यात्रा और यात्री Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

Andhra Pradesh BIEAP AP Inter 2nd Year Hindi Study Material Pdf पद्यभाग 5th Poem यात्रा और यात्री Questions and Answers Summary.

Inter 2nd Year Hindi यात्रा और यात्री Questions and Answers

मूल्यांकन हेतु

अ. “यात्रा और यात्री” कविता का सारांश लिखिए ।
जवाब.
लोकप्रिय कवि और हालावाद के प्रवर्तक हरिवंशराय बच्चन की एक प्रेरणात्मक, दार्शनिक और प्रतीकात्मक कविता है, ‘यात्रा और यात्री’ । यह कविता प्रतीकात्मकरूप से जीवन को एक यात्रा और मनुष्य को एक यात्री के रुपदमें प्रस्तुत करती है । यह ‘चरैवेती-चरैवेती’ अर्थात् निरंतर चलते रहने का संदेश देती है ।

कविवर बच्चन कहते हैं कि तेरी साँस चलती है, तो तुझे भी जीवन पंथ पर चलना पडेगा । चलना जीवन के और रुकना मौत के समान है ।

हे राही ! देख, आसमान में तारे और तारागण निरंतर गीत गाते हुए चल रहे हैं । आकाश भी शून्य अर्थात् अंतरिक्ष में घूम रहा है । सब को घुमारहा है । अर्थात् ब्रह्मांड में कुछ भी स्थिर नहीं है। हमारे पावों के नीचे भूमि को अचला अर्थात् चलन रहित और स्थिर कहते हैं । लेकिन वह भी चंचला अर्थात् अस्थिर है, वह भी निरंतर सूर्य का परिभ्रमण करती रहती है ।

कविवर बच्चन कहते हैं कि हे राहगीर ! इस विश्व के पदार्थ मे एक कण भी और कालचक्र में एक क्षण भी कहीं भी नहीं रुक पाते । गति-शक्तियों ने तेरे चारों ओर घेर लिया है । तुझे अपनी जगह से चलना पड़ेगा । जबतक तेरी साँस चलती है, तब तुझे सतत् चलना ही पड़ेगा । तुझे अपने पैरों के छालों की परवाह नहीं करनी है । आगे बढ़ना ही है। यदि तुझे मखमली घास भी मिले या हरियाली छांह मिले तो वहाँ दो क्षण विश्राम लेना है । यात्रा के दौरान अनेक परीक्षाओं और प्रलोभनों का सामना करना पड़ता है । फिर भी आगे बढ़ना ही पड़ेगा ।

हे मुसाफिर ! साँस चलती है तो तुझे भी आगे-आगे चलना ही होगा । कविवर बच्चन जी कहते है कि हे पथिक ! तेरी जिंदगी की राह में कई तरह के काँटें पैरों में चुभकर तेज चलने को प्रेरित करेंगे। लेकिन कुछ तो रोकने की कोशिश करते ।
कविवर बच्चन जी कहते हैं कि हे पथिक तेरी जिंदगी की राह में कुछ काँटे तेरे पैरों में चुभकर यात्रा में बहुत बाँधा डालते हैं । ऐसे निर्जीव- सजीव काँटों को कुचलना पड़ेगा। तभी तेरी यात्रा निबोथ गति से जारी होगी । जब तक तेरी साँस चलती रहती है, तब तकतू चलना ही पड़ेगा। तेरी जीवन-यात्रा जारी करनी ही पड़ेगी ।

कविवर बच्चन कहते हैं कि हे यात्री देख, अपने कर्तव्य ने सूरज को हँसना भुला दिया । चंद्रमा को हँसना भुला दिया । रात विशेषतः अमावस समयपर आने के कर्तव्य में की रात भी तारों को जगाना

भुला दिया । अर्थात् प्रकृति की हर वस्तु चलायमान है । तेरी कर- दीपिका किसी हवा की झोंक से बुझजाने पर भी तेरे दिल में लक्ष्य- सिद्धि की आग जल रही है। लक्ष्य-सिद्धि के मार्ग में तुझे सहना ही पड़ेगा ।

कविवर बच्चन कहते हैं कि हे राही ! इस मंजिल के मुश्किल रास्ते में मुसीबतों को भूलकर आगे बढ़ना चाहिए । इसी को ही वीरता और निड़रतात कहते हैं । स्वप्न को साकार करना है, तो जब तक साँस चलती है तब तक चलना पड़ेगा ।

इस प्रकार कविवर बच्चन जी संदेश देते हैं कि ‘चरैवेति ………. चरैवेति’ अर्थात् चलते रहना …. चलतै रहना । इसका नाम जीवन है | रुकजाना मृत्यु है |

