युवाओं से Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

Andhra Pradesh BIEAP AP Inter 2nd Year Hindi Study Material Pdf गद्यभाग 3rd Chapter युवाओं से Questions and Answers Summary.

Inter 2nd Year Hindi युवाओं से Questions and Answers

मूल्यांकन हेतु

अ) ‘युवाओं से’ पाठ का सारांश लिखिए ।
जवाब.
आधुनिक युगद्रष्टा, युवा सन्यासी, भारतीय संस्कृति के मूर्तिमान् एवं विश्व व्याप्त कर्ता और बहुमुखी प्रतिभाशाली के धनी श्री स्वामी विवेकानंद का निबंध है, ‘युवाओं से’ ।

इस निबंध में स्वामी विवेकानंद नवयुवकों को चरित्र निर्माण की शिक्षा देते हुए उन्हें राष्ट्र के नव निर्माण केलिए प्रोत्साहित करते हैं ।

वे नवयुवकों से कहते हैं कि वर्तमान में आत्मविश्वासी नवयुवकों की आवश्यकता है । इनसे ही राष्ट्रीय आदर्श – ‘त्याग और सेवा’ देश भर में फैल जाएगा। ‘मरते दम तक गरीबों और ताडित-पीडितों के लिए सहानुभूति’, यही हमारा आदर्श वाक्य है। इसे सच करना है ।

हम सब ईश्वर की संतान हैं। आपस में ईर्षा – द्वेष भाव मत रखो। स्वच्छ आर सुदृढ इच्छाशक्ति ही सर्वशक्तमान है ।

देश के पीडित – ताडित- अन्नार्त लोगां से सहानुभूति, तन- मन और प्रेम से व्यवहार करो । निस्वार्थ भाव से उनकी मदद करो । यही असली देशभक्ति है ।

हे मेरे युवा मित्रो ! तुम लोग दृढ और शक्तिशाली बनो । मैं सर्वधर्म समभाव रखता हूँ । तुम भी सभी धर्मो को मानलो ।

शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उन्नती करना है ।

तुम लोग स्वार्थ परन्तु, ईर्ष्या – देवष, गुटबंदी छोड़कर सहन शीलता अपना ओ । तब विश्व गुरू भारत बनेगा ।

इस प्रकार, स्वामीजी प्रेरणा देते हैं कि उठो, जागो और तब तक मत रूको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए ।

युवाओं से Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

आ) नीचे दिए गए गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए ।

प्रश्न 1.
“उठो, जागो, स्वयं जागकर औरों को जगाओ। अपने मनुष्य जन्म को सफल करो । उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत उठो, जागो और तब तक रूको नहीं, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाय ।”
जवाब.
सामान्य संदर्भ :- प्रस्तुत अवतरण आधुनिक युगद्रष्टा, युवा सन्यासी, भारतीय संस्कृति के मूर्तिमान एवं विश्वव्याप्त कर्ता श्री स्वामी विवेकानंद के निबंध, “युवाओं से” दिया गया है।

निकटस्थ संदर्भ :- स्वामीजी नवयुवकों को चरित्र निर्माण की शिक्षा देते हुए उन्हें राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए प्रोत्साहित करते हैं। स्वामीजी युवकों से पूछते है. कि क्या तुम लोगों को अवगत है कि हमारी प्रजा भूखे मर रही हैं, बहुत समय से । यदि तुम लोग इससे दुःखित हो तो तुम लोग देश भक्त हो । इस संदर्भा धीन है प्रस्तुत उद्धरण |

व्याख्या :- स्वामीजी नवयुवकों को जागृत कर रहे हैं । हे नवयुवको, तुम लोग उठो, जागो, सचेत हो जाओ औरों को भी सचे करो। सभी अपने मानव जन्म को, अच्छा काम करके सफल बनाओ। तुमहारा लक्ष्य देश और अन्नार्त देशवासियों का कल्याण करना है । इस लक्ष्य सिद्धि सफल होने तक असावधानी से मत रहो, मत रूको । “उत्तिष्ठ जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत का मंत्र कठोपनिषद का एक अत्यंत प्रेरणादायक है । इसे स्वामीजी ने लोकप्रिय बनाया है । इसका अर्थ है, अज्ञान, अंधविश्वास और आलस्य से जागकर अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त करो ।

