वह तोड़ती पत्थर Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

Andhra Pradesh BIEAP AP Inter 2nd Year Hindi Study Material Pdf पद्यभाग 4th Poem वह तोड़ती पत्थर Questions and Answers Summary.

Inter 2nd Year Hindi वह तोड़ती पत्थर Questions and Answers

मूल्यांकन हेतु

अ. “वह तोड़ती पत्थर” कविता सारांश लिखिए ।
जवाब.
‘महाप्राण’ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। वे क्रांतिकारी और प्रमुख छायावादी कवि हैं। उनकी कविता ‘वह तोड़ती पत्थर’ हिंदी साहित्य की एक कालजयी प्रगतिवादी कविता है । इसमें श्रमजीवी भारतीय नारी का संघर्षमय दयनीय जीवन-चित्रण है ।

निराला जी कहते हैं कि मैंने इलाहाबाद मार्ग के किनारे पत्थर तोड़ती हुई एक गरीब मजदूरिन को देखा । भीषण गर्मी का मौसम था । दोपहर समय था (लू से बचने के लिए) उसे वहाँ कोई छायादार वृक्ष भी नहीं था । उसका शरीर धूलि धूसरित और गरमी से तपित था । उसका शरीर काला और जवानी से परिपूर्ण था । उसकी आँखें नीचे देख रही थीं अथार्त वह उसकी सारी दृष्टि काम पर था | उसका मन पत्थर तोड़ने के काम में लगा हुआ था । हाथ में भारी हथौड़े से बारंबार चोट मारते हुए वह पत्थर तोड़ रही थी । उसके सामने चाहर दीवारी से निर्मिति अनेक गगनचुंबी भवन थे । लेकिन कोई इसका ध्यान नहीं कर रहा था । यह अमीर-गरीब के बीच की खाई को दर्शाता है |

कवि निराला जी कहते हैं कि उस गरमी के मौसम में चिलचिलाती धूप और गरमी बढ़ रही थी। दिन गरमी से जलता रहा था। (सारा भूतल जलती हुई रुई की तरह दिखाई दे रही थी । धूलि – धूसरित चिंगारियाँ फैल रही थी ।) ऐसे कठोर वातावरण में वह मजदूरनी पत्थर तोड़ रही थी ।

कवि निराला कहते हैं कि जब मजदूरिन मेरी ओर देखती है, तो उसकी आँखों में कोई शिकायत नहीं थी । (उन आँखों में स्वाभिमान डरलकता था ।) वह एक बार महलों की ओर देखकर अपने काम में लीन हो गई । मैंने उसकी मनोभावना को अपनी कल्पना शकित से सुनी। वह पसीने से तर हो रही है। उसकी चेष्टा कह रही होगा मानो मैं तोडती रही पत्थर यह उसके अटूट संघर्ष और श्रम के प्रति निष्ठा का प्रतीक है |

इस प्रकार, कविवर निराला जी मजदूर वर्ग के शोषण और समाज की संवेदन हीनता को उजागर करते हैं ।

आ. नीचे दिए गए पंक्तियों की संदर्भ सहित व्याख्य लिखिए ।

प्रश्न 1.
देखा उसे मैंने इलाहाबाद के पथ पर
वह तोड़ती पत्थर
कोई न छायादार
पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार
श्याम तन, भर बँधा यौवन
नत नयन, प्रिय कर्म-रत मन
जवाब.
सामान्य संदर्भ: ‘महाप्राण’ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं । वे क्रांतिकारी और प्रमुख छायावादी कवि हैं । उनकी कविता ‘वह तोड़ती पत्थर’ हिंदी साहित्य की एक कालजयी प्रगतिवादी कविता है । इसमें श्रमजीवी भारतीय नारी का संघर्षमय दयनीय जीवन-चित्रण है |

निकटस्थ संदर्भ : यह आरंभिक कवितांश है । कवि, ‘वह तोड़ती पत्थर’ कह कर कविता का आरंभ करते हैं । ये पंक्तियाँ उस संदर्भ की हैं। वीर और करूणा रस का मिश्रण है ।

व्याख्या : निराला जी कहते हैं कि मैंने इलाहाबाद मार्ग के किनारे पत्थर तोड़ती हुई एक गरीब मजदूरिन को देखा । भीषण गर्मी का मौसम था। दोपहर समय था लू से बचने के लिए उसे वहाँ कोई छायादार वृक्ष भी नहीं था । उसका शरीर धूलि धूसरित और गरमी से तपित था । उसका शरीर काला और जवानी से परिपूर्ण था | उसकी आँखें नीचे देख रही थीं अथार्त उसकी सारी दृष्टि काम पर थी । उसका मन पत्थर तोड़ने के काम में लगा हुआ था ।

