सहपाठी Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

Andhra Pradesh BIEAP AP Inter 2nd Year Hindi Study Material Pdf गद्यभाग 5th Chapter सहपाठी Questions and Answers Summary.

Inter 2nd Year Hindi सहपाठी Questions and Answers

मूल्यांकन हेतु

अ. ‘सहपाठी कहानी का सारांश लिखिए ।
जवाब.
विश्व प्रसिद्ध फ़िल्मी निर्देशक और कुशल कहानीकार सत्यजित राय की कहानी ‘सहपाठी’ अत्यंत संवेदनशील है। इसमें गत स्कूली जीवन की स्मृतियाँ के बीच का अपनापन और जीवन की वास्तविकताओं से उपजी कदुता- ममता दोनों प्रतिबिंबित हैं ।

कहानी का केंद्रबिंदु मोहित सरकार है । वह आज एक सफल उच्च अधिकारी के रूप में जिंदगी बिता रहा हैं । अपने सहपाठी, जयदेव बोस के फोन से मनमें बचपन की यादें उमड़ पड़ती हैं’ जैसे स्कूल के दिन, प्रतिस्पर्धा, दोस्ती, खेलकूद आदि । ये सभी उसे प्रिय थे ।

लेकिन जयदेव उसके घर पहुँचता है तो मोहित उसकी बदलती हुई स्थिति देखकर स्तब्ध रह जाता है । कभी हँसमुख और ऊर्जा से भरा रहने वाला जयदेव अब गरीबी और बीमारी से जूझता एक बेहद कमजोर इंसान बन चुका है। जीवन की प्रतिकूल परिस्थितियाँ, असफलताएँ और आर्थिक संकट इनके कारण हैं । बातचीत से पताचलता है कि जयदेव असल में आर्थिक सहायता के लिए आया है ।

एक दिन मोहित की मदद लेने स्वयं जयदेव की बजाय उसका बेटा संजय आता है । इस बच्चे की निष्कपटता, और मर्यादा मोहित के भीतर बचपन की खोई हुई मित्रता जगाती है। उसे अपने पुराने सहपाठी का स्वरूप इस नन्हे चहरे में झलकता है । वह संवेदानओं से भर उठता है । वह उसे जरूरत से ज्यादा धन देकर उसे अपनी गाड़ी में घर पहुँचता है ।

इस प्रकार, यह कहानी यह शिक्षा देती है कि पुरानी मित्रता, संवेदना और मानवीय मूल्य दूसरों को सहयोग देने के लिए प्रेरित करते रहते हैं । इस मानवीयता ही वास्तविक जीवन-सौंदर्य है |

आ. नीचे दिये गये गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए ।

प्रश्न 1.
“लेकिन आज इतने सालों के बाद अपनी दोस्ती के बावजूद और कभी अपनी सहपाठी रहे इस आदमी के बारे में कोई ख़ास लगाव महसूस नहीं कर रहा था ।”
जवाब.
सामान्य संदर्भ :- यह गद्यांश विश्व प्रसिद्ध फ़िल्मी निर्देशक और कुशल कहानीकार सत्यजित राय की अत्यंत संवेदनशील कहानी, ‘सहपाठी’ से दिया गया है।

निकटस्थ संदर्भ :- स्कूल से निकलने के बाद मोहित ने अपना सहपाठी जयदेव के बारे में कभी कोई खोज – खबर नहीं ली। इस संदर्भ में कहानीकार पाठकों से ये वाक्य कहते हैं ।

व्याख्या :- सौभाग्यवश मोहित को अपना आत्मीय सहपाठी जयदेव के नाम और चेहरे की याद अब भी उसे हैं । वे तीस साल पहले स्कूल छोड़े थे । अपनी जिगरी दोस्ती होने के बावजूद मोहित जयदेव का हाल चाल नहीं जानता । इसके पता लगा ने की विशेष रुचि नहीं है । कारण परिस्थितियों का प्रभाव हो सकता है ।

