These AP 9th Class Hindi Important Questions Sparsh 5th Lesson शुक्रतारे के समान will help students prepare well for the exams.
शुक्रतारे के समान AP Board 9th Class Hindi Sparsh 5th Lesson Important Questions and Answers
भाग – I Q.No.1-12
1. तत्सम तद्भव
* रेखांकित शब्द का सही तत्सम तद्भव रूप पहचानकर लिखिए।
1. समूचे देश के दुलारे बन चुके थे।
उत्तर:
प्यारे
2. उसका ब्योरा रोज़ रोज़ आने लगा।
उत्तर:
विवरण
3. गाँधीजी के सामने पेश करते थे।
उत्तर:
सम्मुख
4. क्रानिकल में जगह की तंगी बनी रहती थी।
उत्तर:
तकलीफ
5. यह गाँधीजी का आग्रह है।
उत्तर:
अनुरोध
6. भारत में उनके अक्षरों का कोई सानी नहीं था।
उत्तर:
समान / तुल्य
2. क्रिया विशेषण
* निम्न लिखित वाक्यों में से क्रिया विशेषण शब्द चुनकर लिखिए।
7. शुक्रतारे की तरह अचानक अस्त हो गया।
उत्तर:
अचानक
8. तभी गाँधीजी ने उनको तत्काल पहचान लिया।
उत्तर:
तत्काल
9. वह अच्छे अच्छे लेख लिखते थे।
उत्तर:
अच्छे-अच्छे
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10. वे दोनों आराम से बैठकर बातें करने लगे।
उत्तर:
आराम से बैठकर
11. आज मैं ने पेट भर खाना खाया।
उत्तर:
पेट भर
12. उसका घर अलवर गेट के पास है।
उत्तर:
अलवर गेट
3. हिंदी अक्षरों में लिखना
13. 2028 ……….. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
दो हजार अट्ठाईस
14. 1965 ……….. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
उन्नीस सौ पैंसठ
15. 1868 ……….. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
अठारह सौ अडसठ
16. 1755 ……….. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
सत्रह सौ पचपन
17. 1576 ……….. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
पंद्रह सौ छिहत्तर
18. 2025 ……….. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
बीस सौ पच्चीस
19. 1971 ……….. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
उन्नीस सौ इकहत्तर
20. 1935 ……….. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
उन्नीस सौ पैंतीस
21. 1919 ……….. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
उन्नीस सौ उन्नीस
4. कारक चिह्न
* निम्न लिखित वाक्यों में से सही कारक चिह्न पहचानकर लिखिए।
22. महादेव ने सरकार के अनुवाद – विभाग …. नौकरी की थी। (के, में, से)
उत्तर:
में
23. गाँधीजी की आत्मकथा ‘स्तय के प्रयोग’ …. अंग्रेज़ी अनुवाद उन्होंने किया। (का, के, की)
उत्तर:
का
24. वहाँ दिन भर काम करके शाम …. वापस पैदल आते थे। (में, पर, को)
उत्तर:
को
25. वे भर्तृहरि के भजन …. यह पंक्ति हमेशा दोहराते रहे। (का, के, की)
उत्तर:
की
26. उनकी अकाल मृत्यु …. कारणों में वह एक कारण माना जा सकता है। (का, के, की)
उत्तर:
के
5. समास
* वाक्य के आधार पर समास लिखिए।
27. देश – विदेश के धुरंधर लोग, संवाददाता आदि गाँधीजी को पत्र लिखते।
उत्तर:
संवाददाता – बहुव्रीहि समास
28. वह कट्टर देशभक्त था।
उत्तर:
देश भक्त तत्पुरुष समास
29. गाँधीजी कई बार आमरण दीक्षा में बैठे थे।
उत्तर:
आम्रण – अव्ययीभाव समास
30. सभी सज्जन लोग मंच पर बैठे थे।
उत्तर:
सज्जन कर्मधारय
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31. वे लोग दोपहर तक खाना नहीं खाये।
उत्तर:
दोपहर – द्विगु समास
32. सुख – दुःख से ही जीवन परिपूर्ण होता है।
उत्तर:
सुख – दुःख द्वन्द्व समास
6. संधि विच्छेद
* निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित शब्दों का संधि विच्छेद कीजिए।
33. गाँधीजी ने उनको तत्काल पहचान लिया।
उत्तर:
तद् + काल
34. उनको अपने उत्तराधिकारी का पद सौंप दिया।
उत्तर:
उत्तर + अधिकारी
35. वह अत्याचार की कहानी लिखने लगा।
