AP 9th Class Hindi Sparsh 3rd Lesson Important Questions तुम कब जाओगे, अतिथि

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तुम कब जाओगे, अतिथि AP Board 9th Class Hindi Sparsh 3rd Lesson Important Questions and Answers

भाग- I Q.No. 1-12

1. तत्सम तद्भव

* रेखांकित शब्द का सही तत्सम / तद्भव रूप लिखिए।

1. आज तुम्हारे आगमन का चतुर्थ दिवस है।
उत्तर:
अद्य, दिन

2. एक मनुष्य अधिक देर साथ नहीं रहते।
उत्तर:
मानव, दानव, मनुज

3. उनकी ऐसी आँखें देखा मैं ने।
उत्तर:
नयन, लोचन, नेत्र

4. एस्ट्रॉनाट्स भी इतने समय चाँद पर नहीं रुके।
उत्तर:
चंदा, शशि, चंद्र

5. इसके तुरन्त भावभीनी विदाई हुआ।
उत्तर:
जल्द, त्वरित, धीरे

6. शरदजोशी का जन्म मध्य प्रदेश में हुआ।
उत्तर:
जनम, जान

7. जिससे आगे हम किसी के लिए नहीं बढ़ें।
उत्तर:
अग्रिम, अग्र, पीछे

8. मेरी सहनशीलता की वह अंतिम सुबह होगी।
उत्तर:
प्रातःकाल, उदय, सबेरा

9. उसके बावजूद एक स्नेह भीगी मुस्कुराहट हुई।
उत्तर:
प्रीति, ईश्क, चाह

2. क्रिया विशेषण

* निम्न लिखितं वाक्यों में से क्रिया विशेषण शब्द चुनकर लिखिए।

10. अतिथि प्रायः ऐसा ही करेगा।
उत्तर:
ऐसा

AP 9th Class Hindi Sparsh 3rd Lesson Important Questions तुम कब जाओगे, अतिथि

11. मेहमान एक एक करके सब खा लिया।
उत्तर:
एक एक

12. आपको इतने दिन रहना अच्छा नहीं होता।
उत्तर:
अच्छा

13. लेखक कल कविता लिखता है।
उत्तर:
कल

14. तुम्हारा व्यक्तित्व यहाँ चिपक गया है।
उत्तर:
यहाँ

15. अतिथि धीरे – धीरे धोबी के कपडे दे रहा है।
उत्तर:
धीरे-धीरे

16. तुम्हें जल्दी जाना है।
उत्तर:
जल्दी

17. उसने थोडा खाना पकाया।
उत्तर:
थोडा

18. वह प्रतिदिन गाडी चलाता है।
उत्तर:
प्रतिदिन

3. हिंदी अक्षरों में लिखना

19. 1856 ………. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
अठारह सौ छप्पन

20. 1869 ………. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
अठारह सौ उनहत्तर

21. 1984 ………. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
उन्नीस सौ चौरासी

22. 1945 ………. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
उन्नीस सौ पैंतालीस

23. 1786 ………. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
सत्रह सौ छियासी

24. 1870 ………. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
अठारह सौ सत्तर

25. 1935 ………. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
उन्नीस सौ पैंतीस

26. 1717 ………. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
सत्रह सौ सत्रह

27. 1767 ………. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
सत्रह सौ सडसठ

28. 1695 ………. हिंदी अक्षरों में लिखिए।
उत्तर:
सोलह सौ पंचानवे

4. कारक चिह्न

* सही कारक चिह्न से भरिए।
41.
29. शरद जोशी …. जन्म मध्यप्रदेश में हुआ। (का, के, की)
उत्तर:
का

30. कवि …. भाषा अत्यन्त सरल और सहज है। (की, के, का)
उत्तर:
की

31. किसी रेल …. एक शानदार मेहमान आया। (के, से, को)
उत्तर:
से

32. मैं धोबी …. कपड़े देना चाहता हूँ। (से, के, को)
उत्तर:
को

33. हमारे सत्कार …. यह आखिरी छोर है। (के, का, को)
उत्तर:
का

34. लॉण्ड्री …. कपडे देते हैं। (को, पर, के)
उत्तर:
पर

35. कल तक इस कमरे के आकाश …. उडते थे। (के, पर, में)
उत्तर:
में

36. कल …. मैं उपन्यास पढ़ रहा हूँ। (में, से पर)
उत्तर:
से

37. एक संक्रमण के दौर गुजर रहे हैं। (से, को, के)
उत्तर:
से

38. मेरी सहनशीलता …. वह अंतिम सुबह होगी। (का, को, की)
उत्तर:
की

5. समास

* रेखांकित शब्द का समास पहचानिए।

39. कवि प्रतिदिन दो नाटक लिखते हैं।
उत्तर:
अव्ययीभाव समास

40. अतिथि भला – बुरा न समझकर इतने दिन रहा।
उत्तर:
द्वन्द्व समास

41. तीसरे दिन की सुबह वह धोबी को बुलाया।
उत्तर:
द्विगु समास

42. आप सुबह – शाम न सोचकर यहाँ रहते हैं।
उत्तर:
द्वन्द्व समास

43. पत्नी – पति ने मेहमान का स्वागत किया।
उत्तर:
द्वन्द्व समास

44. तुम्हारे सामीप्य की बेला एकाएक यों रबरं की तरह खिंच जाएगी।
उत्तर:
अव्ययीभाव समास