विशेषताएँ :- आज कल के व्यस्त जीवन में ऐसी घटनाएँ साधारण हो सकती हैं । लेकिन नैतिक दृष्टि से यह घटना सही नहीं है | भाषा भाव सरल सुबोध हैं ।

प्रश्न 2.
“थोड़ी देर बाद ही, एक तेरह चौदह साल का लड़का दरवाजे से अंदर दाखिल हुआ। मोहित के पास आकर उसने उसे प्रणाम किया और फिर कुछ कदम पीछे हट कर चुपचाप खड़ा हो गया ।”
जवाब.
सामान्य संदर्भ :- यह गद्यांश विश्व प्रसिद्ध फ़िल्मी निर्देशक और कुशल कहानीकार सत्यजित राय की अत्यंत संवेदनशील कहानी, ‘सहपाठी’ से दिया गया है ।

निकटस्य संदर्भ :- जयदेव अपने बेटे को चिट्ठी के साथ मोहित के यहाँ भेजता है । मोहित चिट्ठी पढ़कर जयदेव के बेटे बुलाता है । वह थोड़ा – बहुत देकर जान छड़ानी चाहता है । इस संदर्भ में यह प्रसंग कहानीकार पाठकों से कहता है ।

व्याख्या :- बुलाने के कुछ देर बाद एक तेरह – चौदह साल का लड़का मोहित के सामने उपस्थित होता है । वह मोहित को नमस्कार करता है । इसके बाद कुछ पीछे हटकर मौन धारण कर खड़ा हो जाता है। इस लड़के को देखने से एक दम तीस साल पहलें, विद्यार्थी दशा के सहपाठी जयदेव की याद आती हैं । यह लड़का जयदेव की कॉर्बन कापी जैसा है ।

विशेषताएँ :- इस अवतरण में जयदेव के बेटे की सुशीलता और विनम्रता प्रकट होती है । जयदेव के बेटे को देखते ही मोहित अपनी विद्यार्थी दशा के जयदेव की याद आती है । भाषा और भाव सरल – सुबोध है ।

सहपाठी Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

इ. निम्न लिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त रूप में दीजिए ।

प्रश्न 1.
मोहित जयदेव से मिलकर स्तब्ध क्यों रह गया ?.
जवाब.
मोहित को जयदेव को पहचानने में मुश्किल हुई, क्यों कि जयदेव के आकार-प्राकार और ढंग अजीब थे । वह ढीली-ढाली कपड़े पहना था । उसका चेहरा सूख, गाल पिचके, धँसे और शरीर काला था । सारेबाल पके हुए थे । दाँत सड़ गए । उसका व्यवहार भी अजीब था । इसलिए मोहित जयदेव से मिलकर स्तब्ध रह गया ।

प्रश्न 2.
मोहित ने संजय को कितने रूपये दिए और क्यों ?
जवाब.
एक दिन मोहित की मदद लेने स्वयं जयदेव की बजाय उसका बेटा संजय आता है । इस बच्चे की निष्कपटता, और मर्यादा मोहित के भीतर बचपन की खोई हुई मित्रता जगाती है । उसे अपने पुराने सहपाठी का स्वरूप इस नन्हे चहरे में झलकता है। वह संवेदानओं से भर उठता है । वह उसे जरूरत से ज्यादा धन देकर उसे अपनी गाडी में घर पहुँचाता है ।

ई. सही शब्द चुनकर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

प्रश्न 1.
मोहित सरकार का मित्र कौन है ?
अ) जयदेव बोस
आ) संजय
इ) राहुल
जवाब.
अ) जयदेव बोस

प्रश्न 2.
मोहित और जयदेव कितने वर्षों बाद मिले ?
अ) 10 वर्ष बाद
आ) 20 वर्ष बाद
इ) 30 वर्ष बाद
जवाब.
इ) 30 वर्ष बाद

प्रश्न 3.
जयदेव कहाँ काम करता था ?
अ) कारखाना
आ) अस्पताल
इ) स्कूल
जवाब.
अ) कारखाना

