Andhra Pradesh BIEAP AP Inter 2nd Year Hindi Study Material Pdf गद्यभाग 4th Chapter पुरस्कार Questions and Answers Summary.
Inter 2nd Year Hindi पुरस्कार Questions and Answers
मूल्यांकन हेतु
अ) “पुरस्कार” कहानी का सारांश लिखिए ।
जवाब.
बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री जयशंकर प्रसाद की लोकप्रिय कहानी, ‘पुरस्कार’ है । यह भारतीय नारी चरित्र का गौरवपूर्ण दर्पण हैं ।
कहानी का केंद्रबिंदु एक कृषक कन्या मधूलिका है । वह अपनी निर्धनता, संघर्ष, और अकेलेपन के बावजूद असीम साहस और नैतिकता रखती है । अपनी भूमि के कोशल- राजा के वश में होने के बाद पुरस्कार के रूप में मिली धनराशि को ठुकारा देती है । वह इसका कारण बताती है कि भूमि उसके पूर्वजों की धरोहर है । वह विक्रय वस्तु नहीं है । इसी स्वाभिमान से आकर्षित होकर मगध का राजकुमार अरूण उसके समीप आता है । लेकिन अरूण का उद्देश्य प्रेम के बजाय राजनैतिक स्वार्थ और महत्वाकांक्षा अधिक होता है।
एक दिन, रात को अरुण कोशल के दुर्ग पर कब्जा करने की योजना बनाता है | तब मधूलिका प्रिय के प्रेम में और देश के प्रेम में फँस जाती हैं । अंततः अपने पिता सिंहमित्र की विरासत – देशभक्ति और निष्ठा को चुनती है । तत्काल अरूण की दुष्ट योजना को राजा तक पहुँचा कब राज्य की रक्षा करती है ।
राजा अरूण को प्राणदंड देता है और मधूलिका का इच्छित पुरस्कार देना चाहता है । लेकिन मधूलिका बंदी अरूणा के साथ मृत्यु दंड के रूप में पुरस्कार चाहती है । वह तुरंत उसके पास जाकर खड़ी हो जाती है। इस प्रकार, यह कहानी यह दर्शाती है कि सच्चा पुरस्कार मनुष्य की आत्मा को तब मिलता है, जब वह सत्य, कर्तव्य और राष्ट्रीय भवनाओं के पद में खड़ा होता है ।
आ) निम्नलिखित गद्यांश के संदर्भ सहित व्याख्या लिखिए ।
प्रश्न 1.
कोशल का यह उत्सव प्रसिद्ध था। एक दिन केलिए महाराज को कृषक बनना पड़ता – उस दिन इंद्र पूजा की धूम धाम होती; गोठ होती नगर-निवासी उस पहाड़ी भूमि में आनन्द मनाते ।
जवाब.
सामान्य संदर्भ :- यह अवतरण प्रसिद्ध कहानी ‘पुरस्कार’ से दिया गया है । इसके कहानीकार श्री जयशंकर प्रसाद हैं, जो हिन्दी साहित्य के विशाल वन, बहुमुखी प्रतिभा के धनी, और भारतीय सांस्कृतिक चेतना के अमर गायक हैं ।
निकटस्थ संदर्भ :- कोशल राज्य के नियमानुसार, राजा ने स्वर्ण रंजित हल की मूठ पकड़कर खेत जोतने को तैयार होता है। किशोरी कुमारियों ने खीलों और फूलों की वर्षा की। इस संदर्भित अवतरण है, यह । कहानीकार कृषि महोत्सव का वर्णन करते हैं ।
व्याख्या :- कहानीकर कृषि महोत्सव का वर्णन करते हैं कि यह महोत्सव हर वर्ष हर्ष, उत्साह और उमंग से राज्य में मनाया जाता है । उस दिन राजा एक दिन के लिए किसान बनाता है । हर साल किसी एक की भूमि खेती के लिए चुनाई जाती है । उस भूमि के मालिक को भूमि से चौगुना मूल्य पुरस्कार के रूप में दिया जाता है । वह भूमि राजा के वश में हो जाती है । राजा खेत जोता है । इंद्र की पूजा होती है । गो सेवा भी की जाती है । नगर के निवासी पहाड़ी प्रात में आनंद मनाते हैं । यह पर्व धूम -धाम से मनाया जाता है ।
विशेषताएँ :- इस उद्धरण से अन्नदाता श्रम राजा को अवगत होता है। इंद्र- पूजा, गोसेवा आदि पर्व संस्कृति के सूचक हैं। यह पर्व कोशल राज्य के प्रमुख उत्सव का परिचायक है । भाषा और भाव सरल और सुबोध है । अवतरण संस्कृति शब्द मय है । ‘गोठ’ शब्द प्रांतीय भाषा है ।
प्रश्न 2.