45. हम धन्य हुए आपके चरणकमलों को चूमकर।
उत्तर:
कर्मधारय समास

46. मेहमान महापुरुष की तरह इतने दिन हमारे घर में रहा।
उत्तर:
कर्मधारय समास

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47. अतिथि लाखों मीलों यात्रा करके आये हैं।
उत्तर:
द्विगु समास

48. लेखन को ही आजीविका के रूप में अपना लिया।
उत्तर:
तत्पुरुष समास

16. संधि विच्छेद

* निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित शब्दों का संधि विच्छेद कीजिए।

49. इस पाठ के मेजबान निरंतर सोचते रहे।
उत्तर:
निः + अन्तर

50. जहाँ बैठे निस्संकोच सिगरेट का धुआँ फेंक रहे हो।
उत्तर:
निः + संकोच

51. हम फिर दोपहर को मिलेंगे।
उत्तर:
दो + पहर

52. भाषा अत्यन्त सरल और सहज है।
उत्तर:
अति + अन्त

53. वह मुस्कुराकर मेरा स्वागत करता है।
उत्तर:
सु + आगत

54. सदैव हमें यही सोचना चाहिए।
उत्तर:
सदा + एव

55. इस सन्मान पर मुझे बहुत खुशी है।
उत्तर:
सत् + मान

56. अतिथि प्रत्येक कमरे में सो रहा है।
उत्तर:
प्रति + एक

57. अभी अभी सूर्योदय हुआ।
उत्तर:
सूर्य + उदय

58. ये बाग में बैठकर प्रतीक्षा कर रहे थे।
उत्तर:
प्रति + ईक्षा

7. एक शब्द में लिखना

59. जो सब कुछ जानता है।
उत्तर:
सर्वच

60. जिसका अन्त न हो।
उत्तर:
अनंत

61. जिसके आने की तिथि निश्चित न हो।
उत्तर:
अतिथि

62. जो शाक- सब्जी खानेवाला हो।
उत्तर:
शाकाहारी

63. जिसमें धैर्य न हो।
उत्तर:
अधीर

64. जिसके समान दूसरा न हो।
उत्तर:
अद्वितीय

65. दूसरों के उपकार को न माननेवाला।
उत्तर:
कृतघ्न

66. जो गाँव में रहता हो।
उत्तर:
ग्रामीण

67. अच्छा लिखने वाला।
उत्तर:
सुलेखक

68. जिसका जन्म न हो।
उत्तर:
अजन्मा

69. जिसके समान दूसरा न हो।
उत्तर:
अनुपम

70. साहित्य से संबंध रखने वाला।
उत्तर:
साहित्यिक

8. मुहावरे

* वाक्यों में से मुहावरे का अर्थ पहचानकर लिखिए।

71. जी जान लगाना
उत्तर:
मन लगाकर काम करना

72. बटुआ काँप गया।
उत्तर:
खर्च बढना

73. मन हल्का करना।
उत्तर:
सुलभ होना।

74. मन छोटा होना।
उत्तर:
अपहास करना

* वाक्यों में से मुहावरेवाले शब्द पहचानकर लिखिए।

75. कमर कसकर काम करना चाहिए।
उत्तर:
कमर कसना

76. खाने को देखकर अतिथि के मुँह में पानी आया।
उत्तर:
मुँह में पानी आया

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77. यह हमेशा दूसरों पर उंगली उठाता है।
उत्तर:
उंगली उठाना