विशेषताएँ :- इस अवतारण में भारत की संस्कृति, आध्यात्मिकता झलकती है । कठिन संस्कृत मंत्र को सरल बनाकर स्वमीजी ने लोक प्रिया बनाया । यह प्रेरणादायक और उपदेशात्मक अवतारण है ।

प्रश्न 2.
“अपने भाइयों का नेतृत्व करने का नहीं, वरन् उनकी सेवा करने का प्रयत्न करो । नेता बनने की इस क्रूर उन्मत्तता ने बड़े-बड़े जहाजों को इस जीवनरूपी समुद्र में डुबो दिया है।”
जवाब.
सामान्य संदर्भ :- प्रस्तुत अवतरण आधुनिक युगद्रष्टा, युवा सन्यासी, भारतीय संस्कृति के मूर्तिमान एवं विश्वव्याप्त कर्ता श्री स्वामी विवेकानंद के निबंध, “युवाओं से” दिया गया है ।
निकटस्थ संदर्भ :- निबंधकार स्वामीजी नवयुवकों से असकी शिक्षा के बारे में बताने के बाद यह कथन कहते हैं ।
ब्याख्या :- हे नवयुवकों ! तुम लोग नेतागण बनकर जनता का नेतृत्व मत करना | नेतागण देश के शासक हो सकते हैं । लेकिन वे प्रप्रथम देशवासी के सेवक हैं । शासक बनने की इच्छा छोड़ दो। इस इच्छा ने जीवन रूपी सागर में बड़े बड़े जहाजों को डुबा दिया। अर्थात् नेता बनने की महत्वाकांक्षा ने बड़े – बड़े लोगों की जिंदगियों को सर्वनाश किया । तुम लोग तो देश के नेता मत बनो । देशवासियों के सेवक बनो

विशेषताएँ :- यह अवतरण वर्तमान नेताओं की स्वार्थपरता और दुष्टता का परिचायक है | देश के सेवक ही आज देश की आवश्यकता है । यह उद्धरण संदेशात्मक है । भाषा अलंकारिक है । इस अवतरण में रूपकालंकार है ।

इ) निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त रूप में उत्तर दीजिए ।

प्रश्न 1.
विवेकानन्द के अनुसार सच्चा देशभक्त कौन है ?
जवाब.
देश के माने मिट्टी नहीं, देश के माने मनुज है। विवेकानन्द के अनुसार देश के मनुष्यों के दुःख, भूखा पीड़ा, दर्द आदि दरिद्रताओं से जिनके हृदय द्रवित हो जाता है वे ही देशभक्त हैं। जिन में उनके अपार प्रेम है, वे ही देशभक्त हैं । जो नाम, कीर्ति, धनसंपत्ति, अपनी भलाई अर्थात् स्वार्थपरता आदि छोड़ देते हैं और गरीबों की सहायता करते हैं वेही असली देशभक्त हैं। देश के सेवक ही असली देशभक्त हैं ।

प्रश्न 2.
विवेकानन्द ने शिक्षा के बारे में क्या कहा ?
जवाब.
विवेकानन्द ने कहा कि शिक्षा विविध जानकारियों का ढेर नहीं है, जो मस्तिष्क में ठूस दिया जाए। असली शिक्षा आत्मसात् होती है। विचारों की वह अनुभूति लेती है । वह जीवन, मनुष्य और चरित्र निर्माण में सहायक होती है । शिक्षित की अपेक्षा विचारों को आत्म सात करनेवाला साधारण व्यक्ति ही अधिक शिक्षित होता है ।

युवाओं से Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

ई) सही विकल्प चुनकर निम्न लिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

प्रश्न 1.
स्वामी विवेकानन्द का वास्तविक नाम क्या था ?
अ) सिद्धार्थ
आ) नरेन्द्रनाथ दत्त
इ) दयानंद सरस्वती
जवाब.
आ) नरेन्द्रनाथ दत्त

प्रश्न 2.
स्वामी विवेकानन्द ने किस वर्ष शिकागो धर्म सम्मेलन में भाषण दिया था ?
अ) 1883 में
आ) 1893 में
इ) 1903 में
जवाब.
आ) 1893 में