उत्तर:
अति + आचार
36. वह निश्चय कर लिया।
उत्तर:
निः + चय
37. वे देश- विदेश के अग्रगण्य समाचार पत्र हैं।
उत्तर:
अग्र + गण्य
38. उनके चरणामृत का महत्व आप नहीं जानते।
उत्तर:
चरण + अमृत
7. एक शब्द में लिखना
39. सात दिनों में एक बार
उत्तर:
साप्ताहिक
40. रामेश्वरम से हिमाचल तक विस्तीर्ण
उत्तर:
आसेतु हिमाचल
41. तारीफ करने योग्य व्यक्ति
उत्तर:
प्रशंसक
42. जिसका भाषा द्वारा वर्णन असंभव हो
उत्तर:
अनिर्वचनीय
43. अच्छे चरित्र वाला
उत्तर:
सच्चरित्र
44. अनुकरण करने योग्य
उत्तर:
अनुकरणीय
45. केवल अपना हित चाहनेवाला
उत्तर:
स्वार्थी
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46. अनुचित बात के लिए आग्रह
उत्तर:
दुराग्रह
47. एक भाषा की लिखी हुई बात दूसरी भाषा में लिखना या कहना – अनुवाद
उत्तर:
अनुभव
48. कम बोलने वाला
उत्तर:
मितभाषी
8. मुहावरे
* मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य प्रयोग कीजिए।
49. कहर बरसाना
उत्तर:
कहर बारसाना अत्याचार करना
अंग्रेजों ने भारतीयों पर कहर बरसाया।
50. स्याह को सफेद करना :
उत्तर:
स्याही को सफेद करना अवैध को वैध करना वकालत का मुख्य पेशा स्याह को सफ़ेद करना है।
51. अकाल के मृत्यु हो जाना
उत्तर:
अकाल के मृत्यु हो जाना असमय पर मरना उसकी बेटी अकाल की मृत्यु हो गई।
52. गर्दन झुकाना
उत्तर:
गर्दन झुकाना – लज्जित होना
मेरे सामने आते ही उसकी गर्दन झुक गई।
53. बात काटना
उत्तर:
बात काटना बीच में बोलना
छोटों को बड़ों की बात काटना उचित नहीं है।
9. लिंग बदलिए
* लिंग बदलकर वाक्य फिर से लिखिए।
54. हमारे अध्यापक बहुत अच्छे हैं।
उत्तर:
हमारी अध्यापिका बहुत अच्छी हैं।
55. वह मेरा भाई है।
उत्तर:
वह मेरी बहन है।
56. छात्रा किताब पढती है।
उत्तर:
छात्र किताब पढता हैं।
57. मालिन पौधों को पानी दे रही है।
उत्तर:
मालिक पौधों को पानी दे रहा है।
58. मैं शिक्षक हूँ। मैं बच्चों को पढाता हूँ।
उत्तर:
मैं शिक्षिका हूँ! मैं बच्चों को पढाती हूँ।
59. गाय हरी हरी घास खाती है।
उत्तर:
बैल हरी हरी घास खाता है।
10. वचन बदलिए
* वचन बदलकर वाक्य फिर से लिखिए।
60. मोती सागर में मिलती है।
उत्तर:
मोती सागर में मिलते हैं।
61. धागे से माला बनती है।
उत्तर:
धागे से मालाएँ बनती हैं।
62. मोर सुंदर पक्षी है।
उत्तर:
मोर सुंदर पक्षी हैं।
63. वह ज़मीन पर लेट गया।
उत्तर:
वे ज़मीन पर लेट गये।
64. ज़रा हमें भी बताइए।
उत्तर:
ज़रा मुझे भी बताइए।
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65. उस पर भरोसा करना मूर्खता है।
उत्तर:
उन पर भरोसा करना मूर्खता है।
66. वृक्ष हमें फल देता है।
उत्तर:
वृक्ष हमें फल देते हैं।
67. मैं मुंबई गया था।
उत्तर:
हम मुंबई गये थे।
11. काल बदलिए
*सूचना के अनुसार काल बदलकर लिखिए।
68. शुक्र चंद्र का साथी माना गया। (भविष्यत काल में लिखिए।)
उत्तर:
शुक्र चंद्र का साथी माना जाएगा।
69. महादेव देसाई गाँधीजी के मंत्री थे। (वर्तमान काल में लिखिए।)
उत्तर:
महादेव देसाई गाँधीजी के मंत्री हैं।
70. क्रॉनिकल में जगह की तंगी थी। (भविष्यत काल में लिखिए।)
उत्तर:
क्रॉनिकल में जगह की तंगी होगी।
71. गाँधीजी का काम बहुत बढ़ गया। (भविष्यत काल में लिखिए।)
उत्तर:
गाँधीजी का काम बहुत बढ़ेगा।
72. भारत में उनके अक्षरों का कोई सानी नहीं है। (भूतकाल में लिखिए।)
उत्तर:
भारत में उनके अक्षरों का कोई सानी नहीं था।
73. वे एक घंटे में चार घंटों के काम निपटा देते हैं। (भूतकाल में लिखिए।)
उत्तर:
वे एक घंटे में चार घंटों के काम निपटा देते थे।
12. शुद्ध रूप में लिखना
* वाक्यों को शुद्ध रूप में लिखिए।
74. यह सिलसिला लंबी समय तक चली।
उत्तर:
यह सिलसिला लंबे समय तक चला!
