Andhra Pradesh BIEAP AP Inter 2nd Year Hindi Study Material Pdf उपवाचक Chapter 1 वीर अभिमन्यु Questions and Answers Summary.
Inter 2nd Year Hindi वीर अभिमन्यु Questions and Answers
मूल्यांकन हेतु
अ. “वीर अभिमन्यु’ एकांकी का सारांश लिखिए ।
जवाब.
उत्कृष्ट लेखक और संवेदनशील विचारक डॉ. चंद्रप्रकाश वर्मा का ऐतिहासिक एकांकी है, ‘वीर अभिमन्यु’ । कुरुक्षेत्र युद्ध का दृश्य, युधिष्ठर की चिंता, द्रोणाचार्य के चक्रव्यूह की रचना, वीर युवक अभिमन्यु की वीरता और वीरगति, कौरवों की क्रूरता आदि से मंडित है यह एकांकी ।
आचार्य द्रोण ने अजेय चक्रव्यूह की रचना करता है । चक्रव्यूह भेदनेवाला एकमात्र अर्जुन सुंदर जाने के कारण अनुपस्थित है । युधिष्ठर बहुत चिंतित है | वीर अभिमन्यु युधिष्ठिर को चक्रव्यूह भेदने की अपनी शिक्षा के बारे में बताते हुए चिंतामुक्त करने की कोशिश करता है । भीम उसका समर्थन करता है ।
वीर अभिमन्यु पांडव योद्धाओं सहित चक्रव्यूह में प्रवेशकर कुशल शर संचालन से चक्रव्यूह का अग्र भाग छिन्न-भिन्न करता है । उसका तीक्ष्ण शर दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण के शीश को काटकर धड़ से अलग कर देता है |
अभिमन्यु का रथ बिजली की गति से चक्रव्यूह के अंतिम द्वार की ओर बढ़ जाता है । जयद्ध व्यूह द्वार पर ही भीम को रोक लेता है। कौरव सेना के सात महारथी एकत्र होते हैं । इनके साथ सारी कौरव सेना अधर्म से बच्चे अभिमन्यु पर टूट पड़ती है। अंतिम साँस तक अभिमन्यु रथचक्र से लड़ता रहता है । कौरव सेना के सात महारथी अभिमन्यु को घेरकर उसका वध कर देते हैं । कर्ण आदि महावीर अभिमन्यु की वीरता की प्रशंसा करते हैं ।
अंत में अभिमन्यु के वध के मूल्य की चिंता में कर्ण डूब जाता है । दुर्योधन लापरवाही से विजयशंख फूँकता है ।
इस प्रकार, एकांकीकार चंद्रप्रकाश वर्मा का वीर रस से ओतप्रोत एकांकी, ‘वीर अभिमन्यु’ छात्रों को नैतिकता, साहस और बलिदान का संदेश देता हैं।
आ. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त रूप में दीजिए ।
प्रश्न 1.
वीर अभिमन्यु एकांकी का मुख्य विषय क्या है ?
जवाब.
कुरुक्षेत्र में चक्रव्यूह भेदन में नव युवक वीर अभिमन्यु की धीरता, वीरता, कर्तव्यपरायणता, साहसिकता, नैतिकता आदि का दिग्दर्शन करना ही ‘वीर अभिमन्यु’ एकांकी का मुख्य विषय है । इस के साथ-साथ कुरुक्षेत्र युद्ध का दृश्य, युधिष्ठिर की चिंता, द्रोणाचार्य के चक्रव्यूह की रचना, कौरवों की क्रूरता धर्महीनता और अभिमन्यु की वीरगति भी हैं। इस एकांकी का मुख्य विषय युवा – विद्यार्थियों के लिए प्रेरणाप्रद है ।
प्रश्न 2.
युधिष्ठिर की चिंता का कारण क्या है ?
जवाब.