देव ! यह मेरे पितृ -पितामहों की भूमि है । इसे बेचना अपराध है, इंसलिए मूल्य स्वीकार करना मेरी सामर्थ्य के बाहर है । महाराज के बोलने के पहले ही वृद्ध मन्त्री ने तीखे स्वर से कहा- अबोध ! क्या बक रही है ?
जवाब.
सामान्य संदर्भ :- यह अवतरण प्रसिद्ध कहानी ‘पुरस्कार’ से दिया गया है। इसके कहानीकार श्री जयशंकर प्रसाद हैं, जो हिन्दी साहित्य के विशाल वन, बहुमुखी प्रतिभा के धनी, और भारतीय सांस्कृतिक चेतना के अमर गायक हैं ।
निकटस्थ संदर्भ :- कृषि – महोत्सव का मुख्य कार्य समाप्त होने के बाद मधूलिका की भूमि के प्रतिफल के रूप में स्वर्णमुद्राएँ दी जाती हैं । मधुलिका उन्हें महाराज पर न्योछावर करके सविनय उनसे कदृती है । तत् समय का संदर्भा धीन है, प्रस्तुत अवतरण ।
व्याख्या :- मधूलिका महाराज से सविनय निवेदन करती है कि हे परमात्मा ! इस कृषि महोत्सव में हमारी जो भूमि आपके वश में कर दी गई, वह हमारी पैतृक संपदा है । उसे बेचना अपराध और पाप है । इसका प्रतिफल लेना मेरे वश में नहीं है । मैं क्या करूँ ? मैं असहाय अवला हूँ । तब बूढे मंत्री ने उसे टोकते हुए गंभीरता से कहता है कि क्या बकवास कर रही हो, हे पावली ? चुप चाप, इस अनुपम राजकीय अनुग्रह को स्वीकार करो ।
विशेषताएँ :- यह अवतरण मधूलिका के स्वाभिमान, विनय और उसकी स्वामि – भक्ति साथ – साथ वृद्ध मंत्री की उद्दंडता का परिचायक है। परंपरागत भूमि धरोहर है । यह क्रय-विक्रय की वस्तु नहीं है । इसमें पैतृक भूमि के प्रति अमित प्रेम दिखाता है । इसमें सशक्त भाषा का प्रयोग किया गया ।
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इ) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त रूप में लिखिए ।
प्रश्न 1.
कोशल के उत्सव के बारे में बताइए ?
जवाब.
कोशल के उत्सव को कृषि महोत्सव कहते हैं । यह महोत्सव हर वर्ष हर्ष, उत्साह और उमंग से राज्य में मनाया जाता है । उस दिन राजा एक दिन के लिए किसान बनाता है । हर साल किसी एक की भूमि खेती के लिए चुनाई जाती है । उस भूमि के मालिक को भूमि से चौगुना मूल्य पुरस्कार के रूप में दिया जाता है । वह भूमि राजा के वश में हो जाती है। राजा खेत जोतता है । इंद्र की पूजा होती है । गो-सेवा भी की जाती है। नगर के निवासी पहाड़ी प्रात में आनंद मनाते हैं । यह पर्व धूम-धाम से मनाया जाता है।
प्रश्न 2.
मधूलिका ने अरूण की योजना राजा को क्यों बताई ?
जवाब.
एक दिन, रात को अरुण, कोशल के दुर्ग पर कब्जा करने की योजना बनाता है । तब मधूलिका प्रिय के प्रेम में और देश के प्रेम में फँस जाती हैं | अंततः अपने पिता सिंहमित्र की विरासत – देशभक्ति और निष्ठा को चुनती है। तत्काल अरूण की दुष्ट योजना को राजा तक पहुँचा कर राज्य की रक्षा करती है । मधूलिका को व्यक्ति – प्रेम अर्थात् प्रिय के प्रेम से देश का प्रेम अधिक महत्वपूर्ण है। प्रिय प्रेम से देश भक्ति महान् होती है। इसलिए मधुलिका ने अरूण की योजना राजा को बताई ।
ई) सही शब्द चुनकर दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।
प्रश्न 1.
मधूलिका किसकी बेटी थी ?
अ) महाराज की
आ) सिंहमित्र की
इ) सेनापति की
जवाब.
आ) सिंहमित्र की
प्रश्न 2.
