तुलसीदास के पद Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

Andhra Pradesh BIEAP AP Inter 2nd Year Hindi Study Material Pdf पद्यभाग 1st Poem तुलसीदास के पद Questions and Answers Summary.

Inter 2nd Year Hindi तुलसीदास के पद Questions and Answers

मूल्यांकन हेतु

अ. नीचे दिए गए पदों का भावार्थ विशेषताएँ सहित लिखिए ।

पद – 1:

जाके प्रिय न राम बैदेही ।
तजिये ताहि कोटि बैरी सम जद्यपि परम सनेही ॥
तज्यो पिता प्रहलाद विभीषण बंधु भरत महतारी ।
बलि गुरु तज्यों कंत ब्रज-बनितन्हि भाए मुद-मंगलकारी ॥

कवि परिचय : तुलसीदास राम भक्ति शाखा के प्रतिनिधि – कवि हैं। उनकी भक्ति दास्य भक्ति कहते हैं । वे समाज के नीति- मार्गदर्शक और भारतीय संस्कृति के रक्षक थे । वे महान पंडित थे । उनका महाकाव्य ‘रामचरित मानस’ हिंदी साहित्य में सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है ।

तुलसीदास कहते हैं कि जिसके दिल में सीता-राम का निवास नहीं है, उसे परम शत्रु के समान मानकर छोड़ देना चाहिए, चाहे वह कितना भी प्रिय हो । जैसे प्रह्लाद ने पिता हिरण्यकश्यप को, विभीषण ने रावण को, भरत ने माता कैकेयी को, राजा बलि ने गुरु शुक्राचार्य को तथा व्रज की गोपियों ने अपने पतियों को छोड़ दिया । लेकिन ये सभी आनंद और कल्याणकारक बने ।

विशेषताए : इस पद में तुलसीदास की अनन्य भक्ति काव्य प्रतिभा दर्शाती हैं | कवि के वचन के समर्थन में अनेक उदाहरण पाए जाते हैं। इससे पद का भाव सुंदर बनता है । भाषा व्रज है । कहीं-कहीं संस्कृत शब्द दिखाई देते हैं । अनुप्रास और उपमा अलंकार हैं । गेय शैली है ।

पद – 2:

सीस जटा, उर बाहु बिसाल, बिलोचन लाल, तिरीछी सी भौहें ।
तून सरासन – बान धरे, तुलसी बन मारग में सुठि सोहैं |
सादर बारहिं बार सुभायँ चितै, तुम्ह त्यों हमरो मनु मोहैं ।
पूँछत ग्रामबधू सिय सों, कहौ साँवरे-से सखि ! रावरे को हैं ।

कवि परिचय : तुलसीदास राम भक्ति शाखा के प्रतिनिधि – कवि हैं । उनकी भक्ति दास्य भक्ति कहते हैं । वे समाज के नीति- मार्गदर्शक और भारतीय संस्कृति के रक्षक थे । वे महान पंडित थे । उनका महाकाव्य ‘रामचरित मानस’ हिंदी साहिस में सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है ।

भावार्थ : तुलसीदास ने कहते हैं कि श्रीराम के सिर पर जटाएँ शोभायमान हैं । उनकी छाती और भुजाएँ बहुत विशाल हैं। उनके नयन लालिमा लिए हुए हैं । उनकी भौंहें थोड़ी तिर छी हैं। वे तरकश धनुष और बाण धारण किए हुए वन के रास्ते में बहुत सुंदर लगते हैं |

विशेषताए : इस पद में वनवास के समय श्रीराम का रूप-सौंदर्य का सजीव वर्णन है। इस में भक्ति और श्रुंगार का मेल है। ग्राम वधुओं की सहजता इसमें दर्शाती है। इसमें व्रजभाषा का प्रयोग किया गया है । यह पद गेय रूप है । इसमें अनुप्रास अलंकार है । इस में संवादात्मक शैली है ।

तुलसीदास के पद Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

आ. सही विकल्प चुनकर दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

प्रश्न 1.
तुलसीदास का जन्म कहाँ हुआ ?
अ. राजापुर में
आ. इलाहाबाद में
इ. काशी में
जवाब.
अ. राजापुर में

प्रश्न 2.
तुलसीदास किनके भक्त है ?
अ. श्रीराम
आ. श्रीकृष्ण
इ. हनुमान
जवाब.
अ. श्रीराम

प्रश्न 3.
रामचरित मानस’ किस भाषा में लिखा गया है ?
अ. तमिल
आ. तेलुगु
इ. अवधी
जवाब.
इ. अवधी