75. वे भतृहरि का भजन का यह पंक्ति हमेशा दोहराता रहा।
उत्तर:
वे भतृहरि के भजन के यह पंक्ति हमेशा दोहराते रहे।
76. श्री कालीनाथ राय को दस साल की जेल का सजा मिला।
उत्तर:
श्री कालीनाथ राय को दस साल की जेल की सज़ा मिली।
77. शुक्र चंद्र की साथी मानी गई।
उत्तर:
शुक्र चंद्र का साथी माना गया है।
78. गाँधीजी के लिए वे पुत्र से भी अधिक था।
उत्तर:
गाँधीजी के लिए वे पुत्र से भी अधिक थे।
भाग – II Q.No. 13-16
Q.No.13
पठित गद्यांश
* निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर उत्तर अनुच्छेद में से ही पहचानकर लिखिए|
1. कुछ ही दिनों में ‘क्रॉनिकल’ के निडर अंग्रेज़ संपादक हार्नीमैन को सरकार ने देश निकाले की सज़ा देकर इंग्लैंड भेज दिया। उन दिनों बंबई के तीन नए नेता थे। शंकर लाल बैंकर, उम्मर सोबानी और जमनादास द्वारकादास। इनमें अंतिम श्रीमती बेसेंट के अनुयायी थे। ये नेता ‘यंग इंडिया’ नाम का एक अंग्रेज़ी साप्ताहिक भी निकालते थे। लेकिन उसमें ‘क्रॉनिकल’ वाले हार्नीमैन ही मुख्य रूप से लिखते थे । उनको देश निकाला मिलने के बाद इन लोगों को हर हफ़्ते साप्ताहिक के लिए लिखनेवालों की कमी रहने लगी। ये तीनों नेता गाँधीजी के परम प्रशंसक थे और उनके सत्याग्रह – आंदोलन में बंबई के बेजोड़ नेता भी थे। इन्होंने गाँधीजी से विनती की कि वे ‘यंग इंडिया’ के संपादक बन जाएँ। गाँधीजी को तो इसकी सख्त ज़रूरत थी ही। उन्होंने विनती तुरंत स्वीकार कर ली।
प्रश्न:
अ) प्रार्थना शब्द का पर्यायवाची शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
विनती
आ) डर शब्द का विलोम शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
निडर
इ) उन दिनों बंबई के तीन नए नेता थे। (वाक्य में संज्ञा शब्द पहचानकर लिखिए।)
उत्तर:
बंबई
ई) इक प्रत्यय से युक्त शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
साप्ताहि
उ) अनु उपसर्ग से युक्त शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
अनुयायी
2. सब प्रांतों के उग्र और उदार देशभक्त, क्रांतिकारी और देश – विदेश के धुरंधर लोग, संवाददाता आदि गाँधीजी को पत्र लिखते और गाँधीजी ‘यंग इंडिया’ के कॉलमों में उनकी चर्चा किया करते। महादेव गाँधीजी की यात्राओं के और प्रतिदिन की उनकी गतिविधियों के साप्ताहिक विवरण भेजा करते।
प्रश्न:
अ) सरल शब्द का समानार्थक शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
उदार
आ) सौम्य शब्द का विलोम शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
उग्र
इ) ई प्रत्यय से युक्त शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
क्रांतिकारी
ई) गाँधीजी को पत्र लिखते। संज्ञा शब्द पहचानिए।
उत्तर:
गाँधी
उ) अनुच्छेद में उदार शब्द व्याकरण की दृष्टि से क्या है?