विशेषताएँ : इस कवितांश में मजदूरिन की दुर्दशा का यथार्थवादी चित्रण है । भाषा खड़ीबोली हिन्दी है । इसमें वर्णनात्मक और प्रतीकात्मक शैली है । वीर और करुणा रस का मिश्रण है । मुक्त छंद है ।

प्रश्न 2.
चढ़ रही थी धूप, गर्मियों के दिन
दिवा का तमतमाता रूप, उठी झुलसाती हुई लू,
रूई ज्यों जलती हुई भू, गर्द चिनगीं छा गई,
प्रायः हुई दुपहर, वह तोड़ती पत्थर ।
जवाब.
सामान्य संदर्भ: ‘महाप्राण’ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं । वे क्रांतिकारी और प्रमुख छायावादी कवि हैं । उनकी कविता ‘वह तोड़ती पत्थर’ हिंदी साहित्य की एक कालजसी प्रगतिवादी कविता है । इसमें श्रमजीवी भारतीय नारी का संघर्षमय दयनीय जीवन-चित्रण है ।

निकटस्थ संदर्भ : मजदूरिन बार-बार भारी हथौडे से चोट मारते हुए पत्थर तोड़ती है । इस संदर्भ में कवि यह प्रसंग करते हैं ।

व्याख्या : कवि निराला जी कहते हैं कि उस गरमी के मौसम में चिलचिलाती धूप और गरमी बढ़ रही थी। दिन गरमी से जलता रहा था । सारा भूतल जलती हुई रुई की तरह दिखाई दे रही थी । धूलि – धूसरित चिंगारियाँ फैल रही थी । ऐसे कठोर वातावरण में वह मजदूरनी पत्थर तोड़ रही थी ।

विशेषताएँ : यह कवितांश गरमी मौसम का स्वच्छ प्रतिबिंब है । भाषा खड़ीबोली हिंदी है । भाषा सरल-सुबोध है। यह मुक्त छंद है ।

वह तोड़ती पत्थर Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

इ. सही विकल्प चुनकर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

प्रश्न 1.
” वह तोड़ती पत्थर” कविता के कवि कौन हैं ?
अ) सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
आ) महादेवी वर्मा
इ) रामधारी सिंह दिनकर
जवाब.
अ) सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

प्रश्न 2.
कवि ने मजदूरिन को कहाँ देखा ?
अ) बनारस के घाट पर
आ) इलाहाबाद के पथ पर
इ) लखनऊ की सड़क पर
जवाब.
आ) इलाहाबाद के पथ पर

प्रश्न 3.
महिला क्या तोड़ रही थी ?
अ) पत्थर
आ) फल
इ) फूल
जवाब.
अ) पत्थर

प्रश्न 4.
कविता में “गुरु हथौड़ा ” का अर्थ है –
अ) साधारण हथौड़ा
आ) भारी हथौड़ा
इ) छोटा हथौड़ा
जवाब.
आ) भारी हथौड़ा

प्रश्न 5.
” वह तोड़ती पत्थर” कविता में कवि ने किस मौसम का चित्रण किया है ?
अ) गरमी
आ) सर्दी
इ) वर्षा
जवाब.
अ) गरमी

वह तोड़ती पत्थर Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

वह तोड़ती पत्थर Summary in Hindi

कवि परिचय

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म बंगाल के मेदिनीपुर जनपद में 1896 ई. में हुआ था । इनके पिता पं. रामसहाय त्रिपाठी थे । इनका जीवन अनेक अभावों, विपत्तियों और विरोधी तत्वों में बीता। इनका देहांत 15 अक्तूबर, 1961 ई. में हुआ |

निराला को हिंदी, बंगाली, संस्कृत और अँग्रेजी का खूब ज्ञान था । वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे | हिंदी साहित्य के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में एक थे । वे क्रांतिकारी कवि थे । वे मुक्तछंद के प्रवर्तक थे । इनके रचनाओं में छायावाद, रहस्यवाद और प्रगतिवाद के दर्शन होते हैं । इनमें प्रकृति प्रेम, राष्ट्रवाद और दार्शनिकता का अनूठा संगम मिलता है । उन्होंने निरंतर काव्य साधना में तल्लीन रहे थे । उनका उपनाम ‘निराला’ है और उन्हें हिंदी साहित्य में ‘महाप्राण’ के नाम से जाना जाता है ।

उन्होंने काव्य, उपन्यास, कहानियाँ और निबंध भी लिखे । अनामिका, परिमल, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, सरोज स्मृति, अप्सरा, अलका, चतुरी चमार, प्रबंध-प्रतिमा आदि उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं ।

