पंचवटी Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

Andhra Pradesh BIEAP AP Inter 2nd Year Hindi Study Material Pdf पद्यभाग 3rd Poem पंचवटी Questions and Answers Summary.

Inter 2nd Year Hindi पंचवटी Questions and Answers

मूल्यांकन हेतु

अ. “पंचवटी” कविता का सारांश लिखिए ।
जवाब.
राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ जी की कविता, ‘पंचवटी’ में श्रीराम – वनवास प्रसंग हैं। इस में पंचवटी प्राकृतिक सुंदरता, श्रीराम की वीरता – धर्मनिष्ठा, सीता माता का पतिव्रता – धर्म, लक्ष्मण का कर्तव्य निष्ठा आदि का सजीव वर्णन हैं ।

राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त’ वर्णन करते हैं कि पंचवटी में सुंदर चंद्रमा की चंचल किरणें पानी और जमीन पर अठखेलियाँ कर रहीं हैं। भूमि और आकाश में निर्मल चाँदनी फैली हुई है । हरी भरी घास की नोकों से मानों धरती रोमांचित हो रही हो । वृक्ष भी मंद हवा में मस्तों में झूम रहे हों ।

राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त’ कहते हैं कि पंचवटी की छाया में एक सुंदर पर्णशाला है । इसके सामने निर्मल चट्टान पर वीर शूर निर्भीक धनुर्बाण धर्ता लक्ष्मण जाग रहा है । सारा जग सो रहा है । राम और लक्ष्मण मन्मथ की तरह राज- सुख भोगने के योग्य हैं । लेकिन वे आज जंगल में सन्यासियाँ की तरह है ।

राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ जी प्रश्न करते हैं कि यह वीर लक्ष्मण राज सुख त्याग कर सन्यासी बनकर किस व्रत में लीन हैं। वह अपना पूरा तन-मन जीवन समर्पित कर कुटीर का पहरा दे रहा है ।

‘राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त’ जी कहते हैं कि त्रिलोक लक्ष्मीदेवी सीता माता भूलोक की दुर्दशा मिटाने अपने पति श्रीराम के साथ जंगल में आई । सीता माता की रक्षा करना वीर लक्ष्मण का परम कर्तव्य है । यह निर्जन वन है । अभी रात बाकी है । यहाँ राक्षसों की माया का डर है ।

राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ जी कहते हैं कि रात को लोग सोते समय, धरती ओस की बूँदों के रूप में मोती बिखेर देती है । प्रातः होने पर सूरज आकर उन मोतियों को उठा लेता है । अर्थात् वे मोती धूप के कारण सूख जाते हैं । इससे संध्या रूपी सुंदरी का सून्य-सा श्यामल रूप झिलमिल करता हुआ अति दीप्ति हो जाती है ।

राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ जी कहते हैं कि लक्ष्मण जी वनवास के समय को याद कर रहे हैं। लक्ष्मण जी कहते हैं कि चौदह वर्ष के वनवास में तेरह वर्ष बीत चुके हैं। पिताजी दशरथ हमारे वियोग में दुःखी होकर बेहोश हो गए थे। वनवास की पूर्ति में समय सीमा बहुत कम है । इस वनवास में, मुझे सीता – राम की सेवा का पुण्य मिलता है । इससे बढ़कर कोई संपदा नहीं हो सकती ।

इस प्रकार, राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ सीता – राम के वनवास का सुंदर चित्रण करते हैं ।

पंचवटी Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

आ. नीचे दिए गए पदों की संदर्भ सहित व्याख्या लिखिए ।

प्रश्न 1.
चारू चन्द्र की चंचल किरणें, खेल रही हैं जल-थल में,
स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बर तल में ।
पुलक प्रकट करती है धरती, हरित तृणों की नोकों से,
मानो झूम रहे हैं तरू भी, मन्द पवन के झोंकों से ।
जवाब.
सामान्य संदर्भ : प्रस्तुत कवितांश के कवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ हैं । ये राष्ट्रीय कवि हैं । इनका प्रसिद्ध खंडकाव्य ‘पंचवटी’ है । इसके आरंभिक कुछ पद्य प्रस्तुत कविता पाठ में संकलित हैं ।