उत्तर:
विशेषण
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3. बड़े – बड़े देशी – विदेशी राजपुरुष, राजनीतिज्ञ, देश – विदेश के अग्रगण्य समाचार – पत्रों के प्रतिनिधि, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के संचालक, पादरी, ग्रंथकार आदि गाँधीजी से मिलने के लिए आते थे। ये लोग खुद इनके साथी – संगी भी गाँधीजी के साथ बातचीत को ‘शॉर्टहैंड’ में लिखा करते थे। महादेव एक कोने में बैठे बैठे अपनी लंबी लिखावट में सारी चर्चा को लिखते रहते थे। मुलाकात के लिए आए हुए लोग अपनी मुकाम पर जाकर सारी बातचीत को टाइप करके जब उसे गाँधीजी के पास ‘ओके’ करवाने के लिए पहुँचते, तो भले ही उनमें कुछ भूलें या कमियाँ – खामियाँ मिल जाएँ, लेकिन महादेव की डायरी में या नोट – बही में मजाल है कि कॉमा मात्र की भी भूल मिल जाए।
प्रश्न:
अ) खुद शब्द का पर्यायवाची शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
स्वयं
आ) बुरे शब्द का विलोम शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
भले
इ) आवट प्रत्यय से युक्त शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
लिखावट
ई) सम् उपसर्ग से युक्त शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
संचालक
उ) पादरी, ग्रंथकार आदि गाँधीजी से मिलने के लिए आते थे।
व्याकरण की दृष्टि से मिलना शब्द क्या है? (वाक्य में क्रिया शब्द पहचानकर लिखिए|)
उत्तर:
क्रिया
Q.No. 15
पठित गद्यांश
* निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए।
1. आकाश के तारों में शुक्र की कोई जोड़ नहीं। शुक्र चंद्र का साथी माना गया है। उसकी आभा – प्रभा का वर्णन करने में संसार के कवि थके नहीं। फिर भी नक्षत्र मंडल में कलगी – रूप इस तेजस्वी तारे को दुनिया या तो ऐन शाम के समय, बड़े सबेरे घंटे दो घंटे से अधिक देख नहीं पाती। इसी तरह भाई महादेव जी आधुनिक भारत की स्वतंत्रता के उषाकाल में अपनी वैसी ही आभा से हमारे आकाश को जगमगाकर, देश और दुनिया को मुग्ध करके, शुक्रतारे की तरह ही अचानक अस्त हो गए। सेवा धर्म का पालन करने के लिए इस धरती पर जनमे स्वर्गीय महादेव देसाई गाँधीजी के मंत्री थे। मित्रों के बीच विनोद में अपने को गाँधीजी का ‘हम्माल’ कहने में और कभी – कभी अपना परिचय उनके ‘पीर – बावर्ची – भिश्ती – खर’ के रूप में देने में वे गौरव का अनुभव किया करते थे।
प्रश्न:
अ) आकाश के तारों में किस तारे की जोड नहीं है?
उत्तर:
आकाश के तारों में शुक्र तारे की जोड नहीं है।
आ) चंद्र का साथी कौन है?
उत्तर:
शुक्र चंद्र का साथी है।
इ) शुक्र तारे की तुलना किसके साथ की गई?
उत्तर:
शुक्र तारे की तुलना भाई महदेव देसाई जी से की गई।
ई) महादेव देसाई किससे मंत्री थे?
उत्तर:
महादेव देसाई गाँधीजी के मंत्री थे।
उ) महादेव भाई अपना परिचय किस रूप में देते थे?
उत्तर:
महादेव भाई अपना परिचय गाँधीजी का हम्माल तथा पीर बावर्ची – र्ची भिश्ती खर के रूप में देते थे।
2. गाँधीजी के लिए वे पुत्र से भी अधिक थे। जब सन् 1917 वे गाँधीजी के पास पहुँचे थे, तभी गाँधीजी ने उनको तत्काल पहचान लिया और उनको अपने उत्तराधिकारी का पद सौंप | दिया। सन् 1919 में जलियाँवाला बाग के हत्याकांड के दिनों में पंजाब जाते हुए गाँधीजी को पलवल स्टेशन पर गिरफ़्तार किया गया था। गाँधीजी ने उसी समय महादेव भाई को अपना वारिस कहा था। सन् 1929 में महादेव भाई आसेतु हिमाचल, देश के चारों कोनों में, समूचे देश के दुलारे बन चुके थे।
प्रश्न:
अ) गाँधीजी के लिए पुत्र से भी अधिक कौन थे?
उत्तर:
गाँधीजी के लिए महादेव भाई पुत्र से भी अधिक थे।
आ) महादेव पहली बार गाँधीजी के पास कब पहुँचा?
उत्तर:
महादेव भाई पहली बार गाँधी जी के पास सन् में पहुँचा।
इ) किसने महादेव भाई को उत्तराधिकारी का पद सौंपा?
उत्तर:
गाँधीजी ने महादेव भाई को अपने उत्तराधिकारी का पद सौंपा।
ई) गाँधीजी को कहाँ गिरफ़्तार किया गया?
उत्तर:
गाँधीजी को पलवल स्टेशन पर गिरफ़्तार किया गया था।
उ) महादेव भाई समूचे देश के दुलारे कब बन चुके थे?
