Andhra Pradesh BIEAP AP Inter 2nd Year Hindi Study Material Pdf गद्यभाग 2nd Chapter सुखी राजकुमार Questions and Answers Summary.
Inter 2nd Year Hindi सुखी राजकुमार Questions and Answers
मूल्यांकन हेतु
अ. सुखी राजकुमार कहानी का सारांश लिखिए ।
जवाब.
सुखी राजकुमार “The Happy prince” प्रसिद्ध और हृदयस्पर्शी कहानी है। इसके कहानीकार आँस्कार वाइल्ड विश्वप्रसिद्ध अंग्रेजी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभाशाली है। यह कहानी निस्स्वार्थ प्रेम, त्याग, करुणा और मानवता” का संदेश देता हैं ।
इस कहानी का अनुवाद हिंदी में, जाने माने कवि और कहानीकार ‘सुशांत सुप्रिय’ हैं ।
कहानी की मुख्य भूमिका सुखी राजकुमार की प्रतिमा की है । वह नगर के एक ऊँचे स्तंभ पर स्थापित है । सुखी राजकुमार अपने जीवन में सभी सुख-सुविधाएँ भोगता है । शाक्यवंश के राजकुमार 1 सिद्धार्थ गौतम की तरह दुःख पीडा वह नहीं जानता । लेकिन मृत्यु के बाद राजकुमार उसकी मूर्ति के माध्यम समाज की पीड़ा, अन्याय, और स्वार्थपरता पहलीबार देखती है । उसका हृदय द्वीभूत होता है और करुणा से भर जाता है|
एक नन्ही गौरैया मिस्र देश की यात्रा के मार्ग में मूर्ति के यहाँ रुक जाती है । राजकुमार के दुःख को अपना दुःख मानती है । उसकी मदद करने रुक जाती है । राजकुमार दीन-दुःखियों की सहायता के लिए अपनी तलवार का माणिक नामक रत्न, अपने नेत्रद्वय नीलम नामक अमूल्य रत्नमय और अंत में अपने शरीर पर चढ़ा स्वर्ण-पत्र उतरवा देता है । वे इन सभी अमूल्य वस्तओं को दीन-हीन- दुःखियाँ में गौरैया द्वारा बँटवा देता है । गौरैया अपनी यात्रा छोड़कर अधिक ठंड, बर्फ और धूल-धूसर में राजकुमार के साथ रहती है । वह धीरे- धीरे बूढ़ी हो जाती है ।
राजकुमार और गौरैया दोनों कला विहीन होकर भद्दे दिखाते हैं। अंत में, ठंड से गौरैया मर जाती है और राजकुमार का जस्ते का दिल टूट जाता है । नगर के अधिकारी गण दोनो को निरुपयोग समझकर फेंक देता है । लेकिन परमात्मा उन्हें अमूल्य वस्तुएँ कहकर स्वर्ग में स्थान देता है ।
इस प्रकार, कहानीकार संदेश देते हैं कि सच्ची सुंदरता बाह्य अलंकरण में नहीं, बल्कि आंतरिक उदारता में होती है। आधुनिक मानव से पशु- . पक्षी ही ज्ञान-व-गुण से संपन्न होते हैं ।
आ. निम्नलिखित गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए ।
प्रश्न 1.
“फिर तुम रो क्यों रहे हो ?” पंख फड़फड़ाकर गौरैया ने कहा, “तुमने तो मुझे बिलकुल भिगो दिया है ।”
जवाब.
सामान्य संदर्भः प्रस्तुत उद्धरण, विश्व प्रसिद्ध अंग्रेजी कहानीकार ऑस्कार वाइल्ड में लिखित, ” सुखी राजकुमार’ (The Happy Prince), प्रसिद्ध हृदयस्पर्शी कहानी से लिया गया है |
निकटस्थ संदर्भ : एक नन्ही गौरैया मिस्र देश की यात्रा करती हुई ॐ मार्ग मध्य में ऊँचे स्तंभ पर स्थित सुखी राजकुमार की मूर्ति के पैरों के पाश सो रही है । सुखी राजकुमार के आँसू उस पर ढुलक रहे हैं । उस संदर्भ में नन्ही गौरैया सुखी राजकुमार से यह अवतरण कहती है ।
व्याख्या : नन्ही गौरैया पंख फड़फड़ाकर कह रही हैं, तुम तो सुखी राजकुमार हो । तुम तो लगातार आँसू क्यों बहा रहे हो। तुम्हारे आँसू के प्रवाह में मैं पूरी तरह भीग गई हूँ। तुम्हारे रोने का असली कारण क्या है ?