कुरुक्षेत्र समर में आचार्य द्रोण अजेय चक्रव्यूह की रचना करता है । सेना के मुख्य भाग से अर्जुन सुंदर रहा। चक्रव्यूह भेदन एकमात्र अर्जुन ही कर सकता है । भीम पर्वत को फ़ोड सकता है, पर चक्रव्यूह को तोड़ेगा नहीं वह कूटनीति से बचा जाल है। वह बल से नहीं टूटता अभिमन्यु दुध मुँहा बालक है । वह चक्रव्यूह में प्रवेश तो कर सकता हैं। इसमें उसका ज्ञान कुछ अधूरा है । वह चक्रव्यूह में फंस जाता, तो किंकर्तव्य क्या होता ? यही युधिष्ठिर की चिंता कारण है ।
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वीर अभिमन्यु Summary in Hindi
कवि परिचय
डॉ. चंद्रप्रकाश वर्मा हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक, निबंधकार और शिक्षाविद् हैं । उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज, संस्कृति और नैतिक मूल्यों को बड़ी सहजता से प्रस्तुत किया है। मनुष्य के आचरण, सामाजिक परिवर्तन, शिक्षा और नैतिकता उनके लेखन के मुख्य विषय हैं । इनमें भारतीय संस्कृति, लोकजीवन और मानवीय मूल्यों की गहरी छाप दिखायी देती है ।
भाषा की सरलता, विचारों की स्पष्टता, और जीवन की सच्चाइयों के प्रति गहरी समझ उनके लेखन की विशेषता है ।
संक्षेप में, उनका साहित्य यह सिखाता है कि ज्ञान और नैतिकता मिलकर ही व्यक्ति और समाज दोनों को उज्ज्वल बना सकते हैं ।
पाठ का सारांश
उत्कृष्ट लेखक और संवेदनशील विचारक डॉ. चंद्रप्रकाश वर्मा का ऐतिहासिक एकांकी है, ‘वीर अभिमन्यु’ । कुरुक्षेत्र युद्ध का दृश्य, युधिष्ठिर की चिंता, द्रोणाचार्य के चक्रव्यूह की रचना, वीर युवक अभिमन्यु की वीरता और वीरगति, कौरवों की क्रूरता आदि से मंडित है यह एकांकी ।
आचार्य द्रोण ने अजेय चक्रव्यूह की रचना करता है । चक्रव्यूह भेदनेवाला एकमात्र अर्जुन सुंदर जाने के कारण अनुपस्थित है । युधिष्ठर बहुत चिंतित है | वीर अभिमन्यु युधिष्ठिर को चक्रव्यूह भेदने की अपनी शिक्षा के बारे में बताते हुए चिंतामुक्त करने की कोशिश करता है । भीम उसका समर्थन करता है ।
वीर अभिमन्यु पांडव योद्धाओं सहित चक्रव्यूह में प्रवेशकर कुशल शर संचालन से चक्रव्यूह का अग्र भाग छिन्न-भिन्न करता है । उसका तीक्ष्ण शर दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण के शीश को काट कर धड़ से अलग कर देता है ।
अभिमन्यु का रथ बिजली की गति से चक्रव्यूह के अंतिम द्वार की ओर बढ़ जाता है । जयद्ध व्यूह द्वार पर ही भीम को रोक लेता है। कौरव सेना के सात महारथी एकत्र होते हैं । इनके साथ सारी कौरव सेना अधर्म से बच्चे अभिमन्यु पर टूट पड़ती है। अंतिम साँस तक अभिमन्यु रथचक्र से लड़ता रहता है । कौरव सेना के सात महारथी अभिमन्यु को घेरकर उसका वध कर देते हैं | कर्ण आदि महावीर अभिमन्यु की वीरता की प्रशंसा करते हैं ।
अंत में अभिमन्यु के वध के मूल्य की चिंता में कर्ण डूब जाता है । दुर्योधन लापरवाही से विजयशंख फूँकता है ।
इस प्रकार, एकांकीकार चंद्रप्रकाश वर्मा का वीरस्स से ओतप्रोत एकांकी, ‘वीर अभिमन्यु’ छात्रों को नैतिकता, साहस और बलिदान का संदेश देता हैं।
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वीर अभिमन्यु Summary in English
An outstanding writer and indefatigable thinker, Dr. Chandra Prakash Varma’s historical one-act-play is “Veer Abhimanyu”. It depicts the Kurukshetra war, Yudhishthira’s anxiety, Dronacharya’s creation of Chakravyuha, the valor of the valiant young Abhimanyu and the Kauravas martyrdom and cruelity.
Acharya Drona designs an invincible Chakravyuha Arjun, the only person, who can disunite chakravyuha is absent due to away from this battle field. Yudhishthira is very worried. Brave Abhimanyu tries to allay Yudhishithira’s worries by telling him about his won learning of the techniques of Chakravyuha. Bheem support to him.
Abhimanyu enters the Chakravyuha along with Pandava warriors and with skillfull maneu vering shatters, its sharp. Its sharp blade cuts off the head of Dhuryodhana’s son Laxman and separates it from the body.
Abhimanyu’s chariot moves towards the last entrance like light- ning. Jaydratha stops Bhima at the entrance of Chakravyuh. The seven Maharathi of Kaurava army stand alone. Along with them, the entire Kaurava army attacks Abhimanyu immorally. Abhimanyu fights with the chariot wheel till the end. The seven Maharathi attack Abhimanyu and kill him. Karna praises Abhimanyu’s bravery and worries about the cost of Abhimanyu’s death. Duryodhan thanks to Karna.
Thus, the heroic one-act-play of playwright ChandraPrakash Varma gives the message of morality and sacrifice of ‘Veer Abhimanyu’.