78. गरीबी में आटा गीला होता ही है।
उत्तर:
आटा गीला होना

9. लिंग बदलिए

* लिंग बदलकर वाक्य फिर से लिखिए।

79. छात्र कविता लिखता है।-
उत्तर:
छात्रा कविता लिखती है।

80 कवि दो व्यंग्य नाटक लिखता है।
उत्तर:
कवइत्री दो व्यंग्य नाटक लिखती है।

81. कल पति ने धीरे से पूछा।
उत्तर:
कल पत्नी ने धीरे से पूछा।

82. आज मालिक कहीं जा रहा है।
उत्तर:
आज मालकिन कहीं जा रही है।

83. औरत घर में काम करती है।
उत्तर:
आदमी घर में काम करता है।

84. मैं धोबी को कपडे देना चाहता हूँ।
उत्तर:
मैं धोबिन को कपडे देना चाहती हूँ।

85. मेरी पत्नी की आँखें बडी बडी हो गई।
उत्तर:
मेरे पति की आँखें बडी बडी हो गई।

86. स्त्री तो आज खिचडी बना रही है।
उत्तर:
पुरुष तो आज खिचडी बना रहा है।

10. वचन बदलि

* वचन बदलकर वाक्य फिर से लिखिए।

87. जो बोला जा सकता है।
उत्तर:
जो बोले जा सकते हैं।

88. आरंभ में कुछ कहानियाँ लिखी।
उत्तर:
आरंभ में एक कहानी लिखी।

89. कवि की प्रमुख व्यंग्य कृतियाँ हैं।
उत्तर:
कवि की प्रमुख व्यंग्य कृति है।

90. उनकी भाषा अत्यन्त सरल है।
उत्तर:
उनकी भाषाएँ अत्यन्त सरल हैं।

91. आँख में पानी आता है।
उत्तर:
आँखों में पानी आता है।

92. पत्रिका का पन्ना पलट रहा है।
उत्तर:
पत्रिका के पन्ने पलट रहे हैं।

93. बच्चे साहित्य पढते हैं।
उत्तर:
बच्चियाँ साहित्य पढती हैं।

94. मैं तो आज खिचड़ी बना रही हूँ।
उत्तर:
हम तो आज खिचडियाँ बना रहे हैं।

11. काल बदलिए

* सूचना के अनुसार काल बदलकर लिखिए।

95. बिस्तर खोल दिया था। (वर्तमानकाल में बदलिए।)
उत्तर:
बिस्तर खोल देता है।

96. इस चित्रण को पढ़कर चकित भी होता है। (भूतकाल में बदलिए)
उत्तर:
इस चित्रण को पढ़कर चकित हुआ।

97. मेरी पत्नी ने तुम्हें सादर प्रणाम की थी। (वर्तमानकाल में बदलिए।)
उत्तर:
मेरी पत्नी तुम्हें सादर प्रणाम करती है।

98. हम तुम से रुकने के लिए आग्रह करते हैं। (भविष्यतकाल में बदलिए।)
उत्तर:
हम तुम से रुकने के लिए आग्रह करेंगे।

99. मैं कहता हूँ। (भूतकाल में बदलिए।)
उत्तर:
मैं ने कहा।

100. मन छोटा होने लगता है। (भविष्यत काल में बदलिए ।)
उत्तर:
मन छोटा होने लगेगा।

12. शुद्ध रूप में लिखना

* वाक्यों को शुद्ध रूप में लिखिए।

101. वह गहरी नींद में हो।
उत्तर:
वह गहरी नींद में है।

102. कपडे लॉण्ड्री को दे देते हैं।
उत्तर:
कपडे लॉण्ड्री पर दे देते हैं।

103. तुम तुम्हारा नाम बताओ।
उत्तर:
तुम अपना नाम बताओ।

104. आप बाज़ार जाकर सब्जियाँ लाओ।
उत्तर:
आप बाज़ार जाकर सब्ज़ियाँ लाइए।

105. मैं को पैसे चाहिए।
उत्तर:
मुझे पैसे चाहिए।

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106. अतिथि उसका घर जाता है।
उत्तर:
अतिथि अपना घर जाता है।

भाग- II Q.No. 13-16

Q.No.13

पठित गद्यांश

* निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर उत्तर अनुच्छेद में से ही पहचानकर लिखिए।

1. शरद जोशी की भाषा अत्यन्त सरल और सहज है। मुहावरों और हास – परिहास का हलका स्पर्श देकर इन्होंने अपनी रचनाओं को अधिक रोचक बनाया है। धर्म, अध्यात्म, राजनीति, सामाजिक जीवन व्यक्तिगत आचरण कुछ भी शरद जोशी की पैनी नज़र से बज नहीं सका है। इन्होंने अपनी व्यंग्य – रचनाओं में समाज में पाई जाने वाली सभी विसंगतियों का बेबाक चित्रण किया है। पाठक इस चित्रण को पढ़कर चकित भी होता है और बहुत कुछ सोचने को विवश भी ।

प्रश्न:

अ) ‘इक’ प्रत्यय से युक्त शब्द पहचानकर लिखिए|
उत्तर:
सामाजिक

आ) ‘आ’ उपसर्ग से युक्त शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
आचरण

इ) ‘सरल’ शब्द का विलोम शब्द क्या है?
उत्तर:
कठिन

ई) ‘नज़र’ शब्द का पर्याय शब्द लिखिए।
उत्तर:
निगाह, दृष्टि

उ) इस चित्रण को पढ़कर चकित भी होता है। वाक्य में सर्वनाम शब्द पहचानिए।
उत्तर:
इस

2. तुम यहाँ बैठे निस्संकोच सिगरेट का धुआँ फेंक रहे हो। उसके ठीक सामने एक कैलेंडर है। देख रहे हो ना। इसकी तारीखे अपनी सीमा में नम्रता से फड़फड़ाती रहती है। विगत दो दिनों से मैं तुम्हें दिखाकर तारीखें बदल रहा हूँ।

प्रश्न:

अ) ‘ठीक’ शब्द का विलोम शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
गलत

आ) सीमा शब्द का पर्याय शब्द लिखिए।
उत्तर:
किनारा, छोर, सिरा

इ) निस्संकोच शब्द में उपसर्ग पहचानिए|
उत्तर:
निस्

ई) प्रत्यय से युक्त शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
नम्रता

उ) उपर्युक्त गद्यांश के लेखक कौन है?
उत्तर:
शरद जोशी

3. उस दिन जब तुम आए थे, मेरा हृदय किसी अज्ञात आशंका से धड़क उठा था। अंदर – ही – अंदर कहीं मेरा बटुआ काँप गया। उसके बावजूद एक स्नेह – भीगी मुस्कुराहट के साथ मैं तुम से गले मिला था और मेरी पत्नी ने तुम्हें सादर नमस्ते की थी।

प्रश्न:

अ) अंदर शब्द का विलोम शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
बाहर

आ) आहट प्रत्यय से युक्त शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
मुस्कुराहट