विशेषताएँ : इस अवतरण में नन्हीं गौरैया की सहानभूति और राजकुमार की दयार्थता दिग्दर्शक हैं । कहानीकार की काल्पनिक शक्ति अनुपम है । यह रूपक कहानी है। इस अवतरण में मानवीकरण अलंकार है ।
प्रश्न 2.
“मेरे स्वर्ग की डालों पर यह गौरैया सदा चहकेगी और मेरे उपवन में राजकुमार सदा विहार करेगा ।”
जवाब.
सामान्य संदर्भः प्रस्तुत उद्धरण, विश्व प्रसिद्ध अंग्रेजी कहानीकार ऑस्कार वाइल्ड में लिखित,” सुखी राजकुमार” (The Happy Prince), प्रसिद्ध हृदयस्पर्शी कहानी से लिया गया है ।
निकटस्थ संदर्भ : ये कहानी के अंतिम वाक्य हैं। ईश्वर के आज्ञानुसार देवदूत सुखी राजकुमार के जस्ते का दिल और गौरैया की लाश ले जाता है । तब ईश्वर कहता है कि बिलकुल ठीक ! उस संदर्भ में ईश्वर देवदूत से ये वाक्य कहते हैं ।
व्याख्या : सुखी राजकुमार सदा दीन-दुःखियों की सेवा में अपना तन- मन-धन सर्वस्व अर्पण करता है । यह सब नन्ही गौरैया के द्वारा संपन्न होता है। नन्ही गौरैया अपनी यात्रा रोककर ‘राजकुमार के साथ रहती है । वह राजकुमार के कहने के अनुसार दलित-पीडित लोगों की सेवा करती । राजकुमार के प्रति सहानुभूति प्रकट करती है । ये दोनों फिजूल चीजें नहीं है । वे अमूल्य वस्तुएँ है । इसलिए ईश्वर उन्हें स्वर्ग में स्थान देता है । गौरैया को स्वर्ग के उपवन में वृक्षपर रहने और राजकुमार को उपवन में बिहारकरने की सुविधा देता है ।
विशेषताएँ: जन की सेवा ही जनार्दन की सेवा है और बाहसुंदरता से आंतरिक उदारता बढ़कर है। इस अवतरण ये प्रतिबिंबित है । ईश्वर की इच्छा यही है । इस उद्धरण में कहानीकार कथा वाचन की चतुरता दिखाई देती है। सर्व धर्म शास्त्र का सार इसमें निहित है। कहानी का समापन अनुपम है । इस अवतरण की भाषा सरल और सुबोध है । इस अवतरण से कहानी सुखांत होती है ।
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इ. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त रूप में लिखिए ।
प्रश्न 1.
सुखी राजकुमार की प्रतिमा का वर्णन कीजिए ।
जवाब.
सुखी राजकुमार की प्रतिमा नगर में उत्तर की ओर ऊँचे से स्तंभ पर स्थापित थी । मूर्ति पर हलका स्वर्ग-पत्र मढ़ा था । आँखों के स्थान पर दो चमकीले नीलम थे । तलवार की मूठ में एक बड़ा-सालाल जड़ा था। मूर्ति अपनी सुनहली आवाज में गौरैया गौरए से बातचीत करती रहती थी ।
मूर्ति ने अपना तन-मन, धन सबकुछ दलित- पीड़ित जन को गैरैया द्वारा समर्पित किया था। वह थोडी शिथिल अवस्था में बदल गई । मेयर ने उसे हटवा दिया । देवदूत उसके दिल को स्वर्ग ले गया ।
प्रश्न 2.
नगर के मेयर और अधिकारियों ने प्रतिमा को क्यों हटाया ?