उत्तर:
सन् में महादेव भाई समूचे देश के दुलारे बन चुके थे।
Q.No.16
पठित गद्यांश
* निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।
1. गाँधीजी के पास आने के पहले अपनी विद्यार्थी अवस्था में महादेव ने सरकार के अनुवाद – विभाग में नौकरी की थी। नरहरि भाई उनके जिगरी दोस्त थे। दोनों एक साथ वकालत पढ़े थे। दोनों ने अहमदाबाद में वकालत भी साथ – साथ ही शुरू की थी। इस पेशे में आमतौर पर स्याह को सफ़ेद और सफ़ेद को स्याह करना होता है। साहित्य और संस्कार के साथ इसका कोई संबंध नहीं रहता। लेकिन इन दोनों ने तो उसी समय से टैगोर, शरदचंद्र आदि के साहित्य को उलटना -पुलटना शुरू कर दिया था। ‘चित्रांगदा’ कच – देवयानी की कथा पर टैगोर द्वारा रचित ‘विदाई का अभिशाप’ शीर्षक नाटिका, ‘शरद बाबू की कहानियाँ’ आदि अनुवाद उस समय की उनकी साहित्यिक गतिविधियों की देन हैं।
प्रश्न:
अ) सरकार के अनुवाद विभाग में किसने काम की? (A)
A) महादेव
B) गाँधीजी
C) स्वामी आनंद
D) नरहरि भाई
उत्तर:
A) महादेव
आ) नरहरि भाई किनके जिगरी दोस्त थे? (C)
A) गाँधी की
B) नेहरू की
C) महादेव की
D) स्वामी आनंद की
उत्तर:
C) महादेव की
इ) कौन कौन एक साथ वकालत पढे थे? (B)
A) गाँधी – नेहरू
B) महादेव – नरहरि
C) महदेव – स्वामि आनंद
D) स्वामि आनंद-गाँधी
उत्तर:
B) महादेव – नरहरि
ई) दोनों ने कहाँ वकालत शुरू की थी? (D)
A) मद्रास में
B) दक्षिणाफ्रिका में
C) गुजरात में
D) अहमदाबाद में
उत्तर:
D) अहमदाबाद में
उ) बिदाई का अभिशाप’ किसने लिखा? (C)
A) महादेव भाई
B) नरहरि भाई
C) टैगोर
D) गाँधी
उत्तर:
C) टैगोर
2. भारत में उनके अक्षरों का कोई सानी नहीं था। वाइसराय के नाम जाने वाले गाँधीजी के पत्र हमेशा महादेव की लिखावट में जाते थे। उन पत्रों को देख – देखकर दिल्ली और शिमला में बैठ वाइसराय लंबी साँस – उसाँस लेते रहते थे। भले ही उन दिनों ब्रिटिश सल्तनत पर कहीं सूरज न डूबता हो, लेकिन उस सल्तनत के ‘छोटे’ बादशाह को भी गाँधीजी के सेक्रेटरी के समान खुशनवीश (सुंदर अक्षर लिखने वाला लेखक) कहाँ मिलता था? बड़े – बड़े सिविलियन और गवर्नर कहा करते थे कि सारी ब्रिटिश सर्विसों में महादेव के समान अक्षर लिखने वाला कहीं खोजने पर भी मिलता नहीं था। पढ़ने वाले को मंत्रमुग्ध करने वाला शुद्ध और सुंदर लेखन।
प्रश्न:
अ) भारत में किनके अक्षरों को कोई सानी नहीं था? (A)
A) महादेव भाई
B) वाइसराय
C) गाँधीजी
D) गाँधीजी के सेक्रटरी
उत्तर:
A) महादेव भाई
आ) वाइसराय के नाम जाने वाले पत्र किनके लिखावट में जाते थे? (C)
A) गाँधी की
B) महादेव की
C) स्वामी आनंद की
D) नेहरू की
उत्तर:
C) स्वामी आनंद की
इ) महादेव की लिखावट को देखकर वहाँ के वाइसराय लंबी साँस उसाँस लेते रहते थे? (B)
A) दिल्ली के
B) शिमला के
C) दिल्ली और शिमला के
D) हैदराबाद के
उत्तर:
B) शिमला के
ई) सुंदर एवं स्पष्ट लिखनेवाले को क्या कहते हैं? (D)
A) खुशनसीबी
B) खुशाली
C) खुशनवीश
D) खुशीवान
उत्तर:
D) खुशीवान
उ) ‘महादेव किनके पत्र सुंदर लिखावट में लिखते थे? (C)
A) गाँधी जी के
B) वाइसराय के
C) गवर्नर के
D) बादशाह के
उत्तर:
C) गवर्नर के
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3. गाँधीजी के पास आने के पहले अपनी विद्यार्थी अवस्था में महादेव ने सरकार के अनुवाद विभाग में नौकरी की थी। नरहरि भाई उनके जिगरी दोस्त थे। दोनों एक साथ वकालत पढ़े थे। दोनों ने अहमदाबाद में वकालत भी साथ – साथ ही शुरू की थी। इस पेशे में आमतौर पर स्याह को सफ़ेद और सफ़ेद को स्याह करना होता है। साहित्य और संस्कार के साथ इसका कोई संबंध नहीं रहता। लेकिन इन दोनों ने तो उसी समय से टैगोर, शरदचंद्र आदि के साहित्य को उलटना, -पुलटना शुरू कर दिया था। ‘चित्रांगदा ‘ कच – देवयानी की कथा पर टैगोर द्वारा रचित ‘विदाई का अभिशाप’ शीर्षक नाटिका, ‘शरद बाबू की कहानियाँ’ आदि अनुवाद उस समय की उनकी साहित्यिक गतिविधियों की देन हैं ।
प्रश्न:
अ) गाँधीजी के पास आने के पहले महादेव ने कौनसी नौकरी की? (C)
A) वित्त विभाग में अफ़सर
B) शिक्षा विभाग में निरीक्षक
C) अनुवाद – विभाग में
D) सूचना और प्रसारण विभाग में
उत्तर:
C) अनुवाद – विभाग में
आ) नरहरि भाई किसके जिग री दोस्त थे? (B)
A) गाँधीजी के
B) महादेव के
C) हार्निमैन के
D) प्यारेलाल के
उत्तर:
B) महादेव के
इ) महादेव भाई ने वकालत कहाँ शुरू की? (D)
A) बंबई में
B) दिल्ली में
C) नागपुर में
D) अहमदाबाद में
उत्तर:
D) अहमदाबाद में
ई) ‘स्याह को सफ़ेद और सफेद को स्याह बनाने’ का अर्थ क्या है? (B)
A) सफ़ेद रंग को काले में बदल देना
B) असत्य को सत्य तथा सत्य को असत्य बनाना
C) रंगीन बनाना
D) सुंदर चित्र बनाना
उत्तर:
B) असत्य को सत्य तथा सत्य को असत्य बनाना
उ) ‘चित्रांगदा’ किसकी रचना है? (B)
A) महादेव भाई की
B) रवीन्द्रनाथ ठाकुर की
D) प्रेमचन्द की
C) शरत बाबू की
उत्तर:
B) रवीन्द्रनाथ ठाकुर की
भाग – III Q.No.17-18
Q.No.18
लेखक परिचय
* निम्न लिखित प्रश्नों के उत्तर चार पंक्तियों में लिखिए।
प्रश्न 1.