इ) स्नेह शब्द का पर्याय शब्द लिखिए।
उत्तर:
प्रीति, चाह, इश्क

ई) ‘आ’ उपसर्ग से युक्त शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
आशंका

उ) किसी अज्ञान आशंका से धडक उठा था। वाक्य में क्रिया शब्द पहचानिए।
उत्तर:
उठना

4. यह आघात अप्रत्याशित था और इसकी चोट मार्मिक थी। तुम्हारे सामीप्य की बेला एकाएक यों रबर की तरह खिंच जाएगी, इसका मुझे अनुमान न था। पहली बार मुझे लगा कि अतिथि सदैव देवता नहीं होता, वह मानव और थोडे अंशों में राक्षस भी हो सकता है।

प्रश्न:

अ) इक प्रत्यय से युक्त शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
मार्मिक

आ) राक्षस शब्द का विलोम शब्द लिखिए।
उत्तर:
दानव, मानव

इ) अनु उपसर्ग से युक्त शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
अनुमान

ई) मानव शब्द का पर्याय शब्द लिखिए|
उत्तर:
आदमी, इंसान, मनुज

उ) वह मानव और थोडे अंशों में राक्षस भी हो सकता है। (इस वाक्य में सर्वनाम शब्द पहचानिए।)
उत्तर:
वह

5. सौहार्द अब शनैः शनैः बोरियत में रूपांतरित हो रहा है। भावनाएँ गलियों का स्वरूप कर रही है पर तुम जा नहीं रहे। किस अदृश्य गोंद से तुम्हारा व्यक्तित्व यहाँ चिपक गया है, मैं इस भेद को सपरिवार नहीं समझ पा रहा हूँ। बार बार यह प्रश्न उठ रहा है तुम कब जाओगे अतिथि?

प्रश्न:

अ) अ उपसर्ग से युक्त शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
अदृश्य

आ) इत प्रत्यय से युक्त शब्द पहचानकर लिखिए।
उत्तर:
रूपांतरित

इ) प्रश्न शब्द का विलोम शब्द क्या है?
उत्तर:
उत्तर

ई) सौहार्द शब्द का पर्याय शब्द क्या है?
उत्तर:
दोस्ती, मैत्री, मित्रता

उ) तुम कब जाओगे अतिथि! (संज्ञा शब्द पहचानिए|)
उत्तर:
अतिथि

Q.No. 15

पठित गद्यांश

* निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए।

1. आज तुम्हारे आगमन के चतुर्थ दिवस पर यह प्रश्न बार- बार मन में घुमड़ रहा है – तुम कब जाओगे, अतिथि? तुम जहाँ बैठे निस्संकोच सिगरेट का धुआँ फेंक रहे हो, उसके ठीक सामने एक कैलेंडर है। देख रहे हो ना! इसकी तारीखें अपनी सीमा में नम्रता से फड़फड़ाती रहती हैं। विगत दो दिनों से मैं तुम्हें दिखाकर तारीखें बदल रहा हूँ।

प्रश्न:

अ) चतुर्थ दिवस किसका आगमन हुआ है?
उत्तर:
चतुर्थ दिवस अतिथि का आगमन हुआ।

आ) अतिथि के सामने क्या है?
उत्तर:
अतिथि के सामने एक कैलेंडर है।

इ) लेखक के मन में क्या घुमड रहा है?
उत्तर:
तुम कब जाओगे अतिथि?

ई) अतिथि आकर कितने दिन बीत चुके हैं?
उत्तर:
अतिथि आकर चार दिन बीत चुके हैं।

उ) उपर्युक्त गद्यांश का लेखक कौन हैं?
उत्तर:
शरद जोशी

AP 9th Class Hindi Sparsh 3rd Lesson Important Questions तुम कब जाओगे, अतिथि

2. शरद जोशी का जन्म मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में 21 मई, 1931 को हुआ। इनका बचपन कई शहरों में बीता। कुछ समय तक यह सरकारी में रहे, फिर इन्होंने लेखन को ही आजीविका के रूप में अपना लिया। इन्होंने आरंभ में कुछ कहानियाँ लिखी, फिर पूरी तरह व्यंग्य – लेखन ही करने लगे।

प्रश्न:

अ) शरद जोशी का जन्म कब हुआ?
उत्तर:
शरद जोशी का जन्म मई को हुआ।

आ) शरद जोशी का जन्म कहाँ हुआ?
उत्तर:
शरद जोशी का जन्म मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में हुआ।

इ) जोशी जी पहले किस नौकरी में थे?
उत्तर:
जोशी जी पहले सरकारी नौकरी में थे।

ई) जोशी जी का बचपन कहाँ बीता?
उत्तर:
जोशी जी का बचपन शहर में बीता।

उ) जोशी जी लेखन को किस रूप में अपना लिया?
उत्तर:
जोशी जी लेखन को आजीविका के रूप में अपना लिया।

3. मेरी पत्नी ने तुम्हें सादर नमस्ते की थी। तुम्हारे सम्मान में ओ अतिथि, हम ने रात के भोजन को एकाएक उच्च-मध्यम वर्ग के डिनर में बदल दिया था। तुम्हें स्मरण होगा कि दो सब्ज़ियों और रायते के अलावा हमने मीठा भी बनाया था। इस सारे उत्साह और लगन के मूल में एक आशा थी।

