मुरझाया फूल Questions and Answers Summary Inter 1st Year Hindi

Andhra Pradesh BIEAP AP Inter 1st Year Hindi Study Material पद्य भाग 3rd Poem मुरझाया फूल Questions and Answers Summary.

Inter 1st Year Hindi मुरझाया फूल Questions and Answers

अभ्यास

I. “मुरझाया फूल” कविता का सारांश लिखिए ।

कवि परिचय : ” आधुनिक युग की मीरा” के नाम से विख्यात श्रीमती महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 में उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध नगर फर्रुखाबाद में हुआ था | महादेवी वर्मा ī मूलतः छायावादी कवयित्री रही हैं | उनकी ” यामा” कविता संग्रह पर ज्ञानपीठ पुरस्कार तथा उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा ‘“भारत-भारती” पुरस्कार से सम्मानित किया गया था । भारत सरकार ने 1956 में उन्हें पद्मभूषण की उपाधि से अलंकृत किया । महादेवी जी स्वर्गवास 80 वर्ष की अवस्था में 11 सितम्बर 1987 को हुई ।

सारांश : महादेवी वर्मा जी ने प्रस्तुत कविता में एक मुरझाये फूल से मानव जीवन की तुलना की है। जिस प्रकार कली से लेकर खिले फूल तक, फूल सबका ध्यान अपनी ओर खींचता है। मधु पान हेतु जिस तरह सभी भौरे उसकी चारों और मँडराने लगते है। ठीक उसी प्रकार मनुष्य जीवन में शैशव काल से युवा काल तक लोग एक दूसरे से मिल जुल कर रहते है तथा विभिन्न क्षेत्रों में एक दूसरे का साथ देते है । जब फूल मुरझाने लगता है तो उसके पास कोई नही आता उसी तरह मनुष्य बुढ़ापे में कदम रखता है । बुढापा छाते ही समाज या घरेलू सदस्यों का आदर कम होने लगता है ।

कवयित्री मुरझाये फूल से कहती है कि हे सूखे सुमन, जब तुम कली के रूप मे थी तब हवा तुम को अपनी गोद में लेकर खेलती थी, चन्द्र भी अपनी प्रेम पूर्ण किरणें तुम पर बरसाता था । जब तुम एक सुन्दर पुष्प बन गए हो, तुम से शहद लेने भ्रमर तुम्हारें चारों ओर मण्डराने लगे । वनमाली भी तुमको खुश रखने का प्रयत्न करता था । उस समय तुम बडे आनंद स गर्व में थे। इस अंतिम काल के बारे में तुमने स्वप्न में भी नही सोचा होगा ।

हे सुखे सुमन, अब तुम मुरझा गये हो। तुम्हारी कोमलता और सुगंध अब नहीं रही । तुमने अपना सर्वस्य दान कर दिया था। सबको खुश भी किया था । तुम्हारी बुरी हालत पर दुनियाँ दुःख और सहानुभूति भी नहीं दिखा रही है, तो हम जैसे सधारण मानव पर कौन सहानुभूति दिखाएगा

II. निम्न लिखित पद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए ।

प्रश्न 1.
था कली के शैशव में अहो सूखे सुमन,
हास्य करता था, खिलाती अंक मं तुझको पवन ।
खिल गया जब पूर्ण तुम मंजुल सुकोमल पुष्पवनु,
लुब्ध मधु के हेतु मँडराने लगे आके भ्रमर ||
उत्तर:
प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ “मुरझाये फूल” नामक कविता के लिया गया हैं । कवयित्री महादेवी वर्मा जी है ।

कवि परिचय : महादेवी वर्मा छायावाद की प्रमुख कवयित्री है। महादेवी वर्मा ने गद्य और पद्य दोनों शैलियों में साहित्य की रचना की है। उनकी काव्य भाषा संस्कृत-निष्ठ खडीबाली है, जो कोमलता, मधुरता, गेयता आदि गुणों से संपन्न है ।

संदर्भ : प्रकृति किस प्रकार खिले फूल के प्रति अपना योगदान देती है उसका वर्णन है ।

व्याख्या : कवयित्री मुरझाये फूल से कहती है कि हे सुखे सुमन, जब तुम कली के रूप में थी तब हवा तुम को अपनी गोद में लेकर खेलती थी । चन्द्र भी अपनी प्रेम पूर्ण किरणों तुम पर बरसाता था । जब तुम एक सुन्दर पुष्प बन गए हो, तुम से शहद लेने भ्रमर तुम्हारे चारों ओर मण्डराने लगे ।

मुरझाया फूल Questions and Answers Summary Inter 1st Year Hindi

प्रश्न 2.
कर दिया मधु और सौरभ दान सारा एक दिन,
किन्तु रोता कौन है, तेरे लिए दानी सुमन !
मत व्यथित हो फूल ! किसको सुख दिया संसार ने ?
स्वार्थमय सबको बनाया यहाँ करतार ने ॥
उत्तर:
प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ “मुरझाये फूल” नामक कविता के लिया गया हैं। कवयित्री महादेवी वर्मा जी है।