प्रश्न 4.
दुल्हन कौन बनी हुई है ?
अ. राधा
आ. सीता
इ. लक्ष्मी
जवाब.
आ. सीता

प्रश्न 5.
प्रहलाद ने किनको त्याग दिया ?
अ. पिता
आ. भाई
इ. गुरु
जवाब.
अ. पिता

तुलसीदास के पद Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

तुलसीदास के पद Summary in Hindi

कवि परिचय

तुलसीदास रामभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि हैं। इनका जन्म संवत् 1589 को उत्तरप्रदेश के राजापुर (चित्रकूट) में हुआ था । इनका देहांत संवत् 1680 को हुआ था ।

इनके बचपन का नाम रामबोला था । इनके माता- पिता के नाम हुलसी देवी और आत्माराम दुबे थे । पत्नी रत्नावली थी। गुरु नरहरिदास थे ।

इनकी भक्ति को दास्य-भक्ति कहते हैं । वे समाज के नीति- मार्गदर्शक और भारतीय संस्कृति के रक्षक थे ।

तुलसीदास संस्कृत, व्रज, अवधी आदि भाषाओं के महान पंडित थे । इनके अधिकांश काव्यों की भाषा अवधी है । इनका महाकाव्य ‘रामचरितमानस’, अवधी भाषा में लिखा गया । यह हिंदी साहित्य में सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है । इसमें इन्होंने राम के शील, सौंदर्य और शक्ति से समन्वित आदर्श रूप को दर्शाया है ।

विनय पत्रिका, दोहावली, कवितावली, गीतावली, बरवै रामायण, हनुमान चालीसा आदि इनकी अन्य रचनाएँ हैं ।

पाठ का सारांश

तुलसीदास रामभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि हैं । वे अपनी ‘तुलसी के पद’ कवितांश में सीता-राम के प्रति भक्ति भावना, वन-गमन – वेला श्रीराम का सौंदर्य, और कल्यण – मंडप में विराजित सीता राम की रमणीयता का मनोहर रूप से वर्णन करते हैं ।

तुलसीदास कहते हैं कि जिसके दिल में सीता – राम का निवास नहीं है, उसे परम शत्रु के समान मानकर छोड़ देना चाहिए, चाहे वह कितना भी प्रिय हो तुलसीदास के पद प्रिय हो । जैसे प्रहलाद ने पिता हिरण्यकश्यप को, विभीषण ने रावण को, भरत ने माता कैकेयी को, राजा बलि ने गुरु शुक्राचार्य को तथा व्रज की गोपियों ने अपने पतियों को छोड़ दिया । लेकिन ये सभी आनंद और कल्याण कारक बने ।

तुलसीदास ने कहते हैं कि श्रीराम के सिर पर जटाएँ शोभायमान हैं। उनकी छाती और भुजाएँ बहुत विशाल हैं । उनके नयन लालिमा लिए हुए हैं । उन की भौंहे थोड़ी तिर छी हैं। तरकश, वे धनुष और बाण धारण किए हुए वन के रास्ते में बहुत सुंदर लगते हैं ।

श्राम-वधुएँ कहते हैं कि राम सादर बार-बार स्वभाव से हमारी ओर देख रहे हैं और हमारे मन मोह रहे हैं। वे सीता जी से परिहास के भाव से पूछती हैं कि हे सखी! तुम्हारे साथ चलने वाले ये श्यामवर्ण वाले सुंदर पुरुष तुम्हारे कौन लगते हैं ? अर्थात् आपके पतिदेव है या भाई ?

तुलसीदास कहते हैं कि श्रीराम वर और सीता वधू बनकर कल्याण- मंडप में विराजित हैं । सब स्त्रियाँ मिलकर मंगल गान गा रही हैं। ब्राह्मण वेद-मंत्रों का पाठ कर रहे हैं । सीता राम के रूप को देख रही है । उनके कर-कंकण में जड़े रत्नों में राम प्रतिबिंबित हो रहे हैं । वह राम के सौंदर्य में ऐसी तन्मय हो जाती हैं कि अपनी सुध-बुध खो गई है। हाथ का सहारा लेकर, वह एकटक देखती रही। फल भर के लिए भी उसकी, दृष्टि हटाती नहीं ।

इस प्रकार तुलसीदास ने सीता-राम-भक्ति और उनके सौंदर्य का जीता-जागता वर्णन किया है ।

तुलसीदास के पद Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

तुलसीदास के पद Summary in English

Tulasidas is a representative – poet of RamBhakti branch. In his poem ‘Tulasi Ke Pad”, he depicts the devotion towards Sita – Ram, the beauty the Ram at the time of going to the forest and the charm of Sita and Ram at the wedding pavilion.