प्रश्न:

अ) किसने अतिथि को सादर नमस्ते की थी?
उत्तर:
लेखक की पत्नी ने अतिथि को सादर नमस्ते की थी।

आ) लेखक किसको सम्मान करना चाहता है?
उत्तर:
लेखक अतिथि को सम्मान करना चाहता है।

इ) लेखक ने कब भोजन को डिनर में बदल दिया था?
उत्तर:
लेखक ने रात के भोजन को डिनर में बदल दिया था।

ई) दो सब्ज़ियों और रायते के अलावा लेखक ने क्या बनाया था?
उत्तर:
दो सब्ज़ियों और रायते के अलावा लेखक ने मीठा भी बनाया था।

उ) उपर्युक्त गद्यांश किस पाठ से दिया गया था?
उत्तर:
उपर्युक्त गद्यांश तुम कब जाओगे अतिथि नामक पाठ से दिया गया था।

4. मैं जानता हूँ। दूसरों के यहाँ अच्छा लगता है। अगर बस चलता तो सभी लोग दूसरों के वहाँ रहते, पर ऐसा नहीं हो सकता। अपने घर की महत्ता के गीत इसी कारण गाएं गए हैं। होम को इसी कारण स्वीट – होम कहा गया है कि लोग दूसरे के होम की स्वीटनेस को काटने न दौडे। तुम्हें यहाँ अच्छा लग रहा है, पर सोचो प्रिय कि शराफत भी कोई चीज़ होती है। और गेट आउट भी एक वाक्य है, जो बोला जा सकता है।

प्रश्न:

अ) कहाँ रहना अच्छा लगता है?
उत्तर:
दूसरों के यहाँ रहना अच्छा लगता है।

आ) अगर बस चलता तो सब लोग कहाँ रहते हैं?
उत्तर:
अगर बस चलता तो सब लोग दूसरों के यहाँ रहते हैं।

इ) इस गद्यांश में होम को क्या कहाँ गया है?
उत्तर:
इस गद्यांश में होमं को ‘स्वीट होम’ कहा गया है।

ई) अपना शब्द का विलोम शब्द क्या है?
उत्तर:
पराया

उ) लोग दूसरे के होम को क्या करना चाहते हैं?
उत्तर:
लोग दूसरों के होम को स्वीटनस को काटने के लिए तैयार हो जाते हैं।

5. मेरी सहनशीलता की वह अंतिम सुबह होगी। उसके बाद मैं स्टैंड नहीं कर सकूँगा और लड़खड़ा| जाऊँगा। मेरे अतिथि, मैं जानता हूँ कि अतिथि देवता होता है, पर आखिर मैं भी मनुष्य हूँ। मैं कोई तुम्हारी तरह देवता नहीं। एक देवता और एक मनुष्य अधिक देर साथ नहीं रहते। देवता दर्शन देकर लौट जाता है। तुम लौट जाओ अतिथि! इसी में तुम्हारा देवत्व सुरक्षित रहेगा।

प्रश्न:

अ) ‘वह अंतिम सुबह होगी’ इस वाक्य को किसने कहा?
उत्तर:
लेखक ने इस वाक्य को कहा।

आ) अतिथि कौन होता है?
उत्तर:
अतिथि देवता होता है।

इ) देवता किसके साथ अधिक देर साथ नहीं रहते?
उत्तर:
देवता, मनुष्य के साथ अधिक देर साथ नहीं रहते।

ई) सुरक्षित में प्रत्यय क्या है?
उत्तर:
इत

उ) मनुष्य को दर्शन देकर कौन लौट जाते हैं?
उत्तर:
मनुष्य को दर्शन देकर देवता लौट जाते हैं।

Q.No. 16

पठित गद्यांश

* निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।

1. अपनी पीडा पीली और प्रसन्न बने रहे। स्वागत सत्कार के जिस उच्च बिन्दु पर हम तुम्हें ले जा चुके थे, वहाँ से नीचे उत्तर हमने फिर दोपहर के भोजन को लंच की गरिमा प्रदान की और रात्रि में तुम्हें सिनेमा दिखाया। हमारे सत्कार का यह आखिरी छोर है, जिससे आगे हम किसी के लिए नहीं बढ़े। इसके तुरन्त बाद भावभीनी विदाई का वह भीगा हुआ क्षण आ जाना चाहिए था, जब तुम विदा होते और हम तुम्हें स्टेशन तक छोडने जाते।

प्रश्न:

अ) अपनी पीडा पीकर कैसे बने रहे? (B)
A) उदास
B) प्रसन्न
C) क्रोधित
D) भयभीत
उत्तर:
B) प्रसन्न

आ) हम तुम्हें ….. तक छोडने जाते। (D)
A) गाँव
B) शहर
C) स्कूल
D) स्टेशन
उत्तर:
D) स्टेशन

इ) ‘आगे’ शब्द का विलोम शब्द क्या है? (C)
A) नीचे
B) ऊपर
C) पीछे
D) उसके
उत्तर:
C) पीछे

ई) लेखक ने अतिथि को रात्रि में क्या दिखाया? (C)
A) अचकन
B) कलम
C) सिनेमा
D) पुस्तक
उत्तर:
C) सिनेमा

उ) जिसे उच्च बिंदु पर हम तुम्हें ले जा चुके थे ‘तुम्हें’ माने कौन है? (A)
A) अतिथि
B) लेखक
C) पत्नी
D) घर के सदस्य
उत्तर:
A) अतिथि

2. पहली बार मुझे लगा कि अतिथि सदैव देवता नहीं होता, वह मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता है। “किसी लॉण्ड्री पर दे देते हैं, जल्दी धुल जाएँगे।” मैं ने कहा। मन ही मन एक विश्वास पल रहा था कि तुम्हें जल्दी जाना है। कहाँ है लॉण्ड्री?