यात्रा और यात्री Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

आ. नीचे दिए गए पदों की संदर्भ सहित व्याख्या लिखिए ।

प्रश्न 1.
चल रहा है तारकों का
दल गगन में गीत गाता,
चल रहा आकाश भी है
शून्य में भ्रमता – भ्रमाता,
पाँव के नीचे पड़ी
अचला नहीं, यह चंचला है,
जवाब.
सामान्य संदर्भ: लोकप्रिय कवि और हालावाद के प्रवर्तक हरिवंशराय बच्चन की प्रेरणात्मक, दार्शनिक और प्रतीकात्मक कविता है, “यात्रा और यात्री’” । प्रस्तुत कवितांश इसीमें से उद्धृत है ।

निकटस्थ संदर्भ : कवि “साँस चलती है तुझे, चलना पड़ेगा ही मुसाफिर !” कहकर अपनी कविता का श्रीगणेश करते हैं । प्रस्तुत कवितांश इसी संदर्भाधीन है।

व्याख्या : हे राही ! देख, आसमान में तारे और तारागण निरंतर गीत गाते हुए चल रहे हैं । आकाश भी शून्य अर्थात् अंतरिक्ष में घूमरहा है । सब को घुमारहा है । अर्थात् ब्रह्मांड में कुछ भी स्थिरनहीं है। हमारे पावों के नीचे भूमि को अचला अर्थात् चलन रहित और स्थिर कहते हैं । लेकिन वह भी चंचला अर्थात् अस्थिर है, वह भी निरंतर सूर्य का परिभ्रमण करती रहती है ।

विशेषताएँ : यह संदेशात्मक कवितांश है । हिंदी-संस्कृत शब्दों की भाषा का प्रयोग किया गया है। भाषा सरल है । लेकिन अर्थ अत्यंत और दार्शनिक है | यह आरंभिक कवितांश है ।

यह उद्धारण संस्कृत का चरैवेत…. चरैवेति ‘वाक्यांश, अर्थात्’ निरंतर चलते रहो ……….. बढ़ते रहो की याद दिलाता है|

प्रश्न 2.
और जो उत्साह का
देते कलेजा चीर, ऐसे
कंटकों का दल तुझे
बढ़ते रहो’ की याद दिलाता है ।
दलना पड़ेगा ही, मुसाफिर,
साँस चलती है तुझे
चलना पड़ेगा ही मुसाफिर !
जवाब.
सामान्य संदर्भ: लोकप्रिय कवि और हालावाद के प्रवर्तक हरिवंशराय बच्चन की प्रेरणात्मक, दार्शनिक और प्रतीकात्मक कविता है, “यात्रा और यात्री” । प्रस्तुत कवितांश इसीमें से उद्धृत है ।

निकटस्थ संदर्भ: कवि कहते हैं कि जिंदगी की राह में कुछ ऐसे कहाँ होते हैं, जो तुझे आगे चलने नही देते । प्रस्तुत प्रसंग इस संदर्भाधीन है |

व्याख्या : कविवर बच्चन जी कहते हैं कि हे पथिक तेरी जिंदगी की राह में कुछ काँटे तेरे पैरों में चुभकर यात्रा में बहुत बाँधा डालते हैं । ऐसे निर्जीव-सजीव काँटों को कुचलना पड़ेगा । तभी तेरी यात्रा निबोथ गति से जारी होगी । जब तक तेरी साँस चलती रहती है, तब तकतू चलना ही पड़ेगा । तेरी जीवन-यात्रा जारी करनी ही पड़ेगी ।

विशेषताएँ : यह संदेशात्मक कवितांश है । हिंदी-संस्कृत शब्दों की भाषा का प्रयोग किया गया है । भाषा सरल है । लेकिन अर्थ अत्यंत गूढ और दार्शनिक है । यह आरंभिक कवितांश है ।

यह उद्धारण संस्कृत का चरैवेत…. चरैवेति’ वाक्यांश, अर्थात् ‘ निरंतर चलते रहो बढ़ते रहो’ की याद दिलाता है।

इ. सही विकल्प चुनकर दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

प्रश्न 1.
“ यात्रा और यात्री” कविता के कवि कौन हैं ?
अ) सुमित्रानंदन पंत
आ) हरिवंशराय बच्चन
इ) मैथिलीशरण गुप्त
जवाब.
आ) हरिवंशराय बच्चन

प्रश्न 2.
साँस चलती है तुझे पडेगा ही मुसाफिर !
अ) चलना
आ) रुकना
इ) सोना
जवाब.
अ) चलना

