AP 9th Class Hindi Sparsh 8th Lesson Questions and Answers गीत-अगीत

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गीत-अगीत AP 9th Class Hindi Sparsh 8th Lesson Questions and Answers

प्रश्न-अभ्यास :

1. निम्न लिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

प्रश्न क.
नदी का किनारों से कुछ कहते हुए बह जाने पर गुलाब क्या सोच रहा है? इससे संबंधित पंक्तियों को
लिखिए।
उत्तर:
नदी का किनारों से कुछ कहते हुए बह जाने पर गुलाब सोचने लगता है कि, यदि भगवान उसे बोलने
की शक्ति दी होती तो, वह भी अपने सपनों के गीत सुनाता ।
देते स्वर यदि मुझे विधाता,
अपने पतझर के सपनों का
मैं भी जग को गीत सुनाता।

प्रश्न ख.
जब शुक गाता है, तो शुकी के हृदय पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
जब शुक गाता है तो शुकी का मन प्रसन्नता से फूल जाता है। वह उसके प्रेम में मग्न हो जाती है। उसके पंख फूल जाते हैं। उसके मन में स्नेह के गीत उमडते हैं। वह गा नहीं पाती।

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प्रश्न ग.
प्रेमी जब गीत गाता है, तब प्रेमिका की क्या इच्छा होती है?
उत्तर:
प्रेमी जब गीत गाता है, तब प्रेमिका की इच्छा होती है कि, वह उस गीत का हिस्सा क्यों नहीं बनती। वह छिप छिपकर अपने प्रेमी का गाना सुनती है। उसे प्रेमी के साथ मिलकर गीत गाने की इच्छा होती है।

प्रश्न घ.
प्रथम छंद में वर्णित प्रकृति चित्रण को लिखिए।
उत्तर:
प्रथम छंद में नदी एवं गुलाब का प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण किया गया है। नदी विरह के गीत गाते हुए तेज़ी से बह रही है। वह अपना दुःख कम करने के लिए किनारों से कुछ कहती हुई बहती जा रही है। गुलाब किनारे पर चुप-चाप खडा है। वह अपने मन में सोच रहा है कि, यदि भगवान ने उसे बोलने की शक्ति दी होती तो, वह भी पूरी दुनिया को अपने सपनों के गीत सुनाता ।

प्रश्न ङ.
प्रकृति के साथ पशु – पक्षियों के संबंध की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
प्रकृति के साथ पशु-पक्षियों का गहरा संबंध है। पशु पक्षी अपना भोजन एवं आवास के लिए प्रकृति पर ही निर्भर करते हैं। शुक और शुकी पेड़ पर अपना घोंसला बनाकर रह रहे हैं। शुकी घोंसले में अंडे सेंकती है। शुक का स्वर पूरे वातावरण में गूँज रहा है।

प्रश्न च.
मनुष्य को प्रकृति किस रूप में आंदोलित करती है? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
मनुष्य को प्रकृति अनेक रूपों में आंदोलित करती हैं। मनुष्य जब नदी को कल कल बहते हुए देखता है तो, वह उसके संगीत में खो जाता है। गुलाब की सुंदरता और घनी छाँव मनुष्य के हृदय को आनंदित करते हैं। पशु पक्षियों का रूप एवं उनकी मधुर आवाजें मन को लुभाती हैं।

प्रश्न छ.
सभी कुछ गीत है, अगीत कुछ नहीं होता। कुछ अगीत भी होता है क्या ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
गीत शब्दों की मधुर अभिव्यक्ति है। अगीत को गीत की पूर्व स्थिति कह सकते हैं। अगीत में विचार मन के अंदर होते हैं। वे बाहर नहीं आते। अगीत किसी भी क्षण गीत का रूप ले सकता है। मन की भावनाओं को स्वर न मिले तो वह अगीत कहलाता है। मन की भावनाओं को स्वर मिल जाए तो वह गीत का रूप लेता है।