जवाब.
नगर के मेयर और अधिकारियों को प्रतिमा भद्दी लगी। वे सभी उल्लू थे सुरंत उसे हटा ली । उसके स्थान, वे अपनी मूर्ति रखने की स्वार्थपरता, मेयर सहित सभी अधिकारियों में थी । इसी उद्देश्य से नगर के मेयर और अधिकारियों ने प्रतिमा को हटाया ।
ई. सही विकल्प चुनकर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।
प्रश्न 1.
“सुखी राजकुमार” अंग्रेजी की किस कहानी का अनुवादित रूप है ?
अ) The Prince
आ) The Happy Prince
इ) The King
जवाब.
आ) The Happy Prince
प्रश्न 2.
नगर में ऊँचे स्तंभ पर किसकी प्रतिमा स्थापित थी ?
अ) सुखी राजकुमार की
आ) गाँधी जी की
इ) नेहरू जी की
जवाब.
अ) सुखी राजकुमार की
प्रश्न 3.
सुखी राजकुमार की सहायता किसने की ?
अ) शेर
आ) गौरैया
इ) मोर
जवाब.
आ) गौरैया
प्रश्न 4.
गौरैया कौन सा देश जाना चाहती है ?
अ) मित्र
आ) नेपाल
इ) श्रीलंका
जवाब.
अ) मित्र
प्रश्न 5.
राजकुमार की तलवार की मूठ में कौन-सा रत्न जड़ा था ?
अ) पुखराज
आ) लाल (रूबी)
इ) नीलम
जवाब.
आ) लाल (रूबी)
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सुखी राजकुमार Summary in Hindi
कवि परिचय
ऑस्कार वाइल्ड का जन्म 16 अक्तूबर 1854 को आयरलैंड के डबलिन सहर में हुआ। वे विश्व प्रसिद्ध अंग्रेजी कवि, साहित्यकार, नाटककार, उपन्यासकार और आलोचक थे । वे साहित्य को नए विचार, नई शैली और नवीन दृष्टि प्रदान करनेवाले महान लेखकों में एक थे। उनके रचनाओं में अद्वितीय सौंदर्यबोध, तीक्षणनुद्धि, व्यंग्य, हास्य और मानवीय संवेदनाएँ प्रतिबिंबित हैं । वे उच्च शिक्षित, प्रतिभावान, वाक् कलाकार और रचनात्मक विचारक हैं ।
‘द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे’ (उपन्यास), ‘द इंपॉर्टेन्स ऑफ़ बीइंग अर्नेस्ट’ (नाटक), ‘द हैप्पी. प्रिंस एंड अदर स्टोरीज़’ (कहानियाँ) आदि उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं ।
अनुवादक का परिचय
ऑस्कार वाइल्ड की सुप्रसिद्ध कहानी, ‘सुखी राजकुमार’ के हिंदी- अनुवादक ‘सुशांत सुप्रिय हैं। उन्होंने इस कहानी को सरल, भावपूर्ण और प्रभावशाली रूप में पाठकों तक पहुँचाया है ।
वे समकालीन हिंदी साहित्य के जाने-माने कवि और कथाकार हैं । हत्यारे और हे राम (कथा-संग्रह) और एक बूँद यह भी (काव्य संग्रह) प्रसिद्ध हैं । वे भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत भी हैं ।
पाठ का सारांश
सुखी राजकुमार “The Happy prince” प्रसिद्ध और हृदयस्पर्शी कहानी है । इसके कहानीकार आँस्कार वाइल्ड विश्वप्रसिद्ध अंग्रेजी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभाशाली है । यह कहानी निस्स्वार्थ प्रेम, त्याग, करुणा और मानवता’ का संदेश देता हैं ।
इस कहानी का अनुवाद हिंदी में, जाने माने कवि और कहानीकार ‘सुशांत सुप्रिय’ हैं ।
कहानी की मुख्य भूमिका सुखी राजकुमार की प्रतिमा की है। वह नगर के एक ऊँचे स्तंभ पर स्थापित है । सुखी राजकुमार अपने जीवन में सभी सुख-सुविधाएँ भोगता है। शाक्यवंश के राजकुमार सिद्धार्थ गौतम की तरह दुःख पीडा वह नहीं जानता । लेकिन मृत्यु के बाद राजकुमार उसकी मूर्ति के माध्यम समाज की पीड़ा, अन्याय, और स्वार्थपरता पहलीबार देखती है । उसका हृदय द्वीभूत होता है और करुणा से भर जाता है ।