पाठ्यपुस्तक के गद्य भाग से एक लेखक का जीवन परिचय दीजिए।
उत्तर:
संन्यासी स्वामी आनंद का जन्म गुजरात के कठियावाड़ जिले के किमड़ी गाँव में सन् 1887 में हुआ। इनका मूल नाम हिम्मतलाल था। जब ये दस साल के थे तभी कुछ साधु इन्हें अपने साथ हिमालय की ओर ले गए और इनका नामकरण किया – स्वामी आनंद। 1907 में स्वामी आनंद स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए। महाराष्ट्र से कुछ समय तक ‘तरुण हिंद’ अखबार निकाला, फिर बाल गंगाधर तिलक के ‘केसरी’ अखबार (जुड़ गए। लेखक के अनुसार कोई भी महान व्यक्ति, महानतम कार्य तभी कर पाता है, जब उसके साथ ऐसे सहयोगी हों, जो उसकी तमाम इतर चिंताओं और उलझनों को अपने सिर ले लें। गाँधीजी के लिए महादेव भाई और भाई प्यारेलाल जी ऐसी ही शख्सियत थे।
भाग – IV Q.No.19-26
Q.No. 21-23
* निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में लिखिए।
प्रश्न 1.
गाँधीजी ने महादेव भाई को किस प्रकार का पद और कब सौंपा?
उत्तर:
जब महादेव भाई ने 1917 में गाँधीजी के पास आए तभी गाँधीजी ने उनकी अद्भुत प्रतिभा को पहचान कर उन्हें अपने उत्तराधिकारी का पद सौंपा।
प्रश्न 2.
महादेव जी अकाल मृत्यु का कारण क्या था?
उत्तर:
मगनवाडी से वर्धा की अधिक गर्मी में पैदल चलकर सेवाग्राम पहुँचना और वहाँ काम करना, आते-जाते उन्हें 44 मील की दूरी तय करनी होती। उन्हें लंबे समय तक वहाँ आना जाना पड़ा था। यहीं महादेव जी की अकाल मृत्यु का कारण था।
प्रश्न 3.
मणि भवन पर लोग क्यों आते थे?
उत्तर:
अग्रेंज़ों के जुल्म और अत्याचार से पीड़ित होकर उनके बारे में बताने वाले पीड़ित लोग गामदेवी के मणि भवन पर आते थे। और महादेव जी के माध्यम से गाँधी जी को अपनी व्यथा सुनाते थे।
प्रश्न 4.
हार्नीमैन के बारे में आप क्या जानते थे?
उत्तर:
हार्नीमैन क्रॉनिकल नामक साप्ताहिक समाचार पत्र के एक निडर अंग्रेज़ संपादक थे। अंग्रेज़ सरकार ने उनके’ लेखन से रुष्ट होकर देश निकाले की सज़ा देकर इंग्लैंड को भेज दिया।
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प्रश्न 5.
नरहरि भाई के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
नरहरि भाई महादेव जी की जिगरी दोस्त थे। दोनों ने एक साथ वकालत की पढ़ाई की और साथ – साथ अहमदाबाद में वकालत भी शुरू की।
प्रश्न 6.
समय का अभाव होने पर भी महादेव भाई ने किस प्रकार अपना साहित्य का योगदान दिया?
उत्तर:
महादेव भाई के पास समय का हमेशा अभाव रहता था। फिर भी उन्होंने चित्रांगदा, कच, देवयानी की कथा पर टैगोर द्वारा रचित विदाई का अभिशाप शीर्षक नाटिका, शरद बाबू की कहानियाँ आदि का अनुवाद करके साहित्य जगत में अपना योगदान दिया।
प्रश्न 7.