वीर अभिमन्यु Summary in Telugu
ఉత్కృష్ఠ రచయిత, సంవేదనాస్వభావం గల ఆలోచకుడు డా॥ చంద్రప్రకాశ్ వర్మగారి ‘చారిత్రక ఏకాంకి’ వీర్ అభిమన్యు, కురుక్షేత్ర యుద్ధదృశ్యం, ధర్మరాజు విచారం, ద్రోణాచార్యుని చక్రవ్యూహం, వీర యువకుడు అభిమన్యుని వీరత్వం, వీరగతిపొందడం, కౌరవుల క్రూరత్వం మొదలగువాటితో శోభిస్తున్నది ఈ ఏకాంకి.
ఆచార్యద్రోణుడు అజేయమైన చక్రవ్యూహం పన్నుతాడు. చక్రవ్యూహాన్ని ఛేదించే ఏకైక వీరుడు అర్జునుడు సుదూరం వెళ్ళటం వలన హాజరుకాలేకపోయాడు. ధర్మరాజు చాలా ఆందోళనలో ఉన్నాడు. వీరాభిమన్యుడు తన చక్రవ్యూహ విద్య పొందిన విధం తెలియపరుస్తూ, ధర్మరాజును చింతాముక్తిడిని చేస్తాడు. భీముడు దానిని సమర్థిస్తాడు.
వీరాభిమన్యుడు పాండవయోధులతో కలిసి చక్రవ్యూహంలో ప్రవేశించి నైపుణ్యంతో శరసంచాలనం చేస్తూ చక్రవ్యూహం అగ్రభాగాన్ని ఛిన్నాభిన్నం చేస్తాడు. తన తీక్షబాణాలతో దుర్యోధనుని పుత్రుడైన లక్షణుని శిరస్సు ఖండించి, ఆ శిరస్సును మొండెం నుండి వేరుచేస్తాడు, అభిమన్యుడు.
అభిమన్యుని రథం మెరుపువేగంతో చక్రవ్యూహం చివరి ద్వారం వైపు దూసుకుపోతున్నది. జయద్రధుడు భీముడిని ద్వారం వద్దనే ఆపుచేయగలిగాడు. కౌరవసేనలో ఏడుగురు మహారథులు ఒక్కటయ్యారు. వీళ్ళతోపాటు కౌరవసైన్యం అంతా అధర్మంగా బాల అభిమన్యునిపై విరుచుకుపడ్తారు. చివరిశ్వాసవరకు అభిమన్యుడు రథచక్రంతో పోరాడుతాడు. కౌరవసేనలో ఏడుగురు మహారథులు మూకుమ్మడిగా చుట్టుముట్టి అభిమన్యుని వధిస్తారు. కర్ణుడులాంటి యోధులు అభిమన్యుని వీరత్వాన్ని ప్రశంసిస్తారు. చివరగా అభిమన్యుని వధకు మూల్యం చెల్లించే చింతలో కర్ణుడు ఉంటాడు. దుర్యోధనుడు విజయగర్వంతో నిశ్చింతగ విజయశంఖం పూరిస్తాడు.
ఈవిధంగా ఏకాంకీ రచయిత చంద్రప్రకాష్ వర్మ వీరసంతో తొణికిసలాడుతున్న ఏకాంకి ‘వీర్ అభిమన్యు’ విద్యార్థులకు నైతికత, సాహసం, బలిదానం లాంటి ఉన్నత గుణాల సందేశం ఇస్తుంది.
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वीर अभिमन्यु कठिन शब्दार्थ
प्रहरी गण = पहरेदार दल, కాపలాదారులదళం
अजेय = जिसे जीता न जा सके, అపజయం లేనివాడు
भेदन = छेदन, तोड़ना, ఛేదించడం
तारूण्य = यैवन, जवानी, యౌవ్వనం
तदबीर = मुक्ति, उपाय, यत्न, యుక్తి, ఉపాయం, ప్రయత్నం
दादा = बड़ो के लिए प्रयुक्त आदर सूचक शब्द, పెద్దవారికి ఉపయోగించే ఆదర సూచకమాట.
धंस जाना = भीतर घुसना, లోపలికి చొచ్చుకొనిపోవడం
खिलवाड़ = खेल, मन बहलाव, ఆట, సరదా
लोहे के चना चबाना = बहुत कठिन कार्य करना, క్లిష్టమైన పనిచేయడం
शीश = सिर, శిర్రస్సు, తల
तिरछा होना = एक ओर कुछ झुका होना, ఓ వైపు ఒరగటం
दुध मुँहा बच्चा = माँ का दूध पीनेवाला छोटा बच्चा, పాలుత్రాగే పిల్లవాడు
थपेड़ा = चपत, घात-प्रतिघात, దెబ్బ
लहूलुहान = खून से लथा पथ, రక్తసిక్తమైన
टूक = टुकडे, ముక్కలు
जीवट = साहस, पराक्रम, సాహసం, పరాక్రమం
मात करना = पराजय करना, ఓడించటం
पर्दा = पट, यवनिका, తెర, యవనిక