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प्रश्न ज.
‘गीत अगीत’ के केंद्रीय भाव को लिखिए।
उत्तर:
‘गीत अगीत’ कविता में प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण है। इसमें पशु पक्षियों का प्रेम और मनुष्य का प्रकृति के साथ संबंध बताया गया है। इस कविता में नदी, गुलाब, किनारों के माध्यम से प्राकृतिक सौंदर्य, शुक शुकी के माध्यम से जीव-जंतुओं में प्रेमभाव का चित्रण किया गया है। कविता में मुखरित और मौन दोनों अभिव्यक्तियों को सुंदर बताया गया है । गीत सुनने में अच्छा लगता है। साथ साथ अगीत की -अनुभूति भी अच्छी लगती है। आल्हा गीत गाता ग्वाला, उसकी प्रेमिका के माध्यम से मानवीय राग का चित्रण किया गया है।

2. संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए –

क) अपने पतझर के सपनों का
मैं भी जग को गीत सुनाता
उत्तर:
ये काव्य पंक्तियाँ गीत – अगीत कविता पाठ से दी गई हैं। इस कविता के कवि श्री रामधारी सिंहदिनकर हैं। इन पंक्तियों में गुलाब की व्यथा वर्णित है। ‘नदी गीत गाते हुए और किनारों से बातें करते हुए आगे बढ़ती है। गुलाब मौन खडा सोचता है। यदि भगवान उसे बोलने की शक्ति दी होती तो वह दुनिया को अपने सपनों के बारे में गा सुनाता । पतझड की व्यथा को सुना पाता है।

ख) गाता शुक जब किरण वसंती
छूती अंग पर्ण से छनकर
उत्तर:
ये काव्य पंक्तियाँ गीत- अगीत कविता पाठ से दी गई हैं। इस कविता के कवि श्री रामधारी सिंह दिनकर हैं। इन पंक्तियों में शुक और शुकी के प्रेम का वर्णन मिलता है। घने पेड की शाखा पर शुक बैठा हुआ है। उसे सूर्य की किरणें स्पर्श करती हैं। पेड की पत्तियों से निकलकर आती किरणों से वह पुलकित हो उठता है। उस आनंद में गीत गाना आरंभ करता है। शुक जब बसंती का गीत गाता है तो शुकी आकर्षित होने लगती है।

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ग. हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की
बिधना यों मन में गुनती है
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्तियाँ गीत अगीत’ कविता पाठ से ली गई हैं। इस कविता के कवि श्री रामधारी सिंह दिनकर हैं। इनमें प्रेमी और प्रेमिका का वर्णन है।प्रेमी प्रेम गीत गाता है। वह गीत प्रेमिका को प्रेमी की ओर खींच लाता है। प्रेमिका उस गीत को गुप्त रूप से सुनती है। वह पुलकित हो जाती है। प्रेमिका सोचती है कि, वह उस गीत का हिस्सा बनजाती तो, कितना अच्छा होता।

3. निम्नलिखित उदाहरण में ‘वाक्य- विचलन’ को समझने का प्रयास कीजिए। इसी आधार पर प्रचलित वाक्य – विन्यास लिखिए।
उदाहरण :
तट पर एक गुलाब सोचता
एक गुलाब तट पर सोचता है।

क. देते स्वर यदि मुझे विधाता ।
उत्तर:
यदि भगवान मुझे गाने का स्वर देता।

ख) बैठा शुक उस घनी डाल पर
उत्तर:
उस घनी डाल पर शुक बैठा है।

ग) गूँज रहा शुक का स्वर वन में
उत्तर:
शुक (तोते) का स्वर वन में गूँज रहा है।

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घ) हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की
उत्तर:
मैं गीत की कड़ी (हिस्सा) क्यों न हो सकी।

ङ) शुकी बैठ अंडे है सेती
उत्तर:
शुक बैठकर अंडे सेती (सेंकती) है।

कवि परिचय :

रामधारी सिंह दिनकर का जन्म बिहार के मुंगेर जिले के सिमरिया गाँव में 30 सितंबर 1908 को हुआ। वे सन् 1952 में राज्यसभा के सदस्य मनोनीत किए गए। भारत सरकार ने इन्हें ‘पद्मभूषण’ अलंकरण से भी अलंकृत किया। दिनकर जी को ‘संस्कृति के चार अध्याय ‘ पुस्तक पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। अपनी काव्यकृति ‘उर्वशी’ के लिए इन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