कवि परिचय : महादेवी वर्मा छायावाद की प्रमुख कवयित्री है। महादेवी वर्मा ने गद्य और पद्य दोनों शैलियों में साहित्य की रचना की है। उनकी काव्य भाषा संस्कृत-निष्ठ खडीबाली है, जो कोमलता, मधुरता, गेयता आदि गुणों से संपन्न है ।

संदर्भ : कवयित्री के अनुसार इस संसार में विधाता ने सबको स्वार्थमय ही बनाया है। इस संदर्भ में कहा गया है।

भाव: हे सूखे सुमन, अब तुम मुरझा गये हो। तुम्हारी कोमलता और सुगंध अब नही रही । तुमने अपना सर्वस्व दान कर दिया था। सबको खुश भी किया था। लेकिन मुरझाये फूल पर सहानुभूति दिखाने वाला कोई नही है ।

III. सही उत्तर चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए ।

  1. महादेवी वर्मा का जन्म …… में हुआ । (फर्रुखाबाद / नई दिल्ली)
  2. महादेवी वर्मा जी को …………… रचना पर ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ। (चिदंबरा / यामा)
  3. ……. की स्निग्ध किरणें फूलों को हँसाती हैं । (सूरज / चंद्र)
  4. पवन के झोंके फूल को ……. पर गिराती हैं । (पृथ्वी / आकाश)
  5. करतार न धरती पर सबको ……….. बनाया है । (निस्वार्थ / स्वार्थमय)

उत्तर:

  1. फर्रुखाबाद,
  2. यामा,
  3. चंद्र,
  4. पृथ्वी,
  5. स्वार्थमय

मुरझाया फूल Summary in Hindi

कवि परिचय

श्रीमती महादेवी वर्मा जी का जन्म 26 मार्च, 1907 में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में एक सम्पन्न परिवार में हुआ। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा इन्दौर में हुई। प्रयाग विश्व विद्यालय से बी. ए. तथा संस्कृत में एम.ए. की उपाधि प्राप्त कर उसी विद्यापीठ की प्रधानाचार्य के पद पर नियुक्त हुई ।

सन् 1983 में उन्हें “यामा” कविता संग्रह पर ज्ञानपीठ पुरस्कार तथा उत्तरप्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा “भारत-भारती” पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। भारत सरकार ने 1956 में उन्हें पद्मभूषण की उपाधि से अलंकृत किया । छायावादी काव्यधारा की चार प्रमुख विभूतियों में कवित्री महादेवी वर्मा प्रमुख हैं । महादेवी वर्मा ने गद्य और पद्य दोनों शैलियों में साहित्य रचना की है। उनकी काव्य भाषा ब्रज और खडीबोली था ।

उनकी प्रमुख रचनाओं में नीहार, रश्मि, सांद्यगीत, नीरजा, दीपशिखा, स्मृति की रेखाएँ, अतीत के चलचित्र, पथ के साथी, मेरा परिवार, श्रृंखला की कड़ियाँ आदि । उनकी मुत्यु 11-09-1987 में हुई ।

सारांश

महादेवी वर्मा जी ने प्रस्तुत कविता में एक मुरझाये फूल से मानव जीवन की तुलना की है। जिस प्रकार कली से लेकर खिले फूल तक, फूल सब का ध्यान अपनी ओर खींचता हैं। मधु पान हेतु जिस तरह सभी भौरे उसकी चारों और मँडराने लगते हैं। ठीक उसी प्रकार मनुष्य जीवन में शैशव काल से युवा काल तक लोग एक दूसरे से मिल जुल कर रहते है तथा विभिन्न क्षेत्रों में एक दूसरे का साथ देते है । जब फूल मुरझाने लगता है तो उसके पास कोई नही आता उसी तरह मनुष्य बुढापे में कदम रखता हैं । बुढापा छाते ही समाज या घरेलू सदस्यों का आदर कम होने लगता है ।

कवयित्री मुरझाये फूल से कहती है कि हे सूखे सुमन, जब तुम कली के रूप में थी तब हवा तुम को अपनी गोद में लेकर खेलती थी, चन्द्र भी अपनी प्रेम पूर्ण किरणें तुम पर बरसाता था। जब तुम एक सुन्दर पुष्प बन गए हो, तुम से शहद लेने भ्रमर तुम्हारें चारों ओर मण्डराने लगे । वनमाली भी तुमको खुश रखने का प्रयत्न करता था । उस समय तुम बडे आनंद से गर्व में थे । इस अंतिम काल के बारे में तुमने स्वप्न में भी नही सोचा होगा ।