एक नन्ही गौरैया मिस्र देश की यात्रा के मार्ग में मूर्ति के यहाँ रुक जाती है । राजकुमार के दुःख को अपना दुःख मानती है । उसकी मदद करने रुक जाती है । राजकुमार दीन-दुःखियों की सहायता के लिए अपनी तलवार का माणिक नामक रत्न, अपने नेत्रद्वय नीलम नामक अमूल्य रत्नमय और अंत में अपने शरीर पर चढ़ा स्वर्ण-पत्र उतरवा देता है । वे इन सभी अमूल्य वस्तओं को दीन-हीन- दुःखियाँ में गौरैया द्वारा बँटवा देता है। गौरैया अपनी यात्रा छोड़कर अधिक ठंड, बर्फ और धूल धूसर में राजकुमार के साथ रहती है । वह धीरे-धीरे बूढ़ी हो जाती है ।
राजकुमार और गौरैया दोनों कला विहीन होकर भद्दे दिखाते हैं । अंत में, ठंड से गौरैया मर जाती है और राजकुमार का जस्ते का दिल टूट जाता है | नगर के अधिकारी गण दोनो को निरुपयोग समझकर फेंक देता है । लेकिन परमात्मा उन्हें अमूल्य वस्तुएँ कहकर स्वर्ग में स्थान देता है ।
इसप्रकार, कहानीकार संदेश देते हैं कि सच्ची सुंदरता बाह्य अलंकरण में नहीं, बल्कि आंतरिक उदारता में होती है । आधुनिक मानव से पशु-पक्षी ही ज्ञान-व-गुण से संपन्न होते हैं ।
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सुखी राजकुमार Summary in English
Kushi Rajkumar (The Happy Prince) is a famous and ecstatic tale. Its story-write Oscarwild is the world famous all rounder in the English literature. The story conveys the message of selfless love sacrifice, compassion, and humanity.
The story has been beautifull translated in to Hindu by the well known poet and story writer ‘Sushanth Supriy’.
The main character of the story in the statue of Sukhi Rajkumar. It is installed on a high pillor. Sukhi Rajkumar enjoys all the comforts luxuries in his life. He does no the sufferings. But after death, his statue sees sorrow, pain, injustic and selfishness for the first time. His heart is illuminated and filled with compassion.
A tiny sparrow travels to Egypt and stays at the statue on the way for a while. It considers the Rajkumar’s sorrows as its own. It stays to help him. To help the poor and needy. Rajkumar removed redcoral from his sword, two blue sapphires from his the two eyes and a golden sheet from his body by the help of the sparrow and gives away all the wealth to the needy poor and suffers through the sparrow. It stops its travel, the sparrow stays at Rajkumar in the extreme cold, snow and dust. It becomes gradually old.
Rajkumar and the sparrow become shabby and ugly. Finally due to cold and snow the sparrow dies. Rajkumar’s heart breaks. The city officials dismisses the both as useless However the god gives place to Rajkumar and the sparrow in the heaven.
This, the story-teller conveys the message that true beauty lies not in external adornment, but in the inner generosity. The annimals and the birds are endowed with wisdom, intelligence and selflessness than the modern man.
सुखी राजकुमार Summary in Telugu
సుఖీరాజ్కుమార్ (The Happy Prince) సుప్రసిద్ధ హృదయాన్ని కదిలించే కథ. దీని రచయిత ఆస్కార్ వాయిల్డ్ విశ్వప్రసిద్ధ ఇంగ్లీష్ సాహితీవేత్త. ఈయన బహుముఖి ప్రజ్ఞావంతుడు. ఈ కథ నిస్వార్థ ప్రేమ, త్యాగం, కారుణ్యం, మానవత్వంతో కూడిన సందేశం ఇస్తుంది.