दिनकर की प्रमुख कृतियाँ हैं: हुँकार, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, परशुराम की प्रतीक्षा, उर्वशी और संस्कृति के चार अध्याय । दिनकर ओज के कवि माने जाते हैं। इनकी भाषा अत्यंत प्रवाहपूर्ण, ओजस्वी और सरल है । दिनकर की सबसे बड़ी विशेषता है अपने देश और युग के सत्य के प्रति सजगता । दिनकर में विचार और संवेदना का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। इनकी कुछ कृतियों में प्रेम और सौंदर्य का भी चित्रण है।

प्रस्तुत कविता ‘गीत – अगीत’ में भी प्रकृति के सौंदर्य के अतिरिक्त जीव जंतुओं के ममत्व, राग और प्रेमभाव का भी सजीव चित्रण है। कवि को नदी के बहाव में गीत का सृजन होता जान पड़ता है, तो शुक शुकी के कार्यकलापों में भी गीत सुनाई देता है और आल्हा गाता प्रेमी तो गीत गान में निमग्न दिखाई देता ही है । कवि का मानना है कि गुलाब, शुकी और प्रेमिका प्रत्यक्ष रूप से गीत – सृजन या गीत गान भले ही न कर रहे हों, पर दरअसल वहाँ गीत का सृजन और गान भी हो रहा है । कवि की दुविधा महज़ इतनी हैं कि उनका वह अगीत (जो गाया नहीं जा रहा, महज़ इसलिए अगीत है) सुंदर है या प्रेमी द्वारा सस्वर गाया जा रहा गीत ?

काव्यांश- भावार्थ :

1. गाकर गीत विरह के तटिनी
वेगवती बहती जाती है,
दिल हलका कर लेने को

उपलों से कुछ कहती जाती है।
तट पर एक गुलाब सोचता,
“देते स्वर यदि मुझे विधाता,
अपने पतझर के सपनों का
मैं भी जग को गीत सुनाता।”

गा – गाकर बह रही निर्झरी,
पाटल मूक खड़ा तट पर है।
गीत, अगीत, कौन सुंदर है ?

‘भाव : जंगलों एवं पहाड़ों के बीच बहती हुई नदी का वर्णन किया गया है। नदी बिछड़ने के दुःख में गीत गाती हुई तेज़ी से बहती जा रही है। वह अपना दुःख कम करने के लिए किनारों पर उगे घास और पत्थरों से कुछ कहती हुई आगे बढ़ती है। किनारे पर एक खिला गुलाब खड़ा है। वह भी गाना चाहता है। गुलाब अपने मन में सोच रहा है कि, भगवान ने उसे भी बोलने की शक्ति दी होती तो कितना अच्छा होता। वह भी दुनिया को अपने पतझड के गीत सुनाता। इस प्रकार नदी अपनी विरह के गीत गाते हुए तेज़ बह रही है। गुलाब चुपचाप किनारे पर खडा नदी को देख रहा है।

భావం : అడవులు, మరియు పర్వతాల నుండి ప్రవహించే నదిని వర్ణించడమైనది. వియోగ దుఃఖములో విరహ పాటలు పాడుతూ నది వేగంగా, ఉదృతంగా ప్రవహించుచున్నది. తన దుఃఖాన్ని పంచుకోవడానికి నది ఒడ్డున పెరిగిన గడ్డి మరియు రాళ్ళతో నది ఏదో చెప్తూ ముందుకు సాగుతోంది. ఒడ్డున ఒక వికసించిన గులాబి పువ్వు ఉన్నది. గులాబి కూడా పాడాలని భావిస్తుంది. భగవంతుడు తనకు కూడా మాట్లాడే / పాడే శక్తి ఇస్తే ఎంత బాగుండును అని తన మనసులో భావిస్తుంది. తాను కూడా తన ఆకురాలే కాలం (శరదృతువు) పాటను లోకానికి వినిపించాలనుకుంటున్నది. ఈ విధంగా నది తన విరహ గేయాలను ఆలాపిస్తూ వేగంగా ప్రవహించుచున్నది. గులాబి ఒడ్డున మౌనంగా చూస్తున్నది.

Meaning: In this poem poet depicting a river flowing through the forests and mountains. The river flows fast and furiously singing songs of separation. To share its sorrow the river is moving forward with over grown grass and rocks. There is a blossoming rose on the river bank. Rose also wants to sing. She thinks in her mind that it would be good if God gave her the power to speak / sing too. She also wants to sing the song of Autumn to the world. In this way, the river, singing its song of separation, flowing fastly, swiftly. The Rose on the pink watching silently.