निकटस्थ संदर्भ : यह आरंभिक कवितांश है । इस पद्यांश से कवि ‘पंचवटी’ का श्रीगणेश करते हैं ।

व्याख्या : राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ वर्णन करते हैं कि पंचवटी में सुंदर चंद्रमा की चंचल किरणें पानी और जमीन पर अठखेलियाँ कर रहीं हैं | भूमि और आकाश में निर्मल चाँदनी फैली हुई है । हरी – भरी घास की नोकों से मानों धरती रोमांचित हो रही हो । वृक्ष भी मंद हवा में मस्तों में झूम रहे हों ।

विशेषताएः कवि इसमें चाँदती रात का सुंदर शब्द – चित्र प्रस्तुत करता है । भाषा खड़ी बोली है । इसमे अनुप्रास उत्पे्रक्षह और मानवीकारण’ अलंकार हैं ।

प्रश्न 2.
पंचवटी की छाया में है, सुन्दर पर्ण कुटीर बना,
उसके सम्मुख स्वच्छ शिला पर धीर वीर निर्भीक मना,
जागा रहा यह कौन धनुर्धर, जब कि भुवन भर सोता है ?
भोगी कुसुमायुध योगी – सा, बना दृष्टिगत होता है ।
जवाब.
सामान्य संदर्भ : प्रस्तुत कवितांश के कवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ हैं । ये राष्ट्रीय कवि हैं । इनका प्रसिद्ध खंडकाव्य ‘पंचवटी’ है । इसके आरंभिक कुछ पद्य प्रस्तुत कविता पाठ में संकलित हैं।

निकटस्थ संदर्भ : यह ‘पंचवटी’ का दूसरा कवितांश है । पंचवटी में चाँदनी की रात का वर्णन करने के बाद, यह कवितांश कवि लक्ष्मण की पहरेदारी का संदर्भित है ।

व्याख्या : राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ कहते हैं कि पंचवटी की छाया में एक सुंदर पर्णशाला है। इसके सामने निर्मल चट्टान पर वीर – शूर – निर्भीक धनुर्बाण धर्ता लक्ष्मण जाग रहा है । सारा जग सो रहा है। राम और लक्ष्मण मन्मथ की तरह राज-सुख भोगने के योग्य हैं। लेकिन वे आज जंगल में सन्यासियों की तरह है।

इ. सही विकल्प चुनकर दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

प्रश्न 1.
“पंचवटी” किसकी रचना है ?
अ. मैथिलीशरण गुप्त की
आ. जयशंकर प्रसाद की
इ. सुमित्रानंदन पंत की
जवाब.
अ. मैथिलीशरण गुप्त की

प्रश्न 2.
मैथिलीशरण गुप्त जी का जन्म कहाँ हुआ ?
अ. चिरगाँव में
आ. विशाखपट्टणम में
इ. हैदराबाद में
जवाब.
अ. चिरगाँव में

प्रश्न 3.
पत्तों से बने कुटीर को क्या कहते हैं ?
अ. पर्ण कुटीर
आ. लघु कुटीर
इ. कुटीर
जवाब.
अ. पर्ण कुटीर

प्रश्न 4.
“तीन लोक की लक्ष्मी” से तात्पर्य किससे है ?
अ. धरती माता से
आ. माँ सीता से
इ. गंगा से
जवाब.
आ. माँ सीता से

प्रश्न 5.
वनवास में राम-सीता के साथ और कौन गया था ?
अ. भरत
आ. लक्ष्मण
इ. कोई नहीं
जवाब.
आ. लक्ष्मण