ఈ కథానువాదకుడు హిందీలో చేయి తిరిగిన కవి, కథకుడు, అయిన సుశాంత్ సుప్రియ్.
కథ మధ్య భూమిక సుఖీ రాజ్కుమార్ ప్రతిమ. అది నగరంలో ఎత్తైన స్తంభంపై అమర్చబడింది. సుఖీ రాజ్కుమార్ తన జీవితంలో అన్నీ సుఖాలు సౌకర్యాలే అనుభవించాడు. దుఃఖాలు-బాధలు అసలే ఎరుగడు. కాని తన చావు తరువాత, రాజ్కుమార్ తన విగ్రహం ద్వారా సమాజంలో ఉన్న దుఃఖం బాధలు, అన్యాయం, స్వార్థం మొదటిసారి చూశాడు. తన హృదయం ద్రవిస్తుంది. కారుణ్యంతో నిండిపోతుంది.
ఓ చిన్న పిచ్చుక ఈజిప్టు యాత్రకై వెళ్తూ మార్గమధ్యంలో రాజ్కుమార్ విగ్రహం దగ్గర ఆగుతుంది. ఈయన దుఃఖాన్ని తన దుఃఖముగా భావిస్తుంది. తనకు సాయం చేయటానికి అచటనే ఆగిపోతుంది. దళిత, పీడితులకు సహాయార్థం తన కరవాలంలో పొదిగిన మాణిక్యం రత్నం, తన రెండు కండ్లయిన నీలం రత్నాలు, చివరగా తన శరీరంపై తొడిగిన పల్చని బంగారు తొడుగు చిన్నారి పిచ్చుకతో ఒలిపిస్తాడు. అది ఈ అమూల్య వస్తువులన్నింటిని అన్నార్తులకు, నిస్సహాయులకు పంచి పెడ్తుంది. పిచ్చుక తన యాత్రను వదిలేసి అత్యధిక చలి, మంచు, దుమ్ము, ధూళిలో రాజ్కుమార్ విగ్రహంతోనే ఉంటుంది. క్రమక్రమంగా అది వృద్ధురాలవుతుంది.
రాజ్కుమార్, పిచ్చుక రెండు కళావిహీనమై కురూపులుగా కన్పడు తుంటాయి. చివరకు పిచ్చుక చలికి చచ్చిపోతుంది. రాజ్కుమార్ తగరపు హృదయం బ్రద్దలౌతుంది. నగరం అధికారులు వీటి వ్యర్థంగా భావించి చెత్త బుట్టలో విసిరేస్తారు. కాని భగవంతుడు వాటిని అమూల్యంగా భావించి వాటికి స్వర్గంలో స్థానం ఇస్తాడు.
ఈవిధంగా, నిజమైన సౌందర్యం బాహ్య అలంకరణలో ఉండదని, అసలైన ఆంతరిక ఔదార్యంలో ఉంటుందని కథారచయిత సందేశం ఇస్తాడు. ఆధునిక మానవుని కంటే పశుపక్షులే జ్ఞానం, వివేకం, సుగుణాలతో అలరారుతున్నాయి.