मगध का राजकुमार कौन था ?
अ) अरूण
आ) वरूण
इ) कुमार
जवाब.
अ) अरूण
प्रश्न 3.
मधूलिका ने राजा से क्या माँगा ?
अ) प्राणदण्ड
आ) राजमहल
इ) आभूषण
जवाब.
अ) प्राणदण्ड
प्रश्न 4.
कोशल के उत्सव में महाराजा क्या बनते थे ?
अ) दास
आ) कृषक
इ) मंत्री
जवाब.
आ) कृषक
प्रश्न 5.
उत्सव में भूमि का कितना मूल्य दिया जाता था ?
अ) चौगुना
आ) दोगुना
इ) दस गुना
जवाब.
अ) चौगुना
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पुरस्कार Summary in Hindi
कवि परिचय
श्री जयशंकर प्रसाद हिन्दी साहित्य के विशाल वन, बहुमुखी प्रतिभा के धनी, और भारतीय संस्कृतिक चेतना के अमर गायक हैं। उनका जन्म 30 जनवरी 1889 को वारणासी में हुआ था । बचपन से ही उनका मन साहित्य, दर्शन, इतिहास और कला में रम गया। उन्होंने स्वाध्याय से संस्कृत, हिन्दी, उर्दू, फ़ारसी और अँग्रेजी भाषाओं का अद्भुत ज्ञान अर्जित किया ।
उनके साहित्य में आध्यात्मिकता, राष्ट्रीय गौरव और मानवीय भावनाओं की गहरी छाप दिखाई देती है । वे हिन्दी साहित्य में छायावाद के प्रणेता थे ।
उन्होंने प्रसिद्ध काव्य, नाटक, एकांकी और कहानियाँ लिखीं। उनकी सर्वश्रेष्ठ काव्य ‘कामायनी’ हिन्दी साहित्य की अमर कृति है । आँसू, लहर आदि उनके खंड काव्य हैं। चंद्रगुप्त, स्कन्दगुप्त, अजातशत्रु, ध्रुवस्वामिनी आदि उनके प्रमुख नाटक हैं । आकाशदीप, पुरस्कार, छोटाजादू आदि उनकी प्रमुख कहानियाँ हैं । कंकाल, तितली आदि उनके उपन्यास हैं । एक घूँट, कल्याणी परिणय आदि उनके प्रसिद्ध एकांकी हैं ।
उनका देहांत 15 नवंबर 1937 को 48 वर्ष की अवस्था में हुआ ।
पाठ का सारांश
बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री जयशंकर प्रसाद की लोकप्रिय कहानी, ‘पुरस्कार’ है । यह भारतीय नारी चरित्र का गौरवपूर्ण दर्पण हैं ।
कहानी का केंद्रबिंदु एक कृषक कन्या मधूलिका है । वह अपनी निर्धनता, संघर्ष, और अकेलेपन के बावजूद असीम साहस और नैतिकता रखती है । अपनी भूमि के कोशल – राज के वश में होने के बाद पुरस्कार के रूप में मिली धनराशि को ठुकरा देती है। वह इसका कारण बताती है कि भूमि उसके पूर्वजों की धरोहर है । वह विक्रय वस्तु नहीं है । इसी स्वाभिमान से आकर्षित होकर मगध का राजकुमार अरूण उसके समीप आता है । लेकिन अरूण का उद्देश्य प्रेम के बजाय राजनैतिक स्वार्थ और महत्वाकांक्षा अधिक होता है।
एक दिन, रात को अरुण कोशल के दुर्ग पर कब्जा करने की योजना बनाता है । तब मधूलिका प्रिय के प्रेम में और देश के प्रेम में फँस जाती हैं। अंततः अपने पिता सिंहमित्र की विरासत – देशभक्ति और निष्ठा को चुनती है। तत्काल् अरूण की दुष्ट योजना को राजा तक पहुँचा कब राज्य की रक्षा करती है ।
राजा अरूण को प्राणदंड देता है और मधूलिका का इच्छित पुरस्कार देना चाहता है । लेकिन मधूलिका बंदी अरूणा के साथ मृत्यु दंड के रूप में पुरस्कार चाहती है । वह तुरंत उसके पास जाकर खड़ी होजाती है । इस प्रकार, यह कहानी यह दर्शाती है कि सच्चा पुरस्कार मनुष्य की आत्मा को तब मिलता है, जब वह सत्य, कर्तव्य और राष्ट्रीय भावनाओं के पद में खड़ा होता है।
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पुरस्कार Summary in English
Shree Jai Shankar Prasad is a multifaceted personality. His popu- lar story is ‘Puraskar’ which is a mirror of the Indian women’s life.