प्रश्न:

अ) अतिथि सदैव कौन नहीं होता? (B)
A) राक्षस
B) देवता
C) मित्र
D) शत्रु
उत्तर:
B) देवता

आ) मानव थोडे अंशों में कौन हो सकता है? (A)
A) राक्षस
B) मित्र
C) शत्रु
D) देवता
उत्तर:
A) राक्षस

इ) कहाँ देने से कपडे जल्दी धुल जाएँगे? (C)
A) दफतर पर
B) स्टेशन पर
C) लॉण्ड्री पर
D) स्कूल में
उत्तर:
C) लॉण्ड्री पर

ई) ‘अनुमान’ शब्द में उपसर्ग पहचानिए। (D)
A) आ
B) नु
C) मान
D) अनु
उत्तर:
D) अनु

उ) “कहाँ है लॉण्ड्री” यह वाक्य किसने कहा? (B)
A) लेखक
B) अतिथि
C) पत्नी
D) पुत्र
उत्तर:
B) अतिथि

3. मेरी पत्नी की आँखें एकाएक बडी हो गई। आज से कुछ बरस पूर्व उनकी ऐसी आँखें देख मैंने अपने अकेलेपन की यात्रा समाप्त कर बिस्तर खोल दिया था। पर अब जब वे ही आँखें बडी होती हैं तो मन छोटा होने लगता है । वे इस आशंका और भय से बडी हुई थी कि अतिथि अधिक दिनों ठहरेगा।

प्रश्न:

अ) किसकी आँखें बड़ी – बडी हो गई? (A)
A) पत्नी
B) अतिथि
C) लेखक
D) कुमार
उत्तर:
A) पत्नी

आ) अकेलापन शब्द में प्रत्यय पहचानिए। (C)
A) अके
B) न
C) पन
D) लापन
उत्तर:
C) पन

इ) यात्रा समाप्त करके क्या खोल दिया था? (B)
A) पुस्तक
B) बिस्तर
C) अलमारा
D) घर
उत्तर:
B) बिस्तर

ई) वे इस आशंका और … से बडी हुई थी। (C)
A) शान्त
B) क्रोध
C) भय
D) उत्साह
उत्तर:
C) भय

उ) कौन अधिक दिनों ठहरेगा? (D)
A) लेखक
B) पुत्र
C) पत्नी
D) अतिथि
उत्तर:
D) अतिथि

AP 9th Class Hindi Sparsh 3rd Lesson Important Questions तुम कब जाओगे, अतिथि

4. डिनर से चले थे, खिचडी पर आ गए। अब भी अगर तुम अपने बिस्तर को गोलाकार रूप नहीं प्रदान करते तो हमें उपवास तक जाना होगा। तुम्हारे जाने का यह चरम क्षण है। तुम जाओ न अतिथि! तुम्हें यहाँ अच्छा लग रहा है न । मैं जानता हूँ दूसरों के यहाँ अच्छा लगता है।

प्रश्न:

अ) …… के यहाँ अच्छा लगता है। (B)
A) पुलीसों
B) दूसरों
C) चोरों
D) अध्यापकों
उत्तर:
B) दूसरों

आ) किसको गोलाकार रूप नहीं प्रदान करते? (A)
A) बिस्तर
B) साडी
C) कागज़
D) रुमाल
उत्तर:
A) बिस्तर

इ) अच्छा शब्द का विलोम शब्द क्या है? (C)
A) कुरूप
B) बेपरवाह
C) बुरा
D) लंबा
उत्तर:
C) बुरा

ई) किसे जाने का यह चरम क्षण है? (B)
A) आतंक
B) अतिथि
C) लेखक
D) पत्नी
उत्तर:
B) अतिथि

उ) किसको उपवास तक जाना होगा? (B)
A) पत्नी
B) अतिथि
C) लेखक
D) कुमार
उत्तर:
B) अतिथि

5. रात गुंजायमान करने के बाद कल जो किरण तुम्हारे बिस्तर पर आएगी। वह तुम्हारे यहाँ आगमन के बाद पाँचवें सूर्य की परिचित किरण होगी। आशा है, वह तुम्हें चूमेगी और तुम घर लौटने का सम्मानपूर्ण निर्णय ले लोगे। मेरी सहनशीलता की वह अंतिम सुबह होगी। उसके बाद मैं स्टैंड नहीं कर सकूँगा और लड़खड़ा जाऊँगा। मेरे अतिथि, मैं जानता हूँ कि अतिथि देवता होता है, पर आखिर मैं भी मनुष्य हूँ। मैं कोई तुम्हारी तरह देवता नहीं। एक देवता और एक मनुष्य अधिक देर साथ नहीं रहते। देवता दर्शन देकर लौट जाता है।