प्रश्न 3.
” यात्रा और यात्री” कविता में कवि ने जीवन की तुलना किससे की है ?
अ) युद्ध से
आ) यात्रा से
इ) पर्व से
जवाब.
आ) यात्रा से

प्रश्न 4.
“अचला नहीं यह चंचला है” पंक्ति में अचला किसके लिए प्रयुक्त हुआ है ?
अ) आकाश
आ) पृथ्वी
इ) सूर्य
जवाब.
आ) पृथ्वी

प्रश्न 5.
“मुसाफिर” शब्द का अर्थ क्या है ?
अ) विद्यार्थी
आ) यात्री / पथिक
इ) सैनिक
जवाब.
आ) यात्री / पथिक

यात्रा और यात्री Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

यात्रा और यात्री Summary in Hindi

कवि परिचय

हरिवंशराय बच्चन हिंदी के महान और लोकप्रिय कवि हैं । उनका जन्म 27 नवंबर 1907 को इलाहाबाद के पास प्रतापगढ़ में हुआ था । वे अँग्रेजी साहित्य में एम. ए. हैं। उन्होंने अध्यापन किया, कुछ समय के लिए सरकारी नौकरी की । उन्होंने कवि सम्मेलनों का निर्वाह किया, भाग लिया और वाहवाही लूट ली ।

बच्चन हालावाद के प्रवर्तक हैं । इनका साहित्य जीवन के आनंद, प्रेम, संघर्ष और दर्शन से ओतप्रोत है । मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, निशा निमंत्रण, एकांत संगीत, क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निमंत्रण आदि इनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं ।

उनकी साहित्यिक रचनाओं के लिए उन्हें पद्मभूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार यश भारती पुरस्कार और सरस्वती सम्मान से सम्मानित किया गया । उनका निधन सन् 2003 में हुआ था ।

पाठ का सारांश

लोकप्रिय कवि और हालावाद के प्रवर्तक हरिवंशराय बच्चन की एक प्रेरणात्मक, दार्शनिक और प्रतीकात्मक कविता है, ‘यात्रा और यात्री’ । यह कविता प्रतीकात्मक रूप में जीवन को एक यात्रा और मनुष्य को एक यात्री के रूप में प्रस्तुत करती है । यह ‘चरैवेतीं-चरैवेती’ अर्थात् निरंतर चलते रहने का संदेश देती है ।

कविवर बच्चन कहते हैं कि हे यात्री ! तेरी साँस चलती है तो तुझे भी जीवन पंथ पर चलना पडेगा । चलना जीवन के और रुकना मौत के समान है ।

हे राही ! देख, आसमान में तारे और तारागण निरंतर गीत गाते हुए चल रहे हैं | आकाश भी शून्य अर्थात् अंतरिक्ष में धूम रहा है । सब को घुमा रहा है । अर्थात् ब्रह्मांड में कुछ भी स्थिर नहीं है। हमारे पावों के नीचे भूमि को अंचला अर्थात् चलन रहित और स्थिर कहते हैं । लेकिन वह भी चंचला अर्थात् अस्थिर है, वह भी निरंतर सूर्य का परिभ्रमण करती रहती है ।

कविवर बच्चन कहते हैं कि हे राहगीर ! इस विश्व के पदार्थ एक कण भी और कालचक्र में एक क्षण भी कहीं भी नहीं रुक पाते । गति- शक्तियों ने तेरे चारों ओर घेर लिया है । तुझे अपनी जगह से चलना पड़ेगा । जबतक तेरी साँस चलती है, तब तुझे सतत् चलना ही पड़ेगा । तुझे अपने पैरों के छालों की परवाह नहीं करनी है । आगे बढ़ना ही है। यदि तुझे मखमली घास भी मिले या हरियाली छांह मिले तो वहाँ दो क्षण विश्राम लेना है । यात्रा के दौरान अनेक परीक्षाओं और प्रलोभनों का सामना करना पड़ता है । फिर भी आगे बढ़ना ही पड़ेगा ।

हे मुसाफिर ! साँस चलती है तो तुझे भी आगे-आगे चलना ही होगा | जिंदगी की राह में कईतरह के काँटें पैरों में चुभकर तेज चलने को प्रेरित करेंगे । लेकिन कुछ तो रोकने की कोशिश करते ।