The story contens on Madhulika, a young farmer girl. Despite her poverty, hardship, and lonelyness, she passess immense courage and moral strength. After her land is taken by the king of Kosala and receipt of money as compensation she rejects that money. She explains that the land is her heritage not a commodity for sale. Attracted by her self-respect, Arun, the prince of Magadha, falls for her. However Arun’s motives are more political and ambition.
One night, the prince, Arun makes a plan to capture the fort of Kosala. Then Madhulika oscillates between the love of the country and the love of the lover ultimately, she selects the heritage of her father Simhmitra. It is nothing but patriations and dedication. Im- mediately she saves her kingdom by informing the conspiracy of Arun to the King.
The King gives Arun the death penality and a reward to Madhulika, whichever she wants. By asking her also, a death penality along with Arun, she rushes immediately towards Arun and stands by the side of him.
Thus, the story establishes that the true reward is found in the soul of a human being when he stands for truth, duty and national sentiments.
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पुरस्कार Summary in Telugu
బహుముఖి ప్రతిభాశాలి శ్రీ జయశంకర్ ప్రసాద్ ప్రసిద్ధ కథ ‘పురస్కార్’. ఇది భారతీయ నారీ గౌరవానికి దర్పణం.
ఓ రైతు బిడ్డ మధులిక ఈ కథకు కేంద్రబిందువు. ఆమె తన బీదతనము, సంఘర్షణ, ఒంటరితనముగా ఉన్నప్పటికినీ, అంతులేని సాహసం, నైతికతతో శోభిల్లుతుంది. కోసలరాజు తన భూమిని వశపరచుకొనగా లభించిన ధనరాశిని తిరస్కరిస్తుంది. భూమి తన పూర్వీకుల సొత్తు. అది విక్రయ వస్తువు కాదు అని కోరుతూ చెప్తుంది. ఈ స్వాభిమానంతోనే తనపట్ల మగధరాజకుమారుడు అరుణ్ ఆకర్షితుడౌతాడు. కాని అరుణ్ ఉద్దేశ్యం ప్రేమ కంటే రాజనీతిస్వార్థం, మహత్వాకాంక్షలే ముఖ్యం.
“ఓ రోజు, రాత్రి అరుణ్ కోశల దుర్గాన్ని వశపరచుకొనే ఉద్దేశ్యంతో దానిపై దండెత్తుతాడు. అప్పుడు మధులిక దేశప్రేమ మరియు ప్రియుని ప్రేమ మధ్య మానసిక సంఘర్షణతో ఉంది, చిట్టచివరకు, తండ్రి సింహమిత్రుని దేశభక్తి, నిష్ఠను ఎంచుకొని, వెనువెంటనే అరుణ్ దుష్టపన్నాగాన్ని రాజుకు చేరవేసి, రాజ్యాన్ని రక్షిస్తుంది.
రాజు అరుణ్కు ప్రాణదండన విధిస్తాడు. మధులికకు తను కోరుకొన్న బహుమతినిస్తానని కోరుకోమంటాడు. తనకు కూడా మరణదండన విధించండని, వెంటనే పరుగుతీసి అరుణ్ ప్రక్కన చేరుతుంది.
ఈ విధంగా, ఎప్పుడైతే మనుష్యుడు సత్యం, కర్తవ్యం, దేశప్రేమ భావనల పక్షాన ఉంటాడో, అప్పుడు తన ఆత్మకు నిజమైన బహుమతి లభింస్తుందని ఈ కథ తెలియపరుస్తుంది.