पाठ का सारांश

‘महाप्राण’ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। वे क्रांतिकारी और प्रमुख छायावादी कवि हैं । उनकी कविता ‘वह तोड़ती पत्थर’ हिंदी साहित्य की एक कालजयी प्रगतिवादी कविता है । इसमें श्रमजीवी भारतीय नारी का संघर्षमय दयनीय जीवन-चित्रण है ।

निराला जी कहते हैं कि मैंने इलाहाबाद मार्ग के किनारे पत्थर तोड़ती हुई एक गरीब मजदूरिन को देखा। भीषण गर्मी का मौसम था। दोपहर समय था (लू से बचने के लिए) उसे वहाँ कोई छायादार वृक्ष भी नहीं था । उसका शरीर धूलि धूसरित और गरमी से तपित था । उसका शरीर काला और जवानी से परिपूर्ण था । उसकी आँखें नीचे देख रही थीं अथार्त वह उसकी सारी दृष्टि काम पर थी । उसका मन पत्थर तोड़ने के काम में लगा हुआ था | हाथ में भारी हथौड़े से बारंबार चोट मारते हुए वह पत्थर तोड़ रही थी । उसके सामने चाहर दीवारी से निर्मिति अनेक गगनचुंबी भवन थे । लेकिन कोई इसका ध्यान नहीं कर रहा था । यह अमीर-गरीब के बीच की खाई को दर्शाता है ।

कवि निराला जी कहते हैं कि उस गरमी के मौसम में चिलचिलाती धूप और गरमी बढ़ रही थी । दिन गरमी से जलता रहा था। (सारा भूतल जलती हुई रुई की तरह दिखाई दे रही थी । धूलि – धूसरित चिंगारियाँ फैल रही थी । ऐसे कठोर वातावरण में वह मजदूरनी पत्थर तोड़ रही थी ।

कवि निराला कहते हैं कि जब मजदूरिन मेरी ओर देखती है, तो उसकी आँखों में कोई शिकायत नहीं थी । (उन आँखों में स्वाभिमान डरलकता था ।) वह एक बार महलों की ओर देखकर अपने काम में लीन हो गई । मैंने उसकी मनोभावना को अपनी कल्पना शकित से सुनी। वह पसीने से तर हो रही है । उसकी चेष्टा कह रही होगा मानो मैं तोड़ती रही पत्थर । यह उसके अटूट संघर्ष और श्रम के प्रति निष्ठा का प्रतीक है ।

इस प्रकार, कविवर निराला जी मजदूर वर्ग के शोषण और समाज की संवेदनहीनता को उजागर करते हैं ।

वह तोड़ती पत्थर Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

वह तोड़ती पत्थर Summary in English

Suryakanth Tripathi Nirala is a man of many talents. He is a revolutionary and romatic poet. His poem, “Vah Thodthee Pathar” is an immortal and progressive poem. depicts the struggles of the working- class women life of Indian society in a pitiable manner.

Nirala says, I saw a poor lady who was breaking the stones on the side of the road of Illahabad. It was the summer season. It was mid- day. There was no any shade-tree to escape her from that heat. Her body was full of dust scorched by heat. Her body was black. She is in full of youth. Her all concentration was in the work only. She was breaking the rock with the huge hammer in her hands. In front of her, there were high polatial mansions. Thin shows the wide gap between the rich and the poor.

The poet Nirala says that in the hot summer, the scorching sun- light, and heat were increasing. The day was burning with heat. The entire earth seemed to be burning cotton. In this hard climate the woman- worker was breaking the rocks.

The poet Nirala says that, when the woman-worker was looking at him, no complaint was seen in her looks. Once she had a look on the high palatial mansions and immersed in her work. This act says that she was breaking the rocks.

In this was the great poet Niralaji exposes the exploitation of the working class and the insensitivity of the society.

वह तोड़ती पत्थर Summary in Telugu

సూర్యకాంత్ త్రిపాఠీ నిరాలా బహుముఖీ ప్రతిభావంతుడు. ఈయన విప్లవ కవి మరియు భావ కవి. ఆయన కవిత, ‘వహ్ తో పత్థర్’ హిందీ సాహిత్యంలో అమర కవిత మరియు అభ్యుదయ కవిత. ఇందులో, శ్రమజీవియైన భారతీయ సంఘర్షణమైన, దయనీయమైన జీవన చిత్రం ఉన్నది.