कविवर बच्चन जी कहते हैं कि हे पथिक ! तेरी जिंदगी की राह में कुछ काँटे तेरे पैरों में चुभकर यात्रा में बहुत बाँधा डालते हैं । ऐसे निर्जीव- सजीव काँटों को कुचलना पड़ेगा। तभी तेरी यात्रा निर्बाध गति से जारी होगी । जब तक तेरी साँस चलती रहती है, तब तक तू चलना ही पड़ेगा । तेरी जीवन-यात्रा जारी करनी ही पड़ेगी ।

कविवर बच्चन कहते हैं कि हे यात्री देख, अपने कर्तव्य ने सूरज को हँसना भुला दिया । चंद्रमा को हँसना भुला दिया । रात विशेषतः अमावस समयपर आने के कर्तव्य में की रात भी तारों को जगाना भुला दिया । अर्थात् प्रकृति की हर वस्तु चलायमान है । तेरी कर-दीपिका किसी हवा की झोंके बुझ जाने पर भी तेरे परवाह नही दिल में लक्ष्य – सिद्धि की आग जल रही है । लक्ष्य-सिद्धि के मार्ग में तुझे सहना ही पड़ेगा ।

BARU कविवर बच्चन कहते हैं कि हे राही ! इस मंजिल के मुश्किल रास्ते में मुसीबतों को भूलकर आगे बढ़ना चाहिए । इसी को ही वीरता और निड़रत्प कहते हैं | स्वप्न को साकार करना है, तो जब तक साँस चलती है तब तक चलना पड़ेगा ।

इस प्रकार; कविवर बच्चन जी संदेश देते हैं कि ‘चरैवेति ………. चरैवेति’ अर्थात् चलते रहना ………… चलते रहना । इसका नाम जीवन है । रुकजाना मृत्यु है ।

यात्रा और यात्री Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

यात्रा और यात्री Summary in English

‘Yatra aur Yatree’, an inspirational, philosophical and symbolic poem is written by the popular pioneer of the school of wine poetry Harivansh Ray Bachchan. The poem presents life as a journey and man as a traveller symbolically. It advises, “Charaivatha… Charaivatha,” means ‘Keep moving… Keep going… Keep walking’.

The poem emphasizes the necessity of continuous movement in the journey of life. It says as long as one is breathing, one must keep moving forward despite challenges.

The poet says that everything in nature is in motion-stars, sky and the earth, sun and moon-and thus, a human traveller must also keep moving.

The traveller must accept the obstacles and struggles, as they provide the impetus to move faster and stay vigilant. He should care for injuries, blisters on the feet.

The sun and the moon always moving to perform their duties. The traveller should find the inner spark within their heart and keep moving in order to reach their goal.

Thus the poem of Bachchan is a call to action to treat life as a continuous journey, advocating for unwavering momentum and the strength to overcome hurdles.

यात्रा और यात्री Summary in Telugu

హిందీ సాహిత్యంలో ప్రసిద్ధ కవి, హాలావాదం ప్రతిపాఠకుడు అయిన హరివంశరాయ్ బచ్చన్ కవిత, ‘యాత్ర ఔర్ యాత్రీ’ ప్రేరణార్ధకమైనది. ఈ కవిత ప్రతీకాత్మకరూపంలో జీవనాని ఓ యాత్రలా మనిషిని ఓ యాత్రికునిలా ప్రతిపాదించింది. ఇది ‘చెరైవేతి… చెరైవేతి’ అంటే నిరంతరం కదులుతూ ఉండు… సాగుతూ ఉండు అనే సందేశాన్నిస్తుంది.

నీ శ్వాస ఆడుతున్నంత వరకు నీవు జీవనపధంలో నడుస్తూఉండు. జీవన పధంలో సాగటమంటే జీవించటంతోనూ, ఆగటమంటే చావటంతోనూ సమానం.

అదిగో, ఆకాశంలో నక్షత్రాలు కదులుతున్నాయి. ఆకాశం కూడా కదులుతుంది. బ్రహ్మాండంలో ఏదీ స్థిరం కాదు. భూమికూడ తిరుగుతుంది. విశ్వంలో ఏకణంగాని, ఏక్షణంగాని నిలకడగాలేవు. నీవుకూడా కదలాలి.
జీవనయాత్రలో అనేక ఒడిదుడుకులు, అడ్డంకులు వస్తూవుంటాయి. బాధల్ని అన్నింటిని భరించి, వాటి నన్నింటితోసుకుపోతూ మున్ముందుకు సాగిపోవాలి. శ్వాస కదులుతుంటే నీవూ కదలాలి ! ప్రలోభాలకు లొంగకుండా సాగిపోవాలి. దారిలో రకరకాల ముళ్ళు, ముళ్ళతీగలు కాళ్ళకు గ్రుచ్చుకుంటూ అడ్డంకులు సృష్టిస్తాయి వాటిని త్రొక్కుకుంటూ నల్లేరుపై బండి నడకలా ముందుకు సాగిపోవాలి.

