इस दशा में, बनवरीलाल एकदिन के लिए मेहमान के रूप में भोलानाथ के घर आकर सात दिन रहा। वह फिर दुबारा इसका घर आ रहा था । वह जोंक की तरह भोलानाथ की मेहनत की कमाई, संसाधन, समय आदि चूस लेता था । बनवरीलाल भोलानाथ के मूल निवास स्थान का निवासी था । इसलिए भोलानाथ बनवरीलाल के आगमन से इनकार न करसकता, और न उसका बोझ उठा सकता । भोलानाथ इस बात से परेशान था ।
प्रश्न 2.
‘जोंक नाटक का मुख्य संदेश क्या है ?
जवाब.
समाज में फैले स्वार्थी, चालाक, निकम्मे और जोंको की तरह परजीवी लोग रहते हैं । वे हमारा खून चूस लेते हैं। हमारी कंडी मेहनत के पैसे, संसाधन, समय आदि का फायदा उठाते हैं । वे नकली मैत्री हमारा आथिक शोषण करते हैं । बनवारीलाल जैसे अवसरवादी और परजीवी लोगों को पहचान कर उनसे दूर रहना चाहिए। अन्यथा वे भोलानाथ जैसे लोगों को आर्धिक और मानसिक रूपसे खोखला करदेते हैं । यही ‘जोक’ नाटक का मुख्य संदेश है ।
![]()
जोंक Summary in Hindi
कवि परिचय
उपेन्द्रनाथ अश्क का जन्म मदिसंबर 1910 को जलंधर में हुआ था | उनका निधन 19 जनवरी 1996 को इलाहाबाद में हुआ । उनका उपनाम अश्क है ।
वे हिंदी के प्रसिद्ध नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार और कवि हैं । उन्होंने अपनी रचनाओं में समाज के मध्यवर्गीय जीवन की समस्याओं, संघर्षों और विडंबनाओं को बड़ी सजीवता से प्रस्तुत करते हैं ।
जोंक, अधीरात, रात और चिंगारी आदि एकांकी, गिरती दीवारें, मंजिले, शहर में घूमता आईना आदि उपन्यास एवं किसान घर आया, कठपुतलियाँ आदि कहानियाँ अश्क जी की प्रसिद्ध रचनाएँ हैं ।
अश्क जी की भाषा सरल, सहज और बोल-चाल की है । उनकी शैली हास्य-व्यंग्य की है । संवाद जीवंत और स्वाभाविक हैं ।
पाठ का सारांश
हिंदी के प्रसिद्ध पुकांकीकार उपेंद्रनाथ अश्क का बहुचर्चित तीन दृश्योंवाला एकाकी, जोंक है । मध्य-वर्गीय समाज की समस्याओं, रुदियो और कमजोरियों का यथा चित्रण का वर्णण है, यह एकांकी ।
भोलानाथ मध्यवर्ग का व्यक्ति है । उसके आर्थिक संपाधन सीमित हैं । वह नवविवाहित है । वह पत्नी कमला समेत दो कमरों वाले छोटेसे छब में रहता है । उसके मित्र प्रों आनंद भी है । भोलानाथ घबराया हुआ आकर आनंद को बताता है कि घर में एक बिना बुलाख मेहमान बनवरीलाल आ रहा है । वह पहले भी एक दिन के लिए आकर सात दिन रहा। एक और भोलानाथ बेरोजगार व्यक्ति है, नौकरी की तलाश में है । दूसरी ओर आमदनी शून्य है । घर तो दोनें के लिए भी सुविधाजनक नहीं है ।
फिर से बनवरीलाल के आनेपर कमला नाराज होती है। बनवरीलाल भोलानाथ के मूल निवास स्थान यानी राहों का निवासी है। इससे भोलानाथ बनवरीलाल से चले जाने को खुलकर नही कह सकता । शिष्टाचार बनाए रखते हुए दोनों मित्र बनवरीलाल के तुरंत चले जाने की युक्ति करते हैं ।
अपने मित्र आनंद की सलाह से तरह तरह की चालें चलाता है । बहाने बनाता है । बनवरीलाल इन सब को समझता हुआ उन लोगों से ज्यादा होशियार सिद्ध करता है । वह आनंद पर चोरी का आरोप लगाकर उसे पड़ोसियों से पिटवा देता है । सभी यत्न विकल होते हैं ।
अंत में भोलानाथ सूचित करता है कि वह पत्नी के साथ गुरदासपुर जा रहा है, तो बनवरीलाल भी उसके साथ जाने को तैयार होता है। जोंक की तरह ।
इस प्रकार, एकांकीकार अश्क जी इस एकांकी द्वारा संदेश देते हैं कि बनवरीलाल जैसे जोंकों से सावधान रहना चाहिए ।
![]()
जोंक Summary in English
The famous Hindi one-act-play writer, Upendranath Ashk’s multi facted three-scene one-act-play is ‘Jonk’. This one – act – play is a vision of the realistic portrayal of the problems, customs and weaknesses of a middle-class society.
Bolanath is a middle-class person. His financial resources are lim- ited. He is newely married. Head his wife Kamala live in a small two- room house. He also has a friend, Prof. Anand along with him. Bholanath worrely comes to the house and informs to Anand that an uninvited guest Banvarilal is coming to his house. Earlier also he had come for a day and stayed sevendays. Bholenath is un employed and is insearching of employment. On the other hand, his income is zero. The living condi- tions are not comfortable to both of them.
Kamala is angry when Banvarilal comes again. Banvarilal is a resident of Bholanath’s original residential place. So, Bholanath cannot ask Banvarilal to goaway. Maintaining the traditional customs, both the friends devise a plan to leave him from that house.