प्रश्न 3.
विवेकानन्द के गुरु कौन थे ?
अ) रामकृष्ण परमहंस
आ) गाँधी जी
इ) कोई नहीं
जवाब.
अ) रामकृष्ण परमहंस

प्रश्न 4.
“उठो, जागो और तब तक रूको नहीं” यह विचार किसका है ?
अ) स्वामी विवेकानन्द का
आ) रामकृष्ण परमहंस का
इ) महात्मा गाँधी का
जवाब.
अ) स्वामी विवेकानन्द का

प्रश्न 5.
विवेकानन्द किनका संगठन करना चाहते थे ?
अ) बच्चों का
आ) नवयुवकों का
इ) वृद्धों का
जवाब.
आ) नवयुवकों का

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युवाओं से Summary in Hindi

कवि परिचय

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ । उनका मूल नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था । युवावस्था में वे भौतिकवाद और आध्यात्मिकवाद के विचलित रहे थे। गुरु रामकृष्ण परमहंस की कृपा से उन्हें ईश्वर की सर्वोच्छ अनुभूति का मार्ग प्रशस्त किया । गुरू ने नरेंद्र को आत्मदर्शन कराकर विवेकानंद स्वामी बना दिया। स्वामीजी ने आधुनिक युग के द्रष्टा, युवा सन्यासी के रूप में भारतीय संस्कृति की सुगंध विदेशों में बिखेरी। स्वामीजी ने अमेरिका के शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारतीय सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने उसमें “मेरे अमेरिकी भाईयों एवं बहनो” संबोधित कर श्रोतागण का वाह-वाह लूट लिया। भारत का वेदांत दर्शन पूरे विश्व में उनके विशिष्ट वक्तृता के कारण ही, प्रतिष्ठित हो सका। उन्होंने वेदांत के मानवतावाद का प्रचार किया। वे बड़े स्वप्न द्रष्टा थे ।

वे साहित्य, दर्शन, इतिहास और योग के विद्वान थे। योग, राजयोग, ज्ञानयोग आदि उनकी मुख्य रचनाएँ हैं ।

उनके द्वारा स्थापित रामकृष्णा मिशन आज भी विवेकानंद के विचारों के प्रचार- प्रसार से मंडित है ।

पाठ का सारांश

आधुनिक युगद्रष्टा, युवा सन्यासी, भारतीय संस्कृति के मूर्तिमान् एवं विश्वव्याप्त कर्ता और बहुमुखी प्रतिभाशाली के धनी श्री स्वामी विवेकानंद का निबंध है, ‘युवाओं से यह संबोधन शौली में लिखित व्याख्यान है। इस निबंध में स्वामी विवेकानंद नवयुवकों चरित्र निर्माण की शिक्षा देते हुए उन्हें राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए प्रोत्साहित करते हैं ।

वे नवयुवकों से कहते हैं कि वर्तमान में आत्मविश्वासी नवयुवकों की आवश्यकता है । इनसे ही राष्ट्रीय आदर्श – ‘त्याग और सेवा’ देश भर में फैल जाएगा । ‘मरते दम तक गरीबों और ताडित-पीडितों के लिए सहानुभूति’, यही हमारा आदर्श वाक्य है । इसे सच करना है ।

हम सब ईश्वर की संतान हैं। आपस में ईर्षा – द्वेष भाव मत रखो । मानव बनकर मानवता फैलाइए । स्वच्छ आर सुदृढ इच्छाशक्ति ही सर्वशक्तमान है । मैं तो श्रीराम के सेतु – निर्माण में सहायक गिलहरी की भांति बनना चाहता हूँ । तुम लोग भी बनो ।

देश के पीड़ित – ताड़ित – अन्नार्त लोगां से सहानुभूति, तन- मन और प्रेम से व्यवहार करो। निस्वार्थ भाव से उनकी मदद करो । यही असली देशभक्ति है ।

हे मेरे युवा मित्रो ! तुम लोग दृढ और शक्तिशाली बनो । तब रामायण और गीता ठीक तरह समझ सकोगे । मानवता और आत्म की महानता अच्छी तरह ग्रहण करोगे । मैं सर्व धर्म समभाव रखता हूँ । तुम भी सभी धर्मो को मान लो । प्रत्येक धर्म मानव कल्याण के लिए ही है ।