Tulasidas says that in whose heart Sita-Rama donot reside, he should be givenup, treating as enemy, no matter how dear he may be.

Just as Prahlad left his father Hiranyakashyap, Vibhishana left Ravan, Bharath left mother Kaikeyi, king Bali left his guru Shukrachary and cowheard ladies of Vraj left their husbands. But all of them became the factor of bliss and benediction.

Tulasidas says that the matted hair rolled up over shree Rama’s head looks beautiful. His chest and arms very wide. His eyes ae reddish. His eyebrows are slightly curved. He equipped with a quiver, bow and arrows and appears handsome on the way to forest. The village – ladies say that Ram is looking at us respectfully and our hearts captivated by it. They ask Sitaji that O friend! who is that dark complexioned, hand- some man and what relation you have with him.

Tulasidas says that ShriRam as the groom and Sita as the bride, are seated in the Kalyan mandap. All the Women are singing songs of auspiciousness. Brahmins are reciting the vedas. Sita is looking at Rama. Rama is reflected in the gems embedded in her bracelets. She is so emgrossed in Rama’s beauty that she loses her senses. Taking the sup- port of her hand, she is looking withot blinking. Her gaze is not shiftup even for a moment.

In this way, Tulasidas described lively the devotion of Sita-Ram and their beauty.

तुलसीदास के पद Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

तुलसीदास के पद Summary in Telugu

తులసీదాసు రామభక్తిశాఖకు ప్రతినిధి కవి. వారు తమ ‘తులసీ కే పథ్’ కవితలో సీతారాముల పట్ల భక్తిభావన, వనగమనవేళ శ్రీరాముని సౌందర్యం, మరియు కళ్యాణమండపంలో శోభిస్తున్న సీతారాముల రమణీయత మనోహరంగా వర్ణిస్తారు.

ఎవరి హృదయంలో సీతారాములు నివసించరో, వారు ఎంత ఇష్టులైనా, శత్రువులుగా భావించి త్యజించాలి; ప్రహ్లాదుడు తన తండ్రి హిరణ్యకశ్యపుని, విభీషణుడు తన అన్న రావణుని, భరతుడు తన తల్లి కైకేయిని, బలిచక్రవర్తి తన గురువు శుక్రాచార్యుని మరియు ప్రజభూమి గోపికలు తమ భర్తలను త్యజించినట్లు త్యజించాలి. కానీ వీరందరు ఆనందకారకులు, కళ్యాణకారకులు అయ్యారని తులసీదాసు అంటారు.

శ్రీరాముని తలపై జడలుకట్టి చుట్టుకొన్న జుట్టు శోభిస్తుంది. వారి వక్షస్థలం, భుజాలు విశాలంగా ఉన్నాయి. వారి నేత్రాలు ఎర్రదనంతో ఉన్నాయి. తన నొసలు కొంచం వంపు తిరిగి ఉన్నాయి. వారు ధనుర్భాణాలు, అమ్ములపొది ధరించి వనపథంలో చాలా అందంగా కనపడుతున్నారు. రాముడు సాదరంగా తడవ తడవకు స్వాభావికంగా మా వంక చూస్తున్నారని మా మనస్సులను చూరగొంటున్నారని పల్లెపడుచులు అంటున్నారు. ఓ సఖియా ! నీతో నడుస్తున్న శ్యామ వర్ణంతో శోభిస్తున్న ఆ సౌందర్యవంతుడు నీకేమౌతాడని వారు సీతను అడుగుతారని తులసీదాసు అంటారు.

శ్రీరాముడు వరునిగా సీతాదేవి వధువుగా కళ్యాణమండపంలో విరాజిల్లుతారు. స్త్రీలందరు మంగళ గీతాలు పాడుతున్నారు. బ్రాహ్మణులు వేదమంత్రాలు పఠిస్తున్నారు. సీతాదేవి శ్రీరాముని వంక చూస్తున్నది. ఆమె కరకంకణంలో పొదిగిన నవరత్నాలలో రాముడు ప్రతిబింబిస్తున్నారు. తాను రాముని సౌందర్యంలో తనకు తాను మైమరచిపోయినట్లు తన్మయం చెందుతుంది. తన చేతి సహాయంతో తను తదేక దృష్టితో తిలకిస్తుంది. ఈషణ్మాత్రం కూడా తన దృష్టిని మరల్చటంలేదని తులసీదాసు అంటారు.

ఈ విధంగా, సీతారాముల భక్తిని, వారి సౌందర్యాన్ని, కళ్ళకు కట్టినట్లుగా తులసీదాసు వర్ణిస్తారు.