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2. बैठा शुक उस घनी डाल पर
जो खोते पर छाया देती।
पंख फुला नीचे खोंते में
शुकी बैठ अंडे है सेती ।
गाता शुक जब किरण वसंती
छूती अंग पर्ण से छनकर ।
किंतु, शुकी के गीत उमड़कर
रह जाते सनेह में सनकर।

गूँज रहा शुक का स्वर वन में,
फूला मग्न शुकी का पर है।
गीत, अगीत, कौन सुंदर है ?

भाव : इन पंक्तियों में तोता और मादा तोता के प्रेम का वर्णन है। एक तोता पेड की घनी डाली पर बैठा है। डाली की छाया में उसका घोंसला है। उस घोंसले में मादा तोता बैठी हुई है। वह अपने पंखों को फैलाकर अंडों को सेक रही है। सूर्य की किरणें पत्तों से छनकर आती हैं। तोते की पंखों को स्पर्श करती हैं। तोता गाना गाने लगता है। उसका गाना सुनकर मादा भी गाना चाहती है। लेकिन उसका स्वर निकल नहीं पाता। वह मौन रहकर पंख फैलाते हुए अपने आनंद को प्रकट करती है।

భావం : ఈ పద్యంలో చిలుకల ప్రేమ వర్ణింపబడినది. ఒక చిలుక చెట్టు యొక్క దట్టమైన కొమ్మపై కూర్చొని ఉన్నది. ఆ దట్టమైన కొమ్మ నీడన దాని గూడు ఉన్నది. ఆ గూడులో ఆడ చిలుక తన రెక్కలను చాచి గుడ్లను పొదుగుతున్నది. సూర్యకిరణాలు ఆకుల నుండి చిలుకపై పడుతున్నవి. చిలుక పాడటం మొదలుపెట్టింది. దాని పాట విని ఆడ చిలుకకు కూడా పాడాలనిపిస్తుంది. కానీ తన గొంతు పైకి పెగలుట లేదు. అది మౌనంగానే తన రెక్కలను విప్పి తన ఆనందాన్ని వ్యక్తపరుస్తున్నది.

Meaning: Love of parrots is described in this poem. A parrot perched on a thick branch of a tree. Its nest is in the shade of that thick branch. In that nest, the female parrot spreads her wings and incubating the eggs. The sun rays fall on the parrot from the leaves. The parrot started singing. A female parrot also wants to sing after hearing the song. But she did not raise her voice. It expressed its happiness by spreading its wings silently.

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3. दो प्रेमी हैं यहाँ, एक जब
बड़े साँझ आल्हा गाता है,
पहला स्वर उसकी राधा को
घर से यहाँ खींच लाता है।
चोरी चोरी खड़ी नीम की
छाया में छिपकर सुनती है,
‘हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की
बिधना’ यों मन में गुगंती है।
वह गाता, पर किसी वेग से
फूल रहा इसका अंतर है।
गीत, अगीत, कौन सुंदर है ?

भाव : इन पंक्तियों में दो प्रेमियों के प्रेम का वर्णन है। एक प्रेमी शाम के समय अपनी प्रेमिका को बुलाने के लिए आल्हा गीत गाता है। उसका स्वर प्रेमिका को खींच लाता है। वह चोरी से छुप-छुपकर अपने प्रेमी का गाना सुनती है। प्रेमिका अपने मन में सोचती है कि वह उस गीत का हिस्सा क्यों नहीं बनीं ? नीम के पेड के नीचे अपने प्रेमी का गीत सुनकर वह बहुत खुश होती है। प्रेमी गीत गाकर अपनी सुंदरता का वर्णन करता है। प्रेमिका चुप रहकर भी उतना ही प्रभावशाली रूप से अपने प्रेम को व्यक्त करती है। प्रेमिका का अगीत भी किसी मधुर गीत से कम नहीं हैं।

భావం : ఈ పద్యములో ప్రేమికుల ప్రేమ వర్ణింపబడినది. ఓ ప్రేమికుడు తన ప్రియురాలిని పిలవడానికి సాయంత్రం వేళ ఆల్ట్రా (జానపద గేయం)ను ఆలాపిస్తున్నాడు. ఆ గేయం ప్రియురాలిని ఆకర్షిస్తుంది. ప్రియురాలు, ప్రియుని, పాటను రహస్యంగా ఆలకిస్తుంది. ప్రియుని పాటలో తనెందుకు భాగం (కొనసాగింపు) కాలేదా ? అని తన మనసులో భావిస్తుంది. వేపచెట్టు క్రింద తన ప్రియుని పాటను ఆలకించి తన్మయం చెందుతుంది.

