Andhra Pradesh BIEAP AP Inter 1st Year Hindi Study Material उपवाचक 3rd Lesson विष कन्या Questions and Answers Summary.
Inter 1st Year Hindi विष कन्या Questions and Answers
अभ्यास
प्रश्न 1.
“ विषकन्या” एकांकी का सारांश लिखिए ।
उत्तर:
राजा चंद्र विजय ने शत्रु को परास्त कर उसके दुर्ग पर अधिकार कर लिया। राजा ज्योंही विश्राम करने शय्या पर लेटते हैं तो उसी पलंग के नीचे लेटी रूपवती कन्या दिखाई पडती हैं जो अपने को पराजित राजा की राजकुमारी अपराजिता बताती है। लेकिन वह विषकन्या है ।
राजा चंद्रविजय उसके रूप सौंदर्य के मोहजाल में फँस जाता है और उसे अपनी अर्धागिनी बनाना चाहती है । ज्योंही राजा चंद्रविजय अपराजिता को अपनी ओर खींचने लगता हैं, त्योंही आपातकाल की सूचक सन्निपात भेरी बजने लगती हैं। राजा सेना के पास जाने को उद्यत होता है कि अपराजिता उसे जाने से रोक देती हैं। तभी दोनों सेनापति आते हैं और राजा को रास – लीला में निमग्न देखकर उसे प्रताड़ना देते है ।
राजा अपने कर्तव्य के प्रति सजग होकर खड्ग उठा लेता है। अपराजिता भी जब उसके साथ चलने का आग्रह करती है तो वह आवेश में आकर उसके पेट में खड्ग भोंक देता हैं। फिर भी उसे चूमने के लिए उसकी ओर मुँह बढ़ाता है कि सेनापति की खाँसी सुनकर चौंक पडता हैं । उसको देखकर कहता हैं – कौन सेनापति मैं विष का ग्रास हो गया था। यह विषकन्या हैं ? तुमने ही मेरे प्राण बचाए ? तभी सन्निपात की भेरी फिर बज उठती हैं। राजा चंद्रविजय तलवार उठाकर बाहर को दौडता हैं । दोनों सेनापति “महाराज चंद्रविजय की जय’ का उद्घोष करते हुए उसका अनुसरण करते हैं । इसका संदेश यह है कि राष्ट्रहित ही सर्वोपरि है ।
![]()
विष कन्या Summary in Hindi
एकांकीकार का परिचय
पंडित गोविंद वल्लभ पंत नाटक कला के ही नहीं बल्कि अभिनय कला के भी अच्छे ज्ञाता थे। उनका जन्म 10 सितंबर 1887 को अल्मोडा जिले के छोटे से पर्वतीय गाँव खूंट में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री मनोरथ पंत था । वे गडवाल जिले में एक राजकीय कर्मचारी थे। श्री मनोरथ पंत की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने का कारण वे अपने परिवार को अपने साथ नहीं रख सकते थे ।
श्री गोविंद वल्लभ पंत एक मेधावी छात्र थे। 18 वर्ष की अवस्था में ही उन्होंने सेंट्रल कालेज, इलाहाबाद में प्रवेश कर लिया। फरवरी 1907 में इलाहाबाद में आयोजित सभा में गोपालकृष्ण गोखले के क्रांतिकारी भाषण से वे प्रभावित हुए । उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विधि परीक्षा में सर्वोच्च अंकों से उत्तीर्ण हुए। सन् 1926 में काकू खांड के देश भक्तों पर मुकदमा चलाया गया । तब गोविंद वल्लभ पंत ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता के रूप में निर्भीकता और देश प्रेम का परिचय दिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्य मंत्री के रूप में सुचारू रूप से कार्य किया था ।
पंत जी संसद की राजभाषा समिति के अध्यक्ष भी रहे। 1957 में पंत जी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था । उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ वरमाला, कंजूस की खोपडी, राजमुकुट, अंगूर की बेटी आदि हैं।
सारांश
राजा चंद्र विजय ने शत्रु को परास्त कर उसके दुर्ग पर अधिकार कर लिया। राजा ज्योंही विश्राम करने शय्या पर लेटते हैं तो उसी पलंग के नीचे लेटी रूपवती कन्या दिखाई पड़ती हैं जो अपने को पराजित राजा की राजकुमारी अपराजिता बताती है। लेकिन वह विषकन्या है ।
राजा चंद्रविजय उसके रूप सौंदर्य के मोहजाल में फँस जाता है और उसे अपनी अर्धागिनी बनाना चाहती है। ज्योंही राजा चंद्रविजय अपराजिता को अपनी ओर खींचने लगता हैं, त्योंही आपातकाल की सूचक सन्निपात भेरी बजने लगती हैं। राजा सेना के पास जाने को उद्यत होता है कि अपराजिता उसे जाने से रोक देती हैं। तभी दोनों सेनापति आते हैं और राजा को रास लीला में निमग्न देखकर उसे प्रताड़ना देते है |
राजा अपने कर्तव्य के प्रति सजग होकर खड्ग उठा लेता है। अपराजिता भी जब उसके साथ चलने का आग्रह करती है तो वह आवेश में आकर उसके पेट में खड्ग भोंक देता हैं। फिर भी उसे चूमने के लिए उसकी ओर मुँह बढ़ाता हैं कि सेनापति की खाँसी सुनकर चौंक पडता है। उसको देखकर कहता हैं- कौन सेनापति, मैं विष का ग्रास हो गया था। यह विषकन्या हैं ? तुमने ही मेरे प्राण बचाए ? तभी सन्निपात की भेरी फिर बज उठती हैं। राजा चंद्रविजय तलवार उठाकर बाहर को दौडता हैं। दोनों सेनापति “महाराज चंद्रविजय की जय’ का उद्घोष करते हुए उसका अनुसरण करते हैं। इसका संदेश यह है कि राष्ट्रहित ही सर्वोपरि है ।
विष कन्या Summary in English
King Chandra Vijay defeated the enemy and captured his fort. As soon as the king lay down on the bed to rest, he saw a beautiful girl lying under the bed, who introduced herself as the princess of the defeated king, Aparajita. But she is a poisonous girl.