पंचवटी Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

पंचवटी Summary in Hindi

कवि परिचय

राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त जी का जन्म 3 अगस्त 1886 ई. को झाँसी के चिरगाँव में हुआ । इनके माता – पिता कौशिल्या बाई और रामचरण गुप्त हैं । वे हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू, बंगला आदि भाषा ओं के ज्ञाता हैं । वे खड़ीबोली के प्रथम महत्वपूर्ण कवि हैं । इनका खंडकाव्य ‘भारत ‘भारती’ और महाकाव्य ‘साकेत’ सुप्रसिद्ध हैं। यशोधरा जयद्र, थवध, द्वापर, पंचवटी, वन – वैभव, रंग में भंग आदि उनकी अन्य रचनाएँ हैं । वे नारी भावना को उजागर करनेवालों में अनुपम हैं । इनकी रचनाएँ राष्ट्रीय चेतना, धार्मिक भावना, और मानवीय उत्थान से मंडित हैं । वे मंगला प्रसाद पारितोषिक डी. लिट. और ‘पद्मविभूषण’ से सम्मानित हैं । उनका निधन 12 दिसंबर 1964 को हुआ |

पाठ का सारांश

राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ जी की कविता, ‘पंचवटी’ में श्रीराम – वनवास प्रसंग हैं । इस में पंचवटी की प्राकृतिक सुंदरता, श्रीराम की वीरता – धर्मनिष्ठा, सीता माता का पतिव्रता – धर्म, लक्ष्मण का कर्तव्य निष्ठा आदि का सजीव वर्णन हैं ।

कवितांश-1: राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ वर्णन करते हैं कि पंचवटी में सुंदर चंद्रमा की चंचल किरणें पानी और जमीन पर अठखेलियाँ कर रहीं हैं। भूमि और आकाश में निर्मल चाँदनी फैली हुई है। हरी-भरी घास की नोकों से मानों धरती रोमांचित हो रही हो । वृक्ष भी मंद हवा में मस्तों में झूम रहे हों ।

कवितांश – 2 : राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ कहते हैं कि पंचवटी की छाया में एक सुंदर पर्णशाला है । इसके सामने निर्मल चट्टान पर वीर – शूर – निर्भीक धनुर्बाण धर्ता लक्ष्मण जाग रहा है । सारा जग सो रहा है। राम और लक्ष्मण मन्मथ की तरह राज- सुख भोगने के योग्य हैं । लेकिन वे आज जंगल में सन्यासियों की तरह है ।

कवितांश – 3 : राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ जी प्रश्न करते हैं कि यह वीर लक्ष्मण राज सुख त्याग कर सन्यासी बनकर किस व्रत में लीन हैं । सीता-राम की सेवा और रक्षा का व्रत कर रहा हैं, क्या । उस पर्ण कुटीर में कौन सा अमूल्य धन है, वह अपना पूरा तन-मन जीवन समर्पित कर कुटीर का पहरा दे रहा है।

कवितांश – 4: राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ जी कहते हैं कि त्रिलोक – लक्ष्मीदेवी सीता माता भूलोक की दुर्दशा मिटाने अपने पति श्रीराम के साथ जंगल में आई । उन्होंने पर्णकुटी को अपना राजभवन माना । रघुवंश की कुलवधू सीता माता की रक्षा करना वीर लक्ष्मण का परम कर्तव्य है । वह जरूर, पहरेदार बनता है । यह निर्जन वन है । अभी रात बाकी है। यहाँ राक्षसों की माया का डर है। इसलिए सतर्कता से रहना चाहिए ।

कवितांश – 5: राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ जी कहते हैं कि रात को लोग सोते समय, धरती ओस की बूँदों के रूप में मोती बिखेर देती है । प्रातः होने पर सूरज आकर उन मोतियों को उठा लेता है । अर्थात् वे मोती धूप के कारण सूख जाते हैं । इससे संध्या रूपी सुंदरी का सून्य-सो श्यामल रूप झिलमिल करता हुआ अति दीप्ति हो जाती है ।