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पुरस्कार कठिन शब्दार्थ
आर्द्रा नक्षत्र = ఒక నక్షత్రం, నక్షత్రాల సమూహం,
देव दुंदु भी का घोष = दैवी ढोल – नगाड़ों की ध्वनि दुंदुभी, దేవతల దుందుభి ధ్వని
उर्वरा = उपजाऊ , సారవంతమైన
तोरण = द्वार पर बना सजावट का मेहराब, ద్వారం దగ్గర తోరణం
चामरधारी = पंखा झुलनेवाला, పంఖావిసురువాడు, విసనకర్ర విసరేవాడు
हिलोर = लहर, అలలు
आम्र पल्लव = आम का नया ओर कोमल पत्ता, మామిడి చిగురు
स्वस्त्ययन = मंगल कामना का उच्चरण, మంగళాకాంక్షలు తెలిపేవారు
गोठ = गो – सेवा, గోసేవ
कौशेयवसन = रेशमी वस्त्र, పట్టు వస్త్రం
अलक = माथे पर लटकते बाल, నాగలి పై వ్రేలాడే జుట్టు
बरौनी = पलको के आगे की बालों की पंक्ति, కంటిరెప్పల వెంట్రుకల పంక్తి
भाल = ललाट, లలాటం, నొసట
स्वर्ण मुद्राएँ = सोने के सिक्के, బంగారపు నాణేలు
ऊर्ज स्वित = ऊर्ज से युक्त, శక్తి కలిగిన
भृकुटी = भौंह, నొసట, లలాటం
मधूक वृक्ष = महुए का पेड़, रेतीली भूमि का प्रसिद्ध वृक्ष , ఇప్పచెట్టు
मुंड़ेर = खेत की मेंड़, పొలంగట్టు
कपोती = कबूतरी, ఆడపావురం
ऊँघना = नींद में झूमना, నిద్రలో తూలటం
छिन्न = खंडित, नष्ठ किया हुआ, చిన్నాభిన్నం
चुत होना = गिरा होना, పడటం
सुषमा = अत्यंत सुंदरता, మహా సౌందర్యం
धृष्ट = दुस्साहसी, దుస్సాహనుడు
भद् = कल्याण करनेवाला, సంక్షేమ కర్త
भदा = कल्याणकारिणी, సంక్షేమకర్త్రి
बिडबना = उपहास का विषय, అపహాస్య విషయం
अवग्ठन = घूँघट, आकरण, ముసుగు
स्नेह = प्रेम, ప్రేమ
निष्ठुर = कठोर, निर्दय, కఠోరం, నిర్ణయ
प्रहार = चोट, దెచ్చి
टीस = कसक, पीड़ा, పీడ, బాధ, పోటు
ड़ठल = पौधों आदि का धड़, దంటూ, కాడ, కొమ్ము
दौड़ – धूप = बार-बार इधर-उदर आना जाना మిక్కిలి పరిశ్రమ
छाजन = छोने की क्रिया, జల్లెడ పట్టటం
चाटुकारी = चापलूसी, ముఖస్తుతి
अधीर = धैर्यरहित, परेशान, ధైర్యంలేకపోవుట
प्रासाद = राजभवन, రాజభవనం
खिलवाड़ी = मनोरंजक करनेवाला, వినోదం కల్గించువాడు
लपकाना = फुर्ती से आगे बढ़ना, ముందుకూ దూసుకు వెళ్ళటం
जर्जर = जीर्ण, क्षीण, జీర్ణమైన, క్షీణించిన
कपाट = दरवाजा, किवाड, తలుపు
सन्नाटा = मौन, निर्जनता మౌనం, జనసంచారం లేకపోవటం
निस्तब्ध = निश्चेष्ट, నిశ్చేష్టం
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गहूवर = दुर्भेध्य स्थान, దుర్బేధ్యమైన చోటు
द्वंद्व = मानसिक संघर्ष, మానసిక సంఘర్షణ
ढिठाई = दुस्साहस, దుస్సాహసం
दस्यु = डाकू, लुटेरा, దోపిడీ దొంగలు
आंदोलन = हल-चल,उथल-पुतल, హర్తాళ్
प्रकोष्ठ = इमारत के भीतर का आंगन, భవనం లోపల ఖాళీ ప్రదేశం
उबड़-खाबड = अत्यंत घना, బాగా ఒత్తుగా ఉన్న
निविड़ = अत्यंत घना, బాగా ఒత్తుగా ఉన్న
झुरमुट = घनी झाड़ियों का समूह, ఒత్తుగా నున్న పొదల సమూహం
निर्वासित = देश से निकाला हुआ, దేశబహిష్కృత
लीला निकेतन = विलास भवन, విలాసభవంతి
सशंक = शंकायुक्त, సందేహాస్పద
उर्दैवागन = परेशान, चिंतित, చింతమగ్నం
प्राण – पण = जान की बाजी, ప్రాణాన్ని పందెంగా ప్రాణాన్ని లెక్కచేయకుండా
उधेड़बुन = मन का भ्रम, ఊహాపోహలు
विक्षिप्त = पागल, परेशान, పిచ్చి, బాధ
उल्काधारी = मशाल लिए हुए, కాగడాలు పట్టుకున్న
वल्गा = घोड़े की रस्सी, కళ్లెం
प्रकोष्ट = कमरा, గది
अधिपति = शासक, मालिक, పాలకుడు
आतवाई = आक्रमण करनेवाला दुष्ट, దురాచారి