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सुखी राजकुमार कठिन शब्दार्थ
स्वर्णपत्र = सोने की पतली परत, బంగారపు సన్నని రేకు / పొర
मढ़ना = जड़ना, सटाना, चिपकाना, మలచుట,చుట్టుట
नीलम = नीले रंग की कीमती रत्न, నీలంరాయి
मूठ = मुट्ठी, పిడి
स्तंभासन = स्तंभ पर स्थित, స్తంభం పై నిలబెట్టుట / అమర్చుట
लाल = माणिक नामक रत्न, మాణిక్యం
जड़ना = ठोंक ठाककर नियत स्थान पर बिठाना, చెక్కుట, ఖచితము చేయుట
ताजुब्ब = आश्चर्य, अचरज, ఆశ్చర్యం
डबडबाना = आँखों में आँशू भर जाना, కళ్ళల్లో కన్నీరు ఉబికి కారటం
ढुलकना = लुढ़कना, नीचे की ओर बहना, దొర్లుట, కారుట
फड़फड़ाना = फड़फड़ ध्वनि उत्पन्नकरना, పడపడమని కొట్టుకొనే ధ్వని చేయటం
गौरैया = चिड़ी, పిచ్చుక
इज़ाजत = अनुमति, అనుమతి
प्राचीर = प्राकार, चहार दीवारी, ప్రహారీ గోడ
जस्ता = मटमैले रंग का धातु, తగరం
चौकी = चार पायोंवाला लकडी का आसन, పీట
क्षत-विक्षत = घावों से भरा हुआ, గాయాలతో నిండిన
नृत्य वसन = नृत्य- वस्त्र, నృత్యవస్త్రము
कांढ़ना = बेलबूटे बनाना, వస్త్రం పై పువ్వులు, లతలు కుట్టటం
मकबरा = समाधि, సమాధి
ताबूत = शव पेटी, సేవ పేటిక
पुखराज = पीला कीमती रत्न, పుష్య రాగం
ढेला = मिट्टी पत्थर आदि का टुकड़ा, మట్టి బెడ్డ, రాతి ముక్క
गिरजाघर = ईसाइयों का प्रार्धना मंदिर, చర్చ్
छज्जा = दीवार से बाहर निकली हुई छत का भाव, बारजा, గోడ నుండి బయటకు వ్యాపించి యుండు నీరు, కప్పు పై భాగము
किशोरी = युवती, యువతి
भावोन्मेष = भावों का उदय, భావాలు ఉదయించటం
कढ़वाना = बेल-बूढे बनाना, అద్దకపు పనులు చేయటం, అల్లికల్లలటం
फुदकरना = उछलते हुए चलना, గంతులేస్తూ వెళ్ళటం
सिरहाना = सोते समय तकिया रखने का स्थान, పడకపై తలయుంచుకొనుచోటు
सीली हुई कोठरी = नमी से विकृत छोटा कमरा నెమ్ముతో వికృతముగా ఉన్న చిన్న గది
तरुण = नवजवान, नवयुवक, నవ యువకుడు
अँगीठी = हाथ सेंकने / खाना पकाने का साधन, కుంపటి, కొలిమి
प्रपात = झरना, సెలయేరు, జలపాతం
नरकुल = नरकट, नरकल, बेंत की जाति का प्रसिद्ध पौधा, పేకబెత్తం మొక్క
दरियाई घोड़ा = गैंडे की तरह का जानवर जो जलाशयो में रहता है, నీటి గుర్రం
भोर का तारा = शुक्रतारा, శుక్ర నక్షత్రం
छेंद = बिल, सूएख, బిలము, కన్నము
मोल आँकना = मूल्य लगाना, విలువ అంచనా వేయటం
बंदरगाह = समुद्र के किनारे जहाज ठहरने का स्थान, ఓడరేవు
मस्तूल = जहाज का स्तंभ, ఓడస్తంభం
जाड़ा = शीतकाल, सरदी, శీతాకాలం, చలికాలం
मित्र = ईजिप्ट, ఈజిప్టు
सौदा = खरीदी गई चीजें, కొన్న సరుకు
काँच = शीशा, గాజు
रंगरलियाँ = मौज-मस्ती, భోగ విలాసాలు
जरद / जर्द = पीले रंग का, పసుపు పచ్చని
पुलिया = छोटापुल, చిన్న వంతెన
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मनहूस = दिवंगत, मराहुआ, దివంగతం, చనిపోయిన
पाला पड़ना = बुरी तरह नष्ट हो जाना, పనికి రాకుండా నాశనమవటం
छज्जा = घर की बाहर निकली छत, గోడపై కప్పు / చూరు
अलविदा = अच्छा अब विदा होते है, विदाई, ఇక, సెలవు
चटख जाना = ‘चट’ शब्द करके टूटना, పట్టు పోవటం / జారిపోవటం
गजब = विपत्ति संकट విపత్తు, సంకటస్థితి
भद्दी लगना = कुरूप या खराब लगना, అందవిహీనంగా కన్పడుట
कूडेखाना = कूदेदान, చెత్త కుండి