कवितांश -6: राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ जी कहते हैं कि लक्ष्मण जीवनवास के समय को याद कर रहे हैं । लक्ष्मण जी कहते हैं कि चौदह वर्ष के वनवास में तेरह वर्ष बीत चुके हैं । लेकिन ऐसा लग रहा है कि हम कल ही आ गए हो। वे पिता की याद करते हुए कहते हैं कि पिताजी दशरथ हमारे वियोग में दुःखी होकर बेहोश हो गए थे । वनवास की पूर्ति में समय – सीमा बहुत कम है । इस वनवास में, मुझे सीता राम की सेवा का पुण्य मिलता है । इससे बढ़कर कोई संपदा नहीं हो सकती ।

इस प्रकार, राष्ट्रकवि ‘मैथिली शरण गुप्त’ सीता- राम के वनवास का सुंदर चित्रण करते हैं ।

पंचवटी Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

पंचवटी Summary in English

In his poem, ‘Panchavati’ Mai thili sharan gupt, the national poet depict the exile of Shreerama. In this poem, the natural beauty of Panchavati, the bravery and devotess of Shreerama, the exclusive devotion to the husband of Sitamata, the duty of Laxman etc are described lively.

The poet depicts the playful rays of the beautiful moon, are spread- ing play fully in the waters and on the earth. The pure moonlight is pervaded with the tips of green grass, it appears that the earth is thrilled and filled with joy. The trees are also swinging in a joy mood with the light breeze.

He says that in the shade of Panchavati there is a beautiful hut made up of leaves. When the entire world is sleeping, on the pure cliff, infront of the hut, the fearless archer – wielding Lakshman is awake. He is worthy of enjoying the pleasures of kingship. But today he is like a monk in the forest.

The poet questions the brave Lakshman, why he has given up the royal pleasures and became the monk. He is vowing to serve and protect Sita and Ram. What priceless treasure is hidden in that hut? He is guarding it dedicating his entire body, mind and life.

The poet says that Trilok – Laxmi Devi came to the earth with her husband Shreeram to remove the misery of the earth. She came to that hut to live with Rama treating it as Royal place. It is the su- preme duty of brave Lakshman to protect Sita Mata. This is a de- serted forest and night in still left. Here there is a fear of the illusion of demons. Therefore he should remain alert.

The poet says that at night, when people go to sleep, the earth scatters pearls in the form of dewdrops. In the morning, the sun picks up those pearls, which dryup due to the heat. The darken lovely evening twinkles by putting on the shining due drops.

The poet describes that remembering the time of exile, Laxmanji says that thirteen years have passed in the fourteen years exile. But it seems as if it is the turn of time. As if we have come here a few days back only. Remembering his father he says that his father had become unconscious due to grief at Sitaram’s separation. The time limit is very short for completing the exile. In this exile, he gets the virtue of serving Rama and Sita. There can be no greater wealth than this.

Thus the poet beautifully describes the exile of Sita and Rama.

पंचवटी Summary in Telugu

జాతీయకవి శ్రీ మైథిలీశరణ్ గుప్త పద్య భాగం, ‘పంచవటి’ లో శ్రీరాముని వనవాస ప్రసంగం ఉంది. ఇందులో పంచవటి సౌందర్యం, శ్రీరాముని వీరత్వం, ధర్మనిష్ఠ, సీతామాత పతివ్రతాధర్మం, లక్ష్మణుని కర్తవ్య నిష్ఠ మొదలుగువాటి సజీవ చిత్రణ ఉంది.