प्रश्न 4.
मोहित से रुपये लेने कौन आया ?
अ) जयदेव का बेटा संजय
आ) जयदेव का भाई
इ) स्वयं जयदेव
जवाब.
अ) जयदेव का बेटा संजय

प्रश्न 5.
मोहित और जयदेव दोनों कौन से स्कूल में पढ़ते थे ?
अ) बालीगंज
आ) रेणुगंज
इ) कोई नहीं
जवाब.
अ) बालीगंज

सहपाठी Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

सहपाठी Summary in Hindi

कवि परिचय

सत्यजित राय बहुमुखी प्रतिभाशाली के धनी हैं । वे महान निर्देशक, कुशल लेखक, संगीतकार, ग्राफिक डिज़ाइनर और चित्रकार थे । निर्देशन के क्षेत्र में उनकी पहली फिल्म ‘पाथेर पांचाली थी । इससे उनकी प्रतिष्टा विश्वविख्यात हुई | उनकी फ़िल्में ‘पाथेर पांचाली’, ‘अपराजितो’ और ‘अपुर संसार’ मिलकर प्रसिद्ध ‘अपूत्रयी’ बनाती है । उन्होंने अपनी यथार्थवादी और मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण फिल्मों द्वारा पूरे संसार में भारत की पहचान स्थापित की |

उन्हें भारतरत्न और मानद ऑस्कर पुरस्कार प्रदान किए गए ।

उनका जन्म् 2 मई 1921 को कलकत्ता में हुआ था और निधन 23 अप्रैल 1992 को हो गया था । लेकिन उनकी फिल्में, उनका साहित्य और उनकी कलात्मक सोच आज भी जीवित हैं ।

प्रस्तुत कहानी, ‘सहपाठी’ उनकी बंगला की रचना है ।

रूपांतरकार का परिचय

प्रतिष्ठित लेखक और रूपांतरकार डॉ. रंजीत साहा ने प्रस्तुत कहानी, ‘सहपाठी’ का सरल, सहज और प्रभावी रूपांतर बंगला से हिंदी किया है । उनकी भाषा शैली स्पष्ट, प्रवाहपूर्ण और पाठकों को तुरंत जोड़नेवाली है । शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय है।

पाठ का सारांश

विश्व प्रसिद्ध फ़िल्मी निर्देशक और कुशल कहानीकार सत्यजित राय की कहानी ‘सहपाठी’ अत्यंत संवेदनशील है। इसमें गत स्कूली जीवन की स्मृतियाँ के बीच का अपनापन और जीवन की वास्तविकताओं से उपजी कदुता- ममता दोनों प्रतिबिंबित हैं ।

कहानी का केंद्रबिंदु मोहित सरकार है । वह आज एक सफल उच्च – अधिकारी के रूप में जिंदगी बिता रहा हैं । अपने सहपाठी, जयदेव बोस के फोन से मनमें बचपन की यादें उमड़ पड़ती हैं, जैसे स्कूल के दिन, प्रतिस्पर्धा, दोस्ती, खेलकूद आदि । ये सभी उसे प्रिय थे ।

लेकिन जयदेव उसके घर पहुँचता है तो मोहित उसकी बदलती हुई स्थिति देखकर स्तब्ध रह जाता है । कभी हँसमुख और ऊर्ज्ज से भरा रहने वाला जयदेव अब गरीबी और बीमारी से जूझता एक बेहद कमजोर इंसान बन चुका है । जीवन की प्रतिकूल परिस्थितियाँ, असफलताएँ और आर्थिक संकट इनके कारण हैं । बातचीत से पताचलता है कि जयदेव असल में आर्थिक सहायता के लिए आया है ।

एक दिन मोहित की मदद लेने स्वयं जयदेव की बजाय उसका बेटा संजय आता है । इस बच्चे की निष्कपटता, और मर्यादा मोहित के भीतर बचपन की खोई हुई मित्रता जगाती है। उसे अपने पुराने सहपाठी का स्वरूप इस नन्हे चहरे में झलकता है । वह संवेदानओं से भर उठता है । वह उसे जरूरत से ज्यादा धन देकर उसे अपनी गाडी में घर पहुँचाता है ।