ప్రియుడు పాటను ఆలపించి తన గొప్పదనాన్ని వ్యక్తపరిచెను. ప్రియురాలు మౌనంగా అంతే గొప్పగా తన ప్రేమను వ్యక్తపరుస్తుంది. ప్రియురాలి మౌన ప్రేమ కూడా ప్రియుని కీర్తన కంటే ఏ మాత్రం తక్కువ కాదు.

Meaning: Love of lovers is described in this poem. A lover sings ‘Alha’ (folk song) in the evening to call his lover. It attracts the beloved. The beloved lover secretly listen’s to lover’s song. She thinks in her mind that’s why is she not a part of the lover’s song. She felt very happy by listening the lover’s song by sitting under the Neem tree. The lover expresses his greatness by singing the song. The beloved also silently expressing her great love similarly. The silent love of beloved lover is greater than the lover’s love.

गीत-अगीत Summary in Hindi

गीत – अगीत कविता के कवि श्री रामधारी सिंह दिनकर है। इस कविता में प्रकृति सौंदर्य का चित्रण है। पशु- पक्षी के ममत्व, मानवीय राग और प्रेम भाव का सजीव चित्रण भी है।

इसमें नदी के बहने का सुंदर वर्णन किया गया है। नदी बिछड़ने का विरह गीत गाते हुए तेज़ी से बहती जाती है। अपना दुःख कम करने के लिए किनारों पर उसे घास और पत्थरों से कुछ कहती हुई बहती जाती है। नदी के किनारे पर एक गुलाब खडा है। वह सोचता है कि, भगवान उसे बोलने की शक्ति देता तो कितना अच्छा होता है। वह भी अपने पतझड के सपनों के गीत सुनाता।

पेड के घनी डाली पर एक तोता बैठा गा रहा है। घनी डाली की छाया में उसका घोंसला है। मादा तोता अपने पंख फैलाकर अंडों को सेक रही है। वह भी गाना चाहती है। लेकिन आवाज़ नहीं निकालती। वह खुश होती है।

एक प्रेमी शाम के समय अपनी प्रेमिका के लिए आल्हा गीत गाता है। उसके स्वर को सुनकर प्रेमिका खींची चली आती है। नीम के पेड के पीछे छुपकर वह गीत सुनती है। वह सोचती है कि, वह भी उस गीत का हिस्सा क्यों न हो सकी? वह प्रेमी के गीत का आनंद लेती है।

कवि यह प्रश्न कर रहा है कि, उसके द्वारा गाया गया गीत सुंदर है? या प्रकृति के द्वारा ना गा सकनेवाला गीत सुंदर है ?

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शब्दार्थ/(అర్ధములు)/(Meanings) :

  • तटिनी = नदी, तटों के बीच बहती हुई, river, నది
  • वेगवती = तेंज गति से, fast, వేగం
  • उपलों = किनारों से, from the bank, ఒడ్డుల నుండి
  • विधाता = ईश्वर, God, భగవంతుడు
  • निईईरी = झरना, नदी, water fall (river), జలపాతం (నది)
  • पाटल = गुलाब, rose, గులాబి
  • शुक = तोता, parrot, చిలుక
  • खोंते = घोंसला, nest, గూడు
  • पर्ण = पत्ता, पंख, leaf (feather), ఆకు
  • शुकी = मादा तोता, female parrot, ఆడ చిలుక
  • आल्हा = एक लोक – काव्य का नाम, name of a folk song, జానపద గేయం
  • कड़ी = वे छंद जो गीत को जोड़ते हैं, linkage, పాట కొనసాగింపు పదాలు
  • बिधना = भाग्य, विधाता, creator, సృష్టికర్త
  • गुनती = विचार करती है, thinks, ఊహించుకొనుట
  • वेग = गति, speed, వేగం

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