शिक्षा केवल विविध ज्ञान ज्ञान की राशि नहीं है। असली शिश्रा किवाबी ज्ञान नहीं, बल्कि मनुष्य बनानेवाकी और चरित्र निर्माण करनेवाली प्रक्रिया है । इस का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उन्नती करना है ।

तुम लोग स्वार्थ परन्तु ईर्ष्या देवष, गुटबंदी छोड़कर सहशीलता अपना ओ । तब विश्व – गुरू भारत बनेगा |

इस प्रकार, स्वामीजी प्रेरणा देते हैं कि उठो, जागो और तब तक मत रूको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए ।

युवाओं से Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

युवाओं से Summary in English

The essay ‘Yuvaom Se’ is written by the visionist of the modern age, a young mark, the incaronate of the Indian Culture and its world- wide propagator and the all-rounder in Swami Vivekananda. This is an oration in form of a addressing – style.

In this essay, Swami Vivekananda exports the youth to build th character and the Nation. He says that a present there is a needs of persons of having self-confidence. Though them, the ideal of Nation can be propagated. We have to embrace the compassion of our fel- low citizens and those who suffer.

We are children of the god. Don’t hatred or every among our- selves. Be a human and propagate humanity. The pure, strong and will power supreme. I want to be like squirrel that helped building Rama’s bridge. You also become live that squirrel. Treat the sufferering people of the country with hunger, with compensat and love heartfully.

Oh, my dear young people, you become strong and powerful. Then you can understand Geetha and Ramayan very well. You can under- stand well the greatness of humanity and soul. I accept all religions. You also accept them. Each religion wishes the welfare of the people. Education is not a collection of miscallaneous information. It is not a bookish knowledge. It is about becoming human being and building character. Its purpose is not just to get a job, but to achieve physical, mental and spiritual progress. Give up selfishness, jealousy and factionalism and cultivate to learnce. Then India will become the world teacher.

Thus, Swamiji inspires the youth to get up, wake up, wake up yourself and wakeup the others.

युवाओं से Summary in Telugu

ఆధునిక యుగద్రష్ట, యువ సన్యాసి, భారతీయ సంస్కృతి సాకార రూపం మరియు విశ్వవ్యాప్తం చేసిన స్వామివివేకానందుని వ్యాసం ఈ ‘యువాఓం సే’. ఇది సంబోధనాశైలిలో లిఖించిన వ్యాఖ్యానం. ఈ వ్యాసంలో స్వామి నవయువకులని చరిత్ర నిర్మాణం గురించి బోధిస్తూ దేశ నవనిర్మాణానికి ప్రోత్సహిస్తారు.

వారు నవయువకులతో మాట్లాడుతూ ప్రస్తుతం ఆత్మవిశ్వాసం గల నవయువత అవసరం. వీరితోనే దేశ ‘ఆదర్శం – త్యాగం – సేవ’ దేశమంతటా వ్యాపిస్తుంది. మృత్యువు వరకు బీదల, తాటితపీడిత ప్రజలకు సహానుభూతితో మెలగటమే మన ఆదర్శ వాక్యం. దీనిని నిజం చేయాలి.

మనమంతా భగవంతుని సంతానమే. పరస్పరం ఈర్ష్యాద్వేషాల భావనతో ఉండరాదు. మనుష్యునిగా ఉండి మానవత్వాన్ని వెదజల్లండి. స్వచ్ఛమైన, సధృఢమైన ఇచ్ఛాశక్తియే సర్వశక్తివంతమైనది. నేనయితే శ్రీరాముని సేతువు నిర్మాణంలో సహాయపడిన ఉడతలా కావాలని కోరుకుంటున్నా. మీరు కూడా అలా ఉండండి.

దేశంలోని పీడిత, తాడిత, అన్నార్తుల పట్ల, సానుభూతితో త్రికరణశుద్ధిగా ప్రేమతో వ్యవహారించండి. నిస్వార్థంతో వారికి సహాయపడండి. ఇదే అసలైన దేశభక్తి.