इस प्रकार, यह कहानी यह शिक्षा देती है कि पुरानी मित्रता, संवेदना और मानवीय मूल्य दूसरों को सहयोग देने के लिए प्रेरित करते रहते हैं । इस मानवीयता ही वास्तविक जीवन-सौंदर्य है ।

सहपाठी Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

सहपाठी Summary in English

The story ‘Sahpaathi of the world famous Filmy Director and the skillful story writer Satyajit Ray, is extremely sensitive. It explores both the intimacy between the friends and companions of pastlife and the bitterness and affection.

The main role of the story is Mohit Sarkar. He is now in the higher position as a top officer. The phone received from his classmate Jaydev brings the memories like those of school days, competitions, friendship and adventures.

But when Jaydev arrives at his house, Mohit is stunned by his dark complexion. Once cheerful and resilent Jaydev has became a frailman, battling poverty and illness. Adverse circumstances, setdacks and financid woes are the reasons for this position. His conversation reveals that Jaydev has come to his for financial assistance.

One day, instead of Jaidev himself, his son Sanjay came to Mohit to take help from him. The child’s innocence, and dignity awaken, the lost friendships of childhood within Mohit. He sees the image of his old classmate reflected in this little face. He is overcome with emotion. He gives him more than enough money and sends him home in his car.

Thus, the story teaches that old friendships, compassion and hu- man values continue to inspire us to help others. This humanity is the true beauty of life.

सहपाठी Summary in Telugu

విశ్వప్రసిద్ధ ఫిల్మ్ నిర్దేశకుడు, చేయి తిరిగిన కథారచయిత సత్యజితాయ్చే సృజించబడిన, ‘సహపాఠీ’ అత్యంత సంవేదనస్వభావం కలది. ఇందులో గత స్కూల్ జీవిత స్మృతులు, తరగతి సహవిద్యార్థుల ఆత్మీయత, జీవిత వాస్తవంలో పెరిగిన కటుత్వం – మృదుత్వం అన్నీ ప్రతిఫలిస్తాయి.

మోహితసర్కార్ కథలో కేంద్రబిందువు. నేడు తను ఓ ఉన్నత సఫల అధికారిగా జీవితం గడుపుతున్నాడు. తన సహవిద్యార్థి జయేవ్స్ ఫోన్ రావటం వలన ఎదలో చిన్ననాటి జ్ఞాపకాలు – స్కూల్ రోజులు, పోటీతత్వం, మైత్రి, ఆటపాట లులాంటివన్నీ పొంగిపొరలుతాయి. ఇవన్నీ తనకు ఇష్టమైనవే.

కానీ జయేవ్ తనింటికి వచ్చినపుడు తనమార్పును జూచి నిశ్ఛేష్ఠుడౌతాడు. ఎప్పుడూ చిరునవ్వుతో సన్నద్ధతగా ఉండే జల్దవ్ ఇప్పుడు దరిద్రంతో, సుస్తీతో కొట్టుమిట్టాడుచున్న ఓ బలహీనమైన మనిషయ్యాడు. జీవిత ప్రతికూల పరిస్థితులు, ఓటములు, ఆర్థిక పరిస్థితులు వీటికి కారణాలు. మాటల సందర్భంలో జయేవ్ అసలు ఆర్థిక సహాయానికి వచ్చినట్లు తెలిసింది.

ఓ రోజు మోహిత్ సాయంకొరకు స్వయంగా జయదేవికి బదులు తన కొడుకు సంజయ్వస్తాడు. ఈ పిల్లాడి అమాయకత్వం, మర్యాద మోహిత్ లోలోపల పోగొట్టుకున్న చిన్ననాటి మైత్రి మేల్కొంటుంది. తన చిన్ననాటి తన సహవిద్యార్థి స్వరూపం ఈ చిన్న పిల్లాడిముఖంలో తాండవిస్తుంది. తను ఆ పిల్లాడికి కావల్సినంతకు మించి ధనమిచ్చి ఆ పిల్లాడిని తన కారులో అతనింటికి పంపిస్తాడు.