పంచవటిలో అందాల చందమామ చలిచలి కిరణాలు జలాల్లోనూ భూమిపైన వినోదపు ఆటలు ఆడుతున్నాయి. భూమ్యాకాశాలలో స్వచ్ఛమైన వెన్నెల వ్యాపించింది. పచ్చగడ్డి కొనలుతో పృథ్వీ పులకిస్తుందా అన్నట్లుంది. వృక్షాలు కూడ పిల్ల గాలిలో ఊగుతున్నాయా అన్నట్లు ఉన్నాయి.

పంచవటి ఛాయలో ఓ అందమైన పర్ణశాల ఉంది. దీనిముందు ఓ నిర్మలమైన రాతి బండ పై వీర శూర – నిర్భీక ధనుర్దారి లక్ష్మణుడు మెలుకువగా ఉన్నాడు. జగమంతా నిద్రలో మునిగి ఉంది. రామలక్ష్మణులు మన్మధుడులా రాజ భోగాలకు యోగ్యులు కాని నేడు అడవిలో సన్యాసుల్లా ఉన్నారు.

‘ఈ వీర – శూర లక్ష్మణుడు రాజభోగాలు త్యజించి’ సన్యాసియై ఏ వ్రతంలో మునిగిపోయాడు ? సీతారాముల సేవావ్రతంలో లీనమయ్యాడా ? ఈ పర్ణ కుటీరంలో ఏ అమూల్యమైన ధన రాశులున్నాయని తన శారీరక, మానసిక, జీవితశక్తినంతా ధారపోస్తూ ఈ పర్ణశాల కాపలా కాస్తున్నాడు ? ఈ విధంగా కవి ప్రశ్నిస్తారు.

త్రైలోక్య లక్ష్మీ దేవి – సీతామాత భూలోకం దుర్దశను రూపు మాప, తన పతిదేవుడు శ్రీరామునితో అడవికి వచ్చింది. పర్ణశాలనే పరమానందంగా రాజ భవంతిలా తలచింది. సీతామాత రక్షణ వీరలక్ష్మణుని పరమకర్తవ్యం. ఇది నిర్జన వనం. రాత్రి ఇంకా మిగిలే ఉంది. ఇచట రాక్షసమాయల భయం ఉంటుంది. అందుచేత లక్ష్మణుడు మెలుకువగా ఉండాల్సి ఉన్నది.

రాత్రి జనులు నిద్రపోయే సమయంలో పృథ్వి మంచు బిందువుల రూపంలో ముత్యాలు జల్లుతుంది. తెల్లవారేక సూర్యుడు వచ్చి వాటినన్నింటిని ఏరుకొనిపోతాడు. అంటే ఎండకి అవి కరిగిపోతాయి. సంధ్యాసుందరి శూన్యంలాంటి శ్యామలరూపం వాటితో మిరిమిట్లు గొల్పుతుంది.

14 ఏళ్ళ వనవాసంలో 13 ఏళ్ళు గడిచిపోయాయి. కాని మేము వనవాసానికి నిన్ననే వచ్చినట్లుంది. తండ్రిని జ్ఞాపకం చేసుకొంటూ తండ్రి దశరధుడు మా వియోగంలో దు:ఖితుడై మూర్ఛిల్లినారు. వనవాసం పూర్తికి చాల తక్కువ సమయమే ఉంది. ఈ వనవాసంలో సీతారాముల సేవా భాగ్యం, ఆ పుణ్యఫలం దొరికింది. దీనికి మించిన సంపద మరేదూ లేదు. అని లక్ష్మణుడు తలపోసినట్లు కవి చెప్తారు.

ఈ విధంగా జాతీయకవి మైథిలీశరణ్ గుప్త సీతారాముల వనవాస ఘట్టం మనోహరంగా చిత్రించారు.