देव जी की लिखावट के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
वॉइसराय के नाम जाने वाले गाँधी जी के पत्र हमेशा महादेव की लिखावट में जाते थे। बड़े – बड़े सिविलियन और गवर्नर कहा करते हैं कि सारे ब्रिटिश सर्विस में महादेव के समान खुशनवीश अर्थात सुंदर अक्षर लिखने वाला लेखक कहीं खोजने पर भी मिलता नहीं था।
प्रश्न 8.
गाँधी जी से पहले यंग इंडिया का संपादन कौन करते थे और गाँधीजी के पास किनके किनके पत्र आते थे?
उत्तर:
गाँधीजी के पहले ‘यंग इंडिया’ का संपादन मुंबई के 3 नेता शंकरलाल बैंकर, उम्मर सोबानी और जमनादास द्वारकादास करते थे। गाँधीजी के पास सभी प्रांतों के उग्र और उदार देशभक्त, क्रांतिकारियों देश व विदेश के सुप्रसिद्ध जाने माने लोगों, संवाददाताओं आदि के पत्र आते थे।
प्रश्न 9.
महादेव देसाई जी की तुलना शुक्रतारे से क्यों की गयी?
उत्तर:
शुक्र चाँद का साथी माना गया है। वह अपना तेजस्वी रूप शाम को तथा बडे सबेरे घंटे दो घंटे ही दिखाता है। बाद में अदृश्य हो जाता है। वैसे ही महादेव देसाई ने भी स्वतंत्रता के उषा काल में अपना वैभव दिखाकर दुनिया को मुग्ध कर दिया। शुक्र तारे की तरह अचानक अस्त हो गये, सेवाधर्म का पालन करके अदृश्य हो गये। अतः महादेव की तुलना शुक्र तारे से करना उचित ही लगता है।
प्रश्न 10.
‘गाँधीजी और जनता के बीच में महादेव एक पुल का जैसा काम करते थे’। समझाइए।
उत्तर:
महादेव देसाई जनता और गाँधीजी के बीच में पुल का जैसा काम करते थे। जनता अपनी दुःख की कहानी सुनाने के लिए गाँधीजी के पास दल बाँधकर आते थे। उनकी अनगिनत समस्याओं को गाँधीजी एक साथ सुन नहीं सकते। उनको संक्षिप्त टिप्पणियों के रूप में महादेव गाँधीजी के सामने प्रस्तुत करते थे। इससे दोनों का समय बच जाता । समस्या हल होती। कभी कभी गाँधीजी को जनता के समक्ष खडा किया करते थे।
प्रश्न 11.
महादेव भाई की लिखावट कैसी होती थी?
उत्तर:
उनकी सुंदर लिखावट मनोहारी होती थी। भारत में उनके अक्षरों का कोई सानी नहीं था। वाइसराय के नाम भेजे जानेवाले गाँधीजी के पत्र महादेव की लिखावट में जाते थे। वाइसराय उनकी लिखावट देखकर दंग रह जाते। एक प्रकार की ईर्ष्या से उनका मन जल जाता। क्योंकि सारी ब्रिटिश सर्विसों में महादेव के समान अक्षर लिखनेवाला कोई नहीं है। पढनेवालों को मंत्र मुग्ध करनेवाला शुद्ध और सुंदर लेखन था।
प्रश्न 12.
महादेव के व्यक्तित्व के बारे में लिखिए।
उत्तर:
सरलता, सज्जनता, समर्पण भावना, कर्तव्य निष्ठा, लगन, सहनशीलता, परिश्रमशीलता तथा निरभिमान महादेव के व्यक्तित्व के विशेष गुण हैं। उनके संपर्क में आनेवालों को कभी उनकी बातें ठेस नहीं पहुँचाती। उनकी प्रतिभा से वे अभिभूत हो जाते हैं। उनके संपर्क में आनेवालों को अपने स्नेहपूर्ण सद्व्यवहार की शीतल करणों से नहला देते हैं।
प्रश्न 13.
महादेव भाई तथा गाँधीजी के बीच का संबंध कैसा रहता था?
उत्तर:
महादेवभाई देसाई गाँधीजी के निजी सचिव थे। गाँधीजी के लिए वे पुत्र समान थे। वे गर्व के साथ अपने को गाँधीजी का हम्माल कहते थे। गाँधीजी के विषय में वे एक प्रकार के आल इन वन हैं। गाँधीजी ने भी उनको अपना वारिस कहा। महादेव भाई गाँधीजी के प्रति दिन की गति – विधियों को देखा करते थे। गाँधीजी जहाँ जाते, साथ महादेव भी रहते। महादेव की मृत्यु के बाद में भी गाँधीजी उनको भूल न सके। प्यारेलाल को बुलाते समय अनायास ही इनके मुँह से महादेव ही निकलता।
प्रश्न 14.