నా యువ మిత్రులారా! మీరు దృఢంగా శక్తి శాలురై ఎదగండి. అపుడు గీత, రామాయణం బాగా అర్థం చేసుకోగల్గుతారు. మానవత్వం, ఆత్మవిశిష్టత బాగా అర్థమౌతాయి. నేను సర్వ ధర్మ సమభావాన్ని ఇష్టపడతాను. మీరు కూడా అన్ని ధర్మాల్ని సమదృష్టితో చూడండి. ప్రతిధర్మం, మతం మానవుని సంక్షేమాన్ని, కోరుకొంటుంది.

విద్య కేవలం వివిధ జ్ఞానాల కుప్ప కాదు. అసలైన విద్య కేవలం పుస్తక జ్ఞానం కాదు. మనుష్యుని మనుష్యునిగా మార్చి చరిత్ర నిర్మాణాన్ని చేసేదే అసలుసిసలైన విద్య. దీని ఉద్దేశ్యం కేవలం ఉద్యోగం కోసమేకాదు. శారీరక, మానసిక, ఆధ్యాత్మిక ఉన్నతి కోసమే విద్య.

మీరు స్వార్థం, ఈర్ష్యాద్వేషాలు విభజించబడిన వివిధ దళాలను వీడి సహనాన్ని అలవరచుకొనండి. అప్పుడు భారత్ విశ్వగురువుగా అవుతుంది.

ఈ విధంగా ‘లెమ్ము, మేల్కొమ్ము, లక్ష్యసిద్ధి పొందేవరకు ఆగకు’ అంటూ యువతను ప్రోత్సహిస్తారు స్వామీజీ.

युवाओं से Questions and Answers Summary Inter 2nd Year Hindi

युवाओं से कठिन शब्दार्थ

पीढ़ी = परंपरागत स्थिति , పరంపర
पुनरूद्धान = पुनः उन्नति करना, फिर से उठना, తిరిగి ఉన్నతి పొందటం, తిరిగి లేవటం
रत्ती भर = बहुत थोड़ा , చాలా తక్కువ
लालसा = इच्छा, కోరిక
अवस्था = दशा, हालत, దశ స్థితి
उत्तरदायित्व = जिम्मेदारी, బాధ్యత
आस्था = विश्वास, निष्ठा , విశ్వాసం, నిష్ఠ,
घृणित = धिनौना, विरक्ति, అసహ్యకరమైన, ఏవగింపైన
वीर्यवान् = वीर, शक्तिवान, बलवान, బలవంతుడు, శక్తి వంతుడు
श्रद्धा संपन्न् = श्रद्धापूर्ण विश्वास के साथ శ్రద్ధతో కూడిన విశ్వాసంతో
अप्रतिहत = जिसे रोकान जा सके, అవరోధంగా
पुल = सेतु, వంతెన
बालू = रेत, ఇసుక
आच्छन्न = छिपा हुआ, ढका हुआ, దాచిన, కప్పిన
आस्तिक = ईश्वर में विश्वास करनेवाला, భగవంతునిపై విశ్వాసం గల వ్యక్తి
नास्तिक = ईश्वर में विश्वास नहीं करनेवाला, భగవంతునిపై విశ్వాసం లేనివాడు
बोड़ा = अजगर, కొండచిలువ
यंत्रजा = यातना, पीड़ा, యాతన
तरूण = युवक, नवजवान, యువకుడు
स्नायु = नाड़ी, पेशी, నాడి, నరం
माँसपेशियाँ = शरीर के अंदर परस्पर जुड़े हुए मांसपिड, శరీరం లోపల ఒక దానితో ఒకటి అనుసంధానించబడిన కండరాలు
उपासना = आराधना, भक्ति, ఆరాధన, భక్తి
घुटने टेकना = हार जाना, आत्म समर्पण करना ఓడిపోవుట, ఆత్మసమర్పణ చేయటం
आत्मसात = अपने में मिलाया हुआ, తనలో ఇముడ్చుకోవటం
की अपेक्षा = तुलनामें, కంటె, పోలికతో
उन्मत्तता = पागलपन, పిచ్చి
दलबंदी = दल का निर्माण या संगठन करना, దళాన్ని నిర్మించడం లేదా సంఘటిత పరచటం

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