ఈ విధంగా, ఈ కథ గతమైత్రి, సంవేదన, మానవీయ మూల్యాలు, పరులకు మేలుచేసే విధంగా ప్రేరేపిస్తూ ఉంటాయి. ఈ మానవత్వమే అసలుసిసలైన జీవనసౌందర్యం.

सहपाठी Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

सहपाठी कठिन शब्दार्थ

कड़वाहट = कड़वापन, చేదు
प्रतिस्पर्धा = होड़, పోటీ
ऊर्जा = शक्ति, उसाह, శక్తి, ఉత్సాహం
सहपाठी = साथ पढ़नेवाला मित्र, సహవిద్యార్థి, తోటి విద్యార్థి
मासूमियत = दोष रहित और दया का पात्र, అమాయకత్వం
संवेदना = अन्यों के दुःख से उत्पन्न करुणा, ఇతరుల దుఃఖంతో వచ్చిన కరుణ
त्यौरियाँ – चढ़ जाना = क्रोध से मछे पर बल पड़ना, క్రోధంరావటం
खोज-खबर = जाँच-पड़ताल, ‘జాడ తెలుసుకొనుట’
प्रतिद्वंद्विता = प्रतिद्वंदी की अवस्था, విపక్షం, ప్రతిపక్షం
कारोबारी = कामकाजी, व्यापारी, వ్యాపారి, పనిపాట చేయువాడు
कलाई घडी = हाथ की घड़ी, రిస్టువాచ్ (చేతి గడియారం)
पुर्जा = टुकड़ा, खंड, ముక్క,భాగం
चौखट = लकड़ी, आदि का चौकोर ढाँचा, గడప
गाल पिचकना = दुबला होना, गालोंका धँस जाना, బుగ్గలు తోసుకుపోవటం, సన్నబడుట, బలహీనమవటం
मस्सा = बिंदु के आकार में शरीर पर होनेवाला निशान, మచ్చ
बेतरती = अव्यवस्थित, అవ్యవస్థతగా ఉండటం.
गंजे होना = सिर के बाल झड़ना, బోడిగుండవటం
हाड़ – तोड़ मेहनत = हड्डी तोड़नेवाली मेहनत, ఎముకులు విరిగేటట్టు శ్రమ
भाग-दौड़ = दौड़धूप, హడావిడి
दलाली = दलाल काम, मध्यस्थ कार्य, డళారీపని
नसीब = तकदीर, అదృష్టం
गनीमत = संतोष की बात, సంతోషకరమైన మాట
माजरा = हाल, స్థితి
पिंड छूटना = परेशान हटना, పీడవదలటం
बला टलना = आपत्ति, दूर होना ఆపద తొలగటం
सप्ताहांत = हफ्ता के अंत में, వారం చివర
नौबत आना = दुर्दशा होनो, దుర్దశ చెందటం
भांप जाना = अनुमान करना, అంచనావేయుట
जुआड़ी = जुआ खेलनेवाला, జూదరి
नामुमकिन = असंभव, అసంభవం
हरकत = शरारत, చెడుపని, చెడునడత
जुगत = तरकीब, युक्ति, कौशल, యుక్తి, ఉపాయం
मोच = शरीर के जोड़ की नस का अपने स्थान से इधर – उधर खिसक जाना కీళ్లలోని నరాలు ఉన్నచోటు నుండి తొలగుట
जान छुडाना = मुक्त होना, ముక్తి పొందటం

सहपाठी Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi
उधेड़बुन तल्ला = ऊहापोह, तर्क, वितर्क, ఆలోచన
तल्ला = मंजिल, అంతస్థు
हामी भरना = हाँ करना, स्वीकृति देना, ఔననటం, అలాగే అనటం

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