With the help of his friend Anand, Bholanath plans many a plan, but invaiss. Banvarilal understands every plan and proves himself smarter than them. He accuses Anand of theft and makes him beaten up by the neighbours.
Finally Bholanath informs that he is going to gurdaspur with his wife. So Banvarilal is also ready to go along with them.
Thus, the one-act-play wright Ashkji gives the message through his one-act-play that one should be careful of leeches like Banvarilal.
![]()
जोंक Summary in Telugu
హిందీ సాహిత్యంలో సుప్రసిద్ధ ఏకాంకీ రచయిత ఉపేంద్రనాథ్ అస్క్ గారి అందరినోట నలిగిన మూడు దృశ్యాల ఏకాంకి పేరు జోంక్”. ఈ ఏకాంకి మధ్య వర్గీయ సమాజం యొక్క సమస్యలు, ఆచారాలు, బలహీనతల యధార్థ చిత్రానికి దర్పణం.
భోలానాథ్ మధ్యవర్గీయ వ్యక్తి. తన ఆర్థిక వనరులు పరిమితం. తను క్రొత్తగా పెళ్ళైనవాడు. తన భార్యాసహితంగా రెండు గదులు గల చిన్నపాటి ఇంట్లో నివసిస్తున్నాడు. వారితోపాటు తన స్నేహితుడు ఆనంద్ కూడా ఉన్నాడు. భోలానాథ్ భయపడ్తూ వచ్చి ఓ పిలవని అతిథి ఇంటికి వస్తున్నాడని ఆనంద్ చెప్తాడు. అతను బన్వారీలాల్ ఇంత క్రితం కూడ ఒక రోజు నిమిత్తమని వచ్చి ఏడు రోజులు తిష్ఠవేశాడు. ఓవైపు భోలానాథ్ నిరుద్యోగి, ఉద్యోగాన్ని వెదుకులాడుతున్నాడు. మరోవైపు ఆదాయం శూన్యం. ఇల్లైతే ఇద్దరికీ కూడా అసౌకర్యమే.
మరలా బన్వరీలాల్ రావటం అంటే భోలానాథ్ భార్య కమలకు ఇష్టంలేదు, కోప్పడుతుంది. బన్వర్లాల్ భోలానాథ్ మూల నివాసస్థానానికి చెందినవాడు కావటం వలన అతనిని వెళ్ళిపొమ్మని సూటిగా చెప్పలేడు.
శిష్టాచారానికి హాని కల్గకుండా ఇద్దరు మిత్రులు బన్వరీలాల్ త్వరగా వెళ్ళిపోయే అనేక పన్నాగాలు పన్నుతారు, కానీ విఫలమౌతారు. కాని వాళ్ళ పన్నాగాలన్నీ పసికట్టి బన్వర్లాల్ ‘అతని కంటే ఘనుడు. ఆ చంటమల్లన్న అన్నట్లు వాళ్ళని తలదన్ని తన తెలివితేటల్ని నిరూపించుకుంటారు. అతను ఆనంద్ పై దొంగతనం మోపి ఇరుగుపొరుగువారితో అతనిని కొట్టిస్తాడు. అన్ని ప్రయత్నాలు బూడిదలో పోసిన పన్నీరౌతాయి.
“చివరగా తన భార్యాసహితంగా గుర్దాసపూర్ వెళ్తున్నట్లు ప్రకటించగా బన్వర్లాల్ వాళ్ళతో పాటు వెళ్ళటానికి తయారౌతాడు.
ఈ విధంగా ఏకాంకీ రచయిత అశీ జీ ఈ ఏకాంకి ద్వారా బన్వర్ లాల్ వంటి జలగలపట్ల జాగ్రత్తగా ఉండాలని సందేశం ఇస్తాడు.
![]()
जोंक कठिन शब्दार्थ
जोंक = चिपकनेवाला परजीवी जीव, यहाँ स्वार्थी व्यक्ति, జలగ, స్వార్థపరుడు
बरामदा = ओसारा दालान , వసారా
रोगन = लोक, सीमेंट आदि का बना मसाला, వార్నీసు, పాలిషు
झटकना = हल्का ध्क्का देना, తేలికగా గుద్దుకోవటం
जनमुरीद = पत्नी भक्त, భార్యాభక్తుడు
मेजबानी = आथिध्य, ఆతిథ్యం
फूले न समाना = कृषि में आपे से बहार आना , అమితానందం చెందటం
जहुन्नुमी = नरक संबंधी, నరకానికి సంబంధించిన
बाँदी = दासी, लौड़ी , దాసి
तरकीब = उपाय, युक्ति, ఉపాయం, ఉక్తి
चाप = पैरों की आहट, కాళ్ళ చప్పుడు
मेजबान = आतिथ्य देनेवाला व्यक्ति, ఆతిథ్యం ఇచ్చే వ్యక్తి
खीर = दूध और चावल से बनी मिठाई, క్షీరాన్నము
अंगीही = अग्नि पात्र, కుంపటి
तश्तरियाँ = छोटी यालियाँ, చిన్న ప్లేట్లు
झुंझलाना = गुस्से में बोलना, కోపంతో మాట్లాడటం
चन्द दिन बड़े घर की रोटियाँ तोड़ना = कुछ दिन जेल में रहना, కొన్ని రోజులు జైలులో ఉండటం
लपक करना = सहस तेजी से आगे बढ़ना, వేగంగా సాగటం
खर्शटा = सोते समय मुँह से निकलनेवाली खर – खर ध्वनि, గురక