हे सूखे सुमन, अब तुम मुरझा गये हो। तुम्हारी कोमलता और सुगंध अब नहीं रही । तुमने अपना सर्वस्य दान कर दिया था । सबको खुश भी किया था । तुम्हारी बुरी हालत पर दुनियाँ दुःख और सहानुभूति भी नहीं दिखा रही है, तो हम जैसे साधारण मानव पर कौन सहानुभूति दिखाएगा ।

मुरझाया फूल Questions and Answers Summary Inter 1st Year Hindi

मुरझाया फूल Summary in English

In the present poem, Mahadevi Varmaji compared Human life to a withered flower. Just as the flower attracts everyone’s attention from the bud to the blooming flower, just as bumble bees start hovering around it to drink nectar, in the same way in human life, from infancy to youth, people live together and support each other in various fields. When a flower starts withering, no one comes to it. Similarly, a man enters old age, at that stage the respect of societies or family members start decreasing.

The poetess says to the withered flower, “oh ! Dried flower, when you were in the form of a bud, the wind used to play with you in its lap. The moon also used to shower its loving rays on you. When you have become a beautiful flower, the bees started hovering around you to take honey from you. The gardener also tried to keep you happy.

At that time you were very happy and proud. You would not have thought about this final period even in your dreams. Oh, dried flower! you have now withered your tenderness and fragrance are no more. You had donated everything you had. You had made everyone happy. If the world is not showing sorrow or sympathy on your bad condition, then who will show sympathy to ordinary humans like us ?”

मुरझाया फूल Summary in Telugu

ఈ కవితలో మహాదేవి వర్మగారు మానవ జీవితాన్ని వాడిన పుష్పంతో పోల్చినారు. ఏవిధంగా మొగ్గ నుండి పుష్పించిన పుష్పం వరకు పుష్పం అందరి దృష్టిని తనవైపు ఆకర్షిస్తుందో, ఏవిధంగా భ్రమరాలు మధుపానం కోసం పుష్పం చుట్టూ తిరుగుతాయో, అదే విధంగా మాన జీవనంలో శైశవం నుండి యవ్వనం వరకు ప్రజలు ఒకరికొకరు కలిసి ఉంటారు. వివిధ రంగాలలో ఒకరికొకరు సహకరించుకొంటారు. పుష్పం వాడిపోయినపుడు ఎవరూ దరికి చేరరో అదే విధంగా మనిషి ముసలివాడైనపుడు సమాజంగాని, కుటుంబ సభ్యుల ఆదరణగాని క్షీణిస్తుంది.

కవయిత్రి వాడిపోయిన పుష్పంతో ఈ విధంగా చెబుతుంది – ఓ వాడిన పువ్వా ! నీవు మొగ్గగా ఉన్నప్పుడు గాలి తన ఒడిలో నిన్ను ఆడించేది. చందమామ తన ప్రియమైన కిరణాలను నీ పై వర్షించేది. నీవు వికసించిన పువ్వు అయినప్పుడు నీ నుండి మకరందం గ్రోలటానికి నీ చుట్టూ భ్రమరాలు చక్కర్లు కొట్టేవి. తోటమాలి నిన్ను ఆదరించేవాడు. తత్సమయాన నీవు మహదానందంలో గర్వంగా విర్రవీగేదానివి. ఈ అంతిమ సమయం గురించి స్వప్నంలో కూడా నీవు ఊహించి ఉండవు.

ఓ వాడిన పుష్పమా ! నీవిప్పుడు వాడిపోయావు. నీ కోమలత్వం, పరిమళం ఇప్పుడు లేవు. నీ సర్వస్వం దానం చేశావు. అందరిని అలరించావు. నీ దీనావస్థపై ప్రపంచం విచారం, సానుభూతి వెళ్ళబుచ్చనప్పుడు, మాలాంటి సాధారణ మనుషులపై ఎవరు సానుభూతి చూపుతారు ?

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मुरझाया फूल कठिन शब्दार्थ

1. शैशव = शिशु अवस्था, बचपन, బాల్యం
2. अंक = गोद, ఒడి
3. मंजुल = सुंदर, मनोहर, అందమైన
4. लुब्ध = ललचाया हुआ, అత్యాశపూరితమైన
5. स्निग्ध = सुंदर, అందమైన
6. अठखेलियाँ करना = मौज मनाना, क्रीड़ा करना, మస్తీచేయు, ఆటలాడు
7. इतराना = गर्व से ऐंठना, ప్రగల్భాలు పలకడం, గర్వపడటం
8. धाता नहीं = दौड़ कर आता नहीं, పరుగెత్తుకొని రాదు
9. करतार = सृष्टिकर्ता, సృష్టించువాడు, బ్రహ్మ
10. भू = जमीन, భూమి
11. निस्सार = बेकार, सारहीन, నిస్సారమైన, పనికిరాని

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