ఓ యాత్రికుడా, కర్తవ్యం సూర్యుణ్ణి నవ్వకుండా చేసింది. చంద్రుణ్ణి కూడ చిరునవ్వు చిందకుండా చేసింది. రాత్రి ప్రత్యేకంగా అమావాస్య రాత్రి నక్షత్రాల్ని లేపకుండా చేసింది. నీ కరదీపం ఆరిపోయినా పర్వాలేదు. కాని హృదయదీపం వెలుగుతూనేఉంది. నీ కర్తవ్యపధాన్ని, ముగించు లక్ష్యం వైపు సాగిపోతుంటావు.

ఈ కష్టతరమైన పధంలో దు:ఖాల్ని, అడ్డంకుల్ని మరచిపోయి ముందుకు సాగిపోవటాన్ని వీరత్వం, నిర్భయం అంటారు. స్వప్నంసాకారం చేయాలంటే శ్వాస ఆడే వరకు ప్రయాణం ఆగిపోకుండా సాగిపోతూఉండాలి.
ఈ విధంగా కవి బచ్చన్ ‘చెరైవేతి… చెరైవేతి’ అంటే ముందుకు ‘సాగిపోతూఉండు…సాగిపోతూఉండు’ అనే సందేశాన్ని ఇస్తున్నారు. దీని పేరే జీవితం. సాగపోవటం ఆగిపోతే మరణం అంటారు.

यात्रा और यात्री Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

यात्रा और यात्री कठिन शब्दार्थ

यात्रा = सफर, जीवन का रास्ता, యాత్ర
यात्री = मुसाफिर, जीवन जीनेवाला, యాత్రికుడు
मुसाफिर = यात्री, राही, पथिक, राहगीर, యాత్రికుడు
तारक तारा, नक्षत्र, तारका, तारिका, నక్షత్రాలు, తారలు
भ्रमता = घूमता-फिरता, తిరుగుతూ
भ्रमाता = घुमाता, త్రిపిస్తూ
अचला = भूमि, पृथ्वी, భూమి, పృథ్వి
चंचला = अस्थिर, हिलता डुलता, చంచల, అస్థిరత
थल = स्थल, स्थान, जगह, స్థలం, చోటు
टिकना = ठहरना, स्थिर रहना, స్థిరంగా ఉండటం
टलना = हटना, खिसकना, జారుట
गर्त = गड्ढ़ा, खड्डा, గొయ్యి, గుంట, పగులు
जमाना पड़ना = स्थिर होना, अच्छी तरह बैठना, నిలద్రొక్కుకోవటం
छाले छिलाना = पैरों की त्वचा फटना, (यात्री की कठिनाई), పాదాలు పగులుట, (యాత్రీకులకు కఠినం)
लोट जाना = लेट जाना, शरीर फैलाना, పండుకొనుట
जुड़ना = जोड़ना, కలపటం
पग = पैर, पाँव, పాదం
प्रलोभन = आकर्षण, लालच, ఆకర్షణ, ఆశ చూపటం
डटना = जमकर खड़ा होना, కాలుని ధృడంగా నిల్చునుట
उधार = ऋण, कर्ज, ఋణం, అప్పు
बिवश = लाचार, बेबस, గత్యంతరములేని, విధిలేని
गड़ना = चुभना గ్రుచ్చుకొనుట
शूल = काँटे, ముళ్ళు
स्फूर्ति = शक्ति, ताजगी, చురుదనం, చాకచక్యము
कंटक = काँटा, ముల్లు
कलेजा चीरना = हृदय को घायल करना, గుండెను చీల్చుట
दलना = कुचलना, रौंदना, అణగ త్రొక్కటం, కాళ్ళతో తొక్కటం
यामिनी = रात्रि, రాత్రి
तारिका = तारक, नक्षत्र, నక్షత్రాలు
बहाना = कारण, కారణం
मग = मार्ग, మార్గం, దారి
साँस फूलना = जल्दी-जल्दी साँस चलना, , త్వరత్వరగా ఊపిరి పీల్చుకోవటం
सुधि = स्मृति, याद, జ్ఞాపకం
झोंका = हवा का तेज झटका, మోసంచేయుట
छलना = पार पाना, जीतना, धोखा देना, గాలిఊపు, వాయువీచిక
बेहयाई = बेशर्मी, निडरता, నిర్లజ్జ, సిగ్గుమాలిన, నిర్భయం

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