నేను అల్హాబాద్ మార్గం వారన రాళ్ళు కొడ్తూ ఉన్న ఓ బీద రాలైన శ్రామికురాలుని చూశానని నిరాలా చెప్తున్నాడు. దారుణమైన వేసవి కాలం. మధ్యాహ్నసమయం. అచ్చట నీడనిచ్చే ఏ చెట్టూ లేదు. ఆమె శరీరం దుమ్ము ధూళితో మలినమై ఉన్నది. వేడివలన ఆమె శరీరం మాడిపోయి కమిలి ఉన్నది. శరీరం నల్లగా ఉంది. ఆమె పరిపూర్ణ యౌవనంలో ఉన్నది. ఆమె మనస్సు, ఆమె దృష్టి అంతా రాళ్ళు పగలగొట్టటంలోనే ఉన్నది. చేతుల్లో గల పెద్ద సుత్తితో ప్రతిసారీ రాళ్ళను కొడుతూ ఉంది. ఆమె ఎదురుగా ఆకాశహార్యాలు ఎన్నో ఉన్నాయి. కాని ఆమెను ఎవరూ కూడ పట్టించుకొనే పాపానలేరు. ఇది ధనికుల మధ్య అఖాతం సూచిస్తుంది.

ఆ వేసలి కాలంలో చిటపటలాడే ఎండ వేడి పెరుగుతూ ఉన్నాయి. మధ్యాహ్నం వేడితో మండిపోతుంది. భూతలమంతా దూది తగులబడ్డట్లు ఉన్నది. ఇటువంటి క్లిష్టమైన వాతావరణం లో ఆ శ్రామిక మహిళ రాళ్ళు బ్రద్దలుకొడుతుంది.

ఆ శ్రామికమహిళ నావంక చూసినపుడు ఆమె చూపులో ఏ ఫిర్యాదూ కనపడలేదు. ఆమె చూపులో స్వాభిమానం పుష్కలంగా ఉన్నది. ఆమె ఓసారి ఆ భవంతులవంక జూచి తన పనిలో నిమగ్నమయినది. ఆమె చేష్ట ‘నేను రాళ్ళను బ్రద్దలకొడుతున్నానని చెప్పినట్లుగా ఉందని కవి నిరాలా చెప్పుచున్నాడు.

ఈ విధంగా కవి నిరాలా శ్రామికవర్గం శోషణ, మరియు సమాజం సంవేదన హీనతను దర్పణం పట్టారు.

वह तोड़ती पत्थर Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

वह तोड़ती पत्थर कठिन शब्दार्थ

तोड़ती पत्थर = पत्थरों को हथौड़े से तोड़ने का काम करना, పెద్ద సుత్తితో రాళ్ళను పగలగొట్టడం
पथ = मार्ग, మార్గం
छायादार = छाया देनेवाला , నీడనిచ్చే
तला = तल, पेंदा, క్రింద
रयाम तन = साँवला शरीर, నల్లని శరీరం
भर बँधा यौवन = जवानी से परिपूर्ण शरीर, యవ్వనంతో పరిపూర్ణమైన శరీరం
नत नयन = झुकी हुयी आँखें, క్రింది చూపుతో
कर्म-रत मन = काम में तल्लीन मन , పనిలో నిమగ్నమైన మనస్సు
गुरु हथौड़ा = भारी हथौड़ा, जो ठोकने, पीटने आदि के काम में आनेवाला लोहे का औजार, భారీయైన (పెద్దదైన) సుత్తి
प्रहार = आघात, चोट, దెబ్బ
गुरु-मल्लिका = पेड़ों का कतार, చెట్లవరుస, చెట్లబారులు
अट्टालिका = ऊँची इमारत, ఎత్తైన భవనం
प्राकार = चहार दीवारी, భవనాల చుట్టూ గల గోడ, ప్రహారీ గోడ
चढ़ रही धूप = सूर्य प्रकाश बढ़ना, ఎండెక్కటం
दिवा = दिन, పగలు
तमतमाना = अत्यधिक ताप के कारण लाल होना
झुलसाना = बहुत जल जाना, మండుట, మాడుట
लू = गर्मियों की जलती हुई हवा, గాల్పు, వడగాలి
रूई = रूई, कपास के अंदर का धूआ,
भू = भूमि, जमीन, భూమి, నేల
गर्द चिनगीं = धूल और चिंगारी जैसी चमक, ధూళితో కూడిన నిప్పు రవ్వల లాంటి మెరుపు
प्रायः = शायद, బహుళ
छिन्नतार = टूटी हुई डोर या स्थिति, తెగిన దారం లేదా దశ
सितार = वीणा जैसा वाद्य, వీణ లాంటి వాయిద్యం
सघर = सुघड़, सुडैल और सुंदर, कुशल, निपुण, అందమైన
सीकर = पसीना की बूँद, చెమట చుక్క
लीन = निमग्न होना, तल्लीन होना, डूब जाना, నిమగ్నమవటం, మునిగిపోవుట

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