शुक्रतारे के समान किसे बताया गया है? क्यों?
उत्तर:
शुक्रतारे के समान महादेव भाई देसाई को बताया गया है। शुक्रतारा चंद्र का साथी है। उसी प्रकार महादेव जी गाँधीजी के सहयोगी थे। शुक्रतारा आकाश में कुछ समय के लिए जगमगाता है। बाद में अदृश्य हो जाता है। उसी प्रकार महादेव जी कुछ समय के लिए दुनिया में आए। अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित करके विदा हो गए। गाँधीजी ने महादेव भाई को अपना वारिस कहा था। वे गाँधीजी की भावनाओं को ज्यों का त्यों समझते थे और लिखते थे। धुरंधर लेखक अपनी टिप्पणियों का मिलान महादेव से जाँच करवा लेते थे।
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प्रश्न 15.
गाँधीजी की सेवा महादेव कैसे करते थे?
उत्तर:
महादेव जी बहुमुखी प्रतिभा संपन्न व्यक्ति थे। वे गाँधीजी के मंत्री थे। पीडितों के जुल्मों की कहानी की संक्षिप्त टिप्पणियाँ तैयार करते थे। उन्हें गाँधी के सामने प्रस्तुत करते थे। गाँधीजी की यात्राओं के, गतिविधियों के विवरण भेजते थे। बडे बडे देशी-विदेशी राजपुरुष, राजनीतिज्ञ, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के संचालक, देश – विदेश के समाचार पत्रों के प्रतिनिधि, पादरी आदि गाँधीजी से मिलने के लिए आते थे। वे गाँधीजी के दाहिने हाथ थे। गाँधीजी जो भी काम करते थे, उन्हें साकार करने का काम महादेव करते थे। वे देश भर में भ्रमण के दौरान गाँधीजी के साथ रहते थे। वे गाँधीजी को सहायक सामग्री जुटाने का काम भी निरंतर किया करते थे।
प्रश्न 16.
विद्यार्थी अवस्था में महादेव क्या करते थे? उनके साहित्यिक गतिविधियाँ क्या हैं?
उत्तर:
विद्यार्थी अवस्था में महादेव ने सरकार के अनुवाद – विभाग में नौकरी करते थे। उन्होंने वकालत पढाई के बाद अहमदाबाद में वकालत भी की। टैगोर, शरदचंद्र आदि की साहित्य का अध्ययन किया। टैगोर की विदाई का अभिशाप शरदबाबू की कहानियों का अनुवाद भी किया था।
भाग – V Q.No.27-28
Q.No.28
* निम्नलिखित निबंधात्मक प्रश्नों के उत्तर सूचना के ‘अनुसार लिखिए।
प्रश्न 1.
स्वामी आनंद जी ने महादेव के स्वभाव की तुलना किस प्रकार की?
उत्तर:
स्वामी आनंद ने महादेव के स्वभाव की तुलना उत्तर प्रदेश और बिहार में हजारों मील तक व्यापी गंगा यमुना के समतल मैदानों से की है। क्योंकि जिस प्रकार इन मैदानों में चलने से ठेस नहीं लगती। उसी प्रकार महादेव से मिलने वाले को प्रेम और अपनत्व की अनुभूति होती थी महादेव के साथ हुई मुलाकात में लोगों को सहृदयता विनम्रता होती थी। जिस प्रकार मैदानी भागों में कंकर ही तक नहीं मिलती थी। उसी प्रकार महादेव के स्वभाव से किसी को ठेस नहीं पहुँचती थी।
प्रश्न 2.
पाठ के आधार पर बताइए कि महादेव के लिए रात और दिन में शायद फर्क नहीं है।
उत्तर:
महादेव भाई समाचार पत्र, मासिक पत्र और कई पुस्तकें पढ़ते तथा यंग इंडिया और नवजीवन के लिए लेख लिखते थे। वे गाँधी जी के साथ लगातार चलने वाली यात्राएँ करते। वह हर स्टेशन पर उपस्थित जनता का विशाल समुदाय जगह – जगह आयोजित सभा में लोगों से मुलाकातें, बैठकें और बातचीत करते। इतने व्यस्त होने पर भी वह अपने लिए भी मुश्किल से मसय निकाल पाते इसलिए हम कह सकते हैं कि उनके लिए दिन रात बराबर हैं।
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प्रश्न 3.
महादेव भाई के चरित्र से हम किन किन गुणों को अपना सकते हैं?
उत्तर:
महादेव भाई के चरित्र से हम एक नहीं बहुत सारे गुणों को अपना सकते हैं। वह अनेक मानवीय मूल्यों का संगम था। उनसे सुंदर लिखावट और उनके चरित्र से समय का नियोजन, हर काम समय पर करने का गुण, अपने स्वभाव में नम्रता, विनम्रता, सहनशीलता, उदारता, देश के प्रति प्रेम की भावना तथा सेवा भावना आदि मानवीय मूल्यों को अपना सकते हैं।