King Chandra Vijay gets enchanted by her beauty and wants to make her his wife. As soon as king Chandra Vijay starts pulling Aparajita towards him, the drums of emergency start beating. The king is ready to go to the army, but Aparajita stops him from going. Then both of the army chiefs come and seeing the king engrossed in Raasleela i.e., engaged enjoyment in the company of Aparajita, they harass him.
The king conscious of his duty, picks up his sword. When Aparajita also insists on going with him, he gets angry and stabs her in the stomach. Even then he turns towards her to kiss her, but he is startled to hear the commander coughing. Seeing he asked the commander, was I poisoned ? Is this the poisoned girl ? Did you save my life? Just then, the emergency drum-beating is heard. King Chandra Vijay picks up his sword and runs outside. Both the commanders follow him shouting ‘Maharaj Chandra Vijay ki Jai’ (triumphal cheers). Its message is that national interest is paramount.
![]()
विष कन्या Summary in Telugu
రాజు చంద్రవిజయ్ శత్రువును ఓడించి తన కోటను స్వాధీనం చేసుకున్నాడు. రాజు విశ్రాంతి తీసుకోవడానికి మంచం మీద పడుకున్న వెంటనే, మంచం కింద ఒక అందమైన అమ్మాయి పడుకొని ఉండటం చూశాడు, ఆమె తనను తాను ఓడిపోయిన రాజు యొక్క యువరాణిగా పరిచయం చేసుకుంది. ఆమె పేరు అపరాజిత. కానీ ఆమె విషపూరితమైన అమ్మాయి.
ఆమె అందానికి మంత్రముగ్ధుడైన రాజు చంద్రవిజయ్ ఆమెను తన భార్యగా చేసుకోవాలనుకుంటాడు. రాజు చంద్రవిజయ్ అపరాజితను తన వైపుకు లాగడం ప్రారంభించిన వెంటనే, అత్యవసర ఢంకా మోగి, కొట్టడం ప్రారంభించింది. రాజు సైన్యం లోకి వెళ్ళడానికి సిద్ధంగా ఉన్నాడు. కానీ అపరాజిత అతన్ని వెళ్ళకుండా ఆపింది. అప్పుడు సైన్యాధిపతులు ఇద్దరూ వచ్చి రాజు రాసలీలలో మునిగిపోవడం అంటే అపరాజిత సహవాసంలో ఆనందించడం చూసి, వారు అతన్ని వేధించారు.
తన విధిని గ్రహించిన రాజు, తన కత్తిని తీసుకున్నాడు. అపరాజిత కూడా తనతో వెళ్ళాలని పట్టుబట్టినప్పుడు, అతను కోపంగా ఆమె కడుపులో పొడిచాడు. అయినప్పటికి అతను ఆమెను ముద్దు పెట్టుకోవడానికి ఆమె వైపు తిరిగాడు, కాని కమాండర్ దగ్గుతున్నట్లు విని అతను ఆశ్చర్యపోయాడు. అప్పుడు అతను ఆ కమాండర్ను చూసి, నేను విషం తాగానా ? ఇది విషం తాగిన అమ్మాయినా ?
నువ్వు నా ప్రాణాన్ని కాపాడావా ? అని అడుగుతుంటే, అప్పుడే అత్యవసర ఢంకా మ్రోగడం వినిపించింది. చంద్రవిజయ్ రాజు కత్తి తీసుకుని బయటకు పరిగెత్తాడు. ఇద్దరు కమాండర్లు అతనిని అనుసరించి ‘మహారాజు చంద్రవిజయ్కి జై’ ! (విజయోత్సాహం) అని అరుస్తున్నారు. రాజ్యహితమే, దేశహితమే అన్నిటికంటే ముఖ్యం అనే సందేశం ఇది ఇస్తుంది.