प्रश्न:

अ) मेरी सहनशीलता की वह अंतिम सुबह होगी। इस वाक्य में ‘मेरी’ माने कौन है? (A)
A) लेखक
B) अतिथि
C) पत्नी
D) पुत्र
उत्तर:
A) लेखक

आ) कौन दर्शन देकर लौट जाते हैं? (C)
A) पुत्र
B) पत्नी
C) देवता
D) राक्षस
उत्तर:
C) देवता

इ) कल जो तुम्हारे बिस्तर पर आएगी। (B)
A) नक्षत्र
B) किरण
C) फल
D) फूल
उत्तर:
B) किरण

ई) आगमन शब्द में उपसर्ग पहचानिए। (D)
A) मन
B) गमन
C) अ
D) आ
उत्तर:
D) आ

उ) उपर्युक्त गद्यांश का लेखक कौन है? (A)
A) शरद जोशी
B) प्रेमचन्द
C) जयशंकर प्रसाद
D) निराला
उत्तर:
A) शरद जोशी

भाग- III Q.No.17-18

Q.No.18

लेखक परिचय

* निम्न लिखित प्रश्नों के उत्तर चार पंक्तियों में लिखिए।

प्रश्न 1.
‘शरद जोशी’ के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
कवि – शरद जोशी
जन्म, नौकरी – 21 मई, 1931 को हुआ, सरकारी
आजीविका – कहानियाँ, नाटक, उपन्यास और व्यंग्य लेखन
भाषा – सरल और सहज
व्यंग्य कृतियाँ – दूसरी सतह, परिक्रमा, तिलस्म आदि।
नाटक – अंधों का हाथी और एक था गधा।
उपन्यास – मैं, मैं केवल मैं, उर्फ कमलसुख बी. ए.
विशेषता – समाज में पाई जाने वाली सभी विसंगतियों का बेबाक चित्रण किया है।

भाग- IV Q.No.19-26

Q.No. 21-23

* निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में लिखिए।

प्रश्न 1.
गाँव और शहरों के आतिथ्य सत्कार में आपको क्या अंतर दिखाई देता है?
उत्तर:
गाँव में अतिथि सत्कार शहर की तुलना में अधिक दिखाई पड़ता है। वहाँ के लोग आडंबर नहीं करते। किसी एक का मेहमान सारे गाँव का मेहमान माना जाता है। गाँव के सभी लोग उसकी सुविधाओं का ध्यान रखते हैं। उसके मनोरंजन का ध्यान रखते हैं। शहरों में ऐसा नहीं होता। लोगों में आपसी घनिष्ठता भी कम होती है। शहरी लोग अतिथि के आगमन को अपने लिए कठिनाई मानते हैं।

प्रश्न 2.
लेखक ने अतिथि को देवता न मानकर राक्षस के समान क्यों माना है?
उत्तर:
लेखक ने अतिथि को देवता न मानकर राक्षस के समान इसलिए माना कि मेरे अतिथि, मैं जानता हूँ कि अतिथि सदैव देवता नहीं होता, बल्कि एक मनुष्य होता है। जिस अतिथि में राक्षस के कुछ अंश होते हैं वहाँ मेहमान को असहाय पीडा होने लगता है। अतिथि को कोई सम्मान नहीं करता।

प्रश्न 3.
अतिथि को आया देख लेखक की क्या दशा हुई और क्यों?
उत्तर:
अतिथि को आया देख लेखक का मन धडक उठा था। अंदर ही अंदर कहीं मेरा बटुआ काँप गया। अतिथि अब पता नहीं कितने दिन रुकेगा। अतिथि अधिक दिन रुकने पर आर्थिक बजट भी खराब हो जाएगा।

प्रश्न 4.
कैलेण्डर की तारीखें फडफडाने का क्या आशय है?
उत्तर:
अतिथि जहाँ बैठे वहाँ निस्संकोच सिगरेट का धुआँ फेक रहता है। उसके सामने कैलेंडर है। लेखक ने अतिथि के जाने के इन्तज़ार में लेखक के दिन बहुत बेचैनी से बीत रहे थे।

प्रश्न 5.
लेखक अपने अतिथि को दिखाकर दो दिनों से कौन सा कार्य कर रहा था और क्यों?
उत्तर:
लेखक अपने अतिथि को दिखाकर दो दिनों से कैलेंडर में तारीखे बदल रहा था वह अतिथि को यह बताना चाहता है कि उसे यहाँ रहते हुए चार दिन बीत चुके थे। इस तरह लेखक ने सोचा कि अतिथि कहीं घर जाने को तैयार हो जाय ।

प्रश्न 6.
लेखक अतिथि को कैसी विदाई देना चाहता था?
उत्तर:
लेखक अतिथि को भावभीनी विदाई देना चाहता था। जब अतिथि जाए तो पति – पत्नी उसे स्टेशन तक छोडने जाए। वे उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई देना चाहते थे।

प्रश्न 7.
लेखक का भावभीनी विदाई से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
भावभीनी विदाई का तात्पर्य था कि जब अतिथि घर से जाता है, तो सबके मन भीग जाते हैं। परिवार वाले दुःख से अतिथि को स्टेशन छोडने जाते हैं। एक- दूसरे को प्रेम भरे आँखों की आँसुओं से भिगो देते हैं।