पंचवटी Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

पंचवटी कठिन शब्दार्थ

पद – 1

चारू चन्द्र की चंचल किरणें, खेल रही हैं जल-थल में,
स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बर
पुलक प्रकट करती है धरती, हरित तृणों की नोकों से,
मानो झूम रहे हैं तरू भी, मन्द पवन के झोंकों से ।

पंचवटी : पीपल, वट, बेल, आँवला और अशोक वृक्षों का समूह, इस समूह से घिरा हुआ स्थान, जो राम का वनवास स्थान । यह दंडकारण्य का भाग है । यह नासिक में गोदावरी तट पर स्थित है ।

రావి, మర్రి, మారేడు, ఉసిరి ఇంకా అశోక వృక్షాలతో చుట్టబడ్డ ప్రాంతం, రాముని వనవాస స్థానం. ఇది దండకారణ్యంలో ఓ భాగం. ఇది నాసిక్ దగ్గర గోదావరి ఒడ్డునున్నది.

चारू = सुन्दर, मनोहर, సుందరమైన, మనోహరమైన
खेल रही हैं = फैल रही हैं, क्रियाशील रही हैं విస్తరిస్తున్నది, చురుకుగా ఉన్నది
जल – थल = पानी और जमीन, నీరు మరియు భూమి
बिछी हुई है = फैली हुई, వ్యాపించినది
अवनि और अम्बरतल = भूमि और आकाश, భూమి మరియు ఆకాశము
पुलक = रोमांच, పులకించటం, రోమాలు నిక్కబొడవటం
हरित = हरा से, ఆకుపచ్చని
तृणों की नोक = घास का नुकीला भाग, పచ్చగడ్డిమొన
झूमना = इधर – उधर हिलना, అటు ఇటు కదలడం లేదా ఊగటం
मंद पवन = हलकी हवा, పిల్లగాలి
झोंक = तेज से बढना, వేగంగా ఊపుట, కుదుపుట

पद – 2

पंचवटी की छाया में है, सुन्दर पर्ण – कुटीर बना,
उसके सम्मुख स्वच्छ शिला पर धीर वीर निर्भीक मना,
जागा रहा यह कौन धनुर्धर, जब कि भुवन भर सोता है ?
भोगी कुसुमायुध योगी सा, बना दृष्टिगत होता है ।

पर्ण कुटीर = पत्तों से बना हुआ छोटी-सी झोंपड़ी, पर्णशाला, ఆకులతో నిర్మితమైన చిన్న గుడిసె
स्वच्छ शिला = साफ – सुथरा चट्टान या पत्थर, స్వచ్ఛమైన రాయి లేదా రాతి ఫలకం
निर्भीकमना = निडर मनवाला व्यक्तिं, నిర్భయ మనస్సు గల వ్యక్తి
धनुर्धर = धनुष धार, धारण करने वालाअर्थात्, श्रीराम चंद्र, ధనస్సును ధరించిన శ్రీరామచంద్రుడు
भुवन भर = सारा संसार, ప్రపంచమంతా
कुसुमायुध = = फूलों के बाण चलानेवाला अर्थात् कामदेव, పూలబాణాలు సంధించేవాడు, అంటే మన్మధుడు
दृष्टिगत = स्पष्ट दिखाई पड़ना, స్పష్టంగా కనపడుట

पद – 3

किस व्रत में है व्रती वीर यह, निद्रा का यों त्याग किए,
राजभोग के योग्य विपिन में, बैठा आज विराग लिए ।
बना हुआ है प्रहरी जिसका, उस कुटीर में क्या धन है,
जिसकी रक्षा में रत इसका तन है, मन है, जीवन है ॥

विपिन = वन, जंगल, మనము, అడవి
विराग = वैराग्य, వైరాగ్యము
प्रहरी = पहरेदार, किसी स्थान का रक्षक, కాపలాదారుడు
रत = लगा होना, నిమగ్నమై ఉండుట

पंचवटी Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

पद – 4

मर्त्यलोक – मालिन्य मेटने, स्वामि संग जो आयी है,
तीन लोक की लक्ष्मी ने यह कुटी आज अपनायी है।
वीर वंश की लाज यही है, फिर क्यों वीर न हो प्रहरी ?
विजन देश है, निशा शेष है, निशाचरी माया ठहरी ।