तुलसीदास के पद Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

तुलसीदास के पद कठिन शब्दार्थ

पद – 1:

जाके = जिसको, ఎవనికి ?
वैदेही = सीता, సీత
तजिये = त्याग कीजिए, త్యజించాలి
ताहि = उसे, అతనికి
वैरी = शत्रु, శత్రువు
सनेही = स्नेही, प्रिय, స్నేహితుడు
तज्यो = त्याग किया, త్యజించెను
बंधु = रावण (यहाँ संदभार्द), రావణుడు (సందర్భార్థం)
महतारी = माँ – कैकेयी, తల్లి కైకేయి
बलि गुरु = शुक्राचार्य, శుక్రాచార్యుడు
कंत व्रज = व्रज की गोपियाँ, వ్రజ భూమి గోపికలు
बनितन्हि = बनगई, అయ్యారు
मुद मंगलकारी = ముదముతో మంగళప్రదంగా

पद – 2:

सीस = सिर, తల , శిరస్సు
जटा = जटाएँ, జడలు
उर = छाती, వక్షస్థలం
बाहु = भुजाएँ, భుజాలు
बिलोचन = आँखे, నేత్రాలు
लाल = लालिमा लिए हुए, ఎరుపెక్కిన
तिरछी – सी भौहें = टेढ़ी भौंहे, ధనస్సాకారంలో (వంపు తిరిగిన నొసలు)
तून = तरकश, తూణీరము, అమ్ములపొది
सरासन् – बान = ధనుర్భాణాలు;
धरें = धारण किए हुए, ధరించి
बन-मारग में = वन के मार्ग में, వనమార్గంలో
सुठि = सुंदर, సుందరంగా
सोहैं = शोभा देते हैं, శోభిస్తున్నారు
सादर = आदर सहित, ఆదరంగా
बारहिं बार = बार – बार, తడవ-తడవకు, మాటిమాటికి
सुभायँ = स्वभाववश, प्रेमवश, సహజస్వభావంగా, ప్రేమగా
तुम्ह = तुम्हे, చూస్తూన్న
चितै = देखती हूँ, నిన్ను
त्यों = वैसे ही, ఆ విధంగా
हमरो = हमारा, మా యొక్క
मंनु = मन, మనస్సు
मोहैं = मोहित हो जाता है, మోహింపబడుతుంది
पूँछत = पूछती है, అడుగుచున్నారు
ग्रामवधु = गाँव की स्त्रियाँ, పల్లెపడుచులు
सिय सों = सीता से, సీతతో
साँवरे – स = सावले श्यामवरनावाले, శ్యామవర్ణంగల, నల్లని
कहौ = बताओ, చెప్పు
रावरे = तुम्हारे, నీ
को = कौन, ఎవరు

तुलसीदास के पद Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

पद – 3:

दूलह = दुल्हा, वर, పెండ్లి కూతురు, వరుడు;
श्री रघुनाथ = श्रीराम, ; శ్రీరాముడు;
दुलही = दुल्हन, పెండ్లి కుమార్తె, వధువు ;
सिय = सीता, సీత;
मंदिर = मंडप, మండపం;
माहीं = में, లో, అందు;
गावति = गाती हुई, పాడుతూ
गीत = मंगल गीत, మంగళగీతాలు;
सबै मिली = सब मिलकर, అందరు కలిసి
सुंदरि = सुंदर स्त्रियाँ, అందమైన ఆడవాళ్లు
वेद = वेद मंत्र, వేదమంత్రాలు
जुवा जुरि = मिलकर, కలిసి
विप्र = విప్రులు, బ్రాహ్మణులు;
पढ़ाहीं = पढते हैं, పఠిస్తున్నారు
राम को रूप = राम का सौंदर्य, రాముని సౌందర్యం
निहारतिं कंकन = देखती हुई, చూస్తూ, తిలకిస్తూ
कंकन = कंगन, కంకణం
नग = रत्न, రత్నం;
परछाही = परछाई, प्रतिबिंब, ప్రతిబింబం;
यातें = इसलिए, దీనివలన, దీని కారణంగా ;
सबै सुधि = सारी सुध-बुध, స్మృతి అంతా, తెలివి అంతా, చైతన్యమంతా;
भूलि गई = भूलगई, మర్చిపోయారు, మైమరచిపోయారు
कर टेकि = हाथ का सहारा लेकर, చేతిసహాయంతో
रही = ठहरी हुई, ఉండిపోయారు
पल टारति नाहीं = पल भव के लिए भी दृष्टि नहीं हटाती, ఈషణ్మాత్రం కూడ దృష్టిని మరల్చుట లేదు.

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