मर्त्यलोक = मनुष्यों की धरती (पृथ्वी), మానవ లోకం పృధ్వి
मालिन्य = कलुष, अशुद्धता, మాలిన్యము, మురికి
मेटने = मिटाने के लिए, తొలిగించుట కొరకు
स्वामि- संग = पति के साथ, భర్తతో
तीन लोक की लक्ष्मी = स्वर्ग, मर्त्यलोक, पाताल – इन तीनों लोकों की समृद्धि की देवी (यहाँ सीता का रूप ) స్వర్గలోకం, భూలోకం, పాతాళలోకం – ఈ మూడు లోకాల సమృద్ధి కారకదేవి (ఇచ్చట సీతాదేవి)
अपनाई = अपना बनाया, సొంతం చేసుకొన్నది, తనదిగా చేసుకొన్నది
वीर वंश = राम मा रघुकुल वंश, రాముని రఘుకుల వంశం
लाज = मर्यादा, सम्मान, మంచి-మర్యాద, గౌరవం
प्रहरी = पहरेदार, रक्षक (यहाँ लक्ष्मण), కాపలాదారుడు, (ఇచ్చట అర్థం లక్ష్మణుడు)
विजन देश = सुनसान जंगल, నిర్జన ప్రదేశం, మనుష్యులు లేని అడవి
निशा शेष = रात का शेष भाग, రాత్రి మిగిలిన వేళా
निशाचरी माया = = राक्षसी माया (जेसे सूर्पणखा की चाल ) రాక్షసమాయ (సూర్పణఖ వ్యవహారం లాంటిది)
ठहरना = शेष रहना, बाकी होना, మిగులుట, ఇంకా ఉండుట

पद – 5

है बिखेर देती वसुंधरा, मोती, सबके सोने पर,
रवि बटोर लेता है उनको, सदा सबेरा होने पर ।
और विरामदायिनी अपनी, संध्या को दे जाता है,
शून्य श्याम तनु जिससे उसका, नया रूप झलकाता है ।

बिखेर देती = फैला देती है, విరజిమ్ముతుంది
वसुंधरा = धरती, పృథ్వి,భూమి
मोती = यहाँ ओस की बूँदें, ముత్యాల్లాంటి మంచు బిందువులు
रवि = सूरज, సూర్యుడు
बटोर लेना = इकट्ठा करना (यहाँ ओस सूख जाना) ప్రోగు చేయటం (ఇచ్చట అర్థం మంచు బిందువులు కరిగిపోవటం)
विरामदायिनी = विश्राम देनेवाली संध्या, విశ్రమమిచ్చే సంధ్య
श्याम तनु = काले रंग वाली (रात्रि का प्रतीक ) నల్లని రంగు గలది (చీకటిమయమైన రాత్రికి ప్రతీక)
झलकता है = प्रकट करता है, दिखाता है ప్రతిబింబిస్తుంది, కనపడుతుంది

पंचवटी Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

पद – 6

तेरह वर्ष व्यतीत हो चुके, पर है मानो कल की बात,
वन को आते देख हमें जब आर्त, अचेत हुए थे तात ।
अब वह समय निकट ही है जब, अवधि पूर्ण होगी वन की ।
किन्तु प्राप्ति होगी इस जन को, इससे बढ़कर किस धन की ?

व्यतीत होना = बीत जाना, గడిచిపోవటం
आर्त = दुःखी, దుఃఖితులు
अचेत = चेतना रहित, मूर्च्छित, చైతన్యరహితులు, మూర్ఛితులు
तात = पिता (यहाँ दशरथ), తండ్రి (ఇచట అర్థం దశరథుడు)
अवधि = समय सीमा, సమయం గడువు
जन = व्यक्ति (यहाँ स्वयं लक्ष्मण), వ్యక్తి (ఇచట అర్థం స్వయంగా లక్ష్మణుడు)

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