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प्रश्न 8.
लेखक ने अतिथि की तुलना एस्ट्रॉनाट्स से क्यों की?
उत्तर:
लेखक ने अतिथि की तुलना एस्ट्रानाट्स से की कि लाखों मील लंबी यात्रा करने के बाद वे दोनों एस्टॉनाट्स भी इतने समय चाँद पर नहीं रुके थे, जितने समय तुम एक छोटी सी यात्रा कर मेरे घर आए हो ।

प्रश्न 9.
तीसरे दिन सुबह अतिथि ने क्या कहा?
उत्तर:
तीसरे दिन सुबह अतिथि ने लॉण्ड्री में कपडे देने को कहा। क्योंकि वह उससे कपडे धुलवाना चाहता था। अतिथि और कुछ दिन वहाँ रहना चाहता है।

प्रश्न 10.
आज की बदली हुई परिस्थिति में अतिथि के आगमन पर हमारा क्या उत्तरदायित्व है?
उत्तर:
आज की बदली हुई परिस्थिति में अतिथि के आगमन पर हमारा उत्तरदायित्व है कि

  1. हम अतिथि का सहृदयता से स्वागत करें।
  2. अतिथि की पहचान सही ढंग से कर लें।
  3. अनजान आदमी को आतिथ्य जाँच-पड़ताल के बाद ही दें।
  4. अतिथि के सेवा – सत्कार में आडंबर न करें।
  5. उसके आगमन के बाद भी अपना स्वाभाविक रहन-सहन, खान-पान बनाए रखें।

प्रश्न 11.
यदि आप अतिथि बनकर कहीं जाते हैं तो आपकी क्या अपेक्षाएँ होती हैं?
उत्तर:
अतिथि के रूप में मेरी अपेक्षा होती है कि लोग मुझसे प्रेम से मिलें। मैं उनका हाल-चाल जान सकूँ। यदि मुझसे उनकी कोई सहायता हो सके तो कर सकूँ। जब तक उनके घर में रहूँ उनके काम में हाथ बटा सकूँ। मेरे कारण उनको कोई कठिनाई न हो।

प्रश्न 12.
घर आए अतिथि को आप अपनी कौन- कौनसी वस्तुएँ प्रसन्नतापूर्वक देना चाहेंगे?
उत्तर:
अतिथि को मैं दैनिक उपयोग की सभी वस्तुओं की सुविधा दूँगा जिससे उसे किसी प्रकार की कठिनाई न हो। मैं उसके खान-पान का ध्यान रखूँगा। अपने खिलौने भी उसे खेलने के लिए दूँगा। अपनी किताबें उन्हें पढ़ने के लिए दूँगा।

प्रश्न 13.
आपकी दृष्टि में अच्छे अतिथि के क्या लक्षण हैं?
उत्तर:
अच्छा अतिथि वह है जो समय बताकर किसी के घर जाए। अधिक समय तक मेहमान के घर न रुके। सबसे प्रेम से मिलें। कोई माँग न करे। जो मिले रुचि के साथ खाए । सबका हाल-चाल पूछे। किसी को कुछ परेशानी हो तो सहायता करे। जब तक अतिथि रहे उनके कामों में हाथ बटाए । उनके दैनिक क्रियाकलाप में बाधक न बने। हमेशा ध्यान रखे कि उसके कारण आतिथ्य देने वाले को कठिनाई न होने पाए ।

प्रश्न 14.
“संबंधों के संक्रमण के दौर से गुज़रना” इस पंक्ति से आप क्या समझते हैं? विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
“संबंधों के संक्रमण के दौर से गुज़रना” से अभिप्राय है – संबंध खराब होने की ओर अग्रसर होना। लेखक के घर अतिथि का आगमन होता है। लेखक उसका स्वागत करता है। किंतु जब अतिथि चार दिनों तक नहीं लौटता तो उनके संबंध खराब होने लगते हैं। जैसे-जैसे आतिथ्य की सीमा बढ़ती है वैसे-वैसे उनके संबंध खराब होते चले जाते हैं। अब लेखक उससे चर्चाएँ बंद कर देता है। अब उनके बीच हँसी के ठहाके नहीं गूँजते। शब्दों का लेन-देन मिट जाता है। अतः संबंध तभी तक अच्छे रहते हैं जब तक हम एक-दूसरे पर बोझ न बनें। यदि हम स्वयं को किसी पर थोपने का प्रयास करते हैं तो संबंधों के संक्रमण का दौर आरंभ हो जाता है।

प्रश्न 15.
लेखक ने अतिथि को क्या- क्या सुविधाएँ प्रदान कीं?
उत्तर:
लेखक ने अतिथि को खाने-पीने की अच्छी सुविधा दी। उसे घर पर खिलाया। होटल में खिलाया। सिनेमा दिखाया। उसके मनोरंजन की व्यवस्था की। उसके पढ़ने के लिए किताबें और पत्रिकाएँ दीं। स्वयं भी उसकी बोरयत दूर करने के लिए उससे चर्चाएँ करता रहा। उसके कपड़े लॉण्ड्री में धुलवाए। उसके रहने तथा सोने की समुचित व्यवस्था की। उसके लिए अच्छा बिस्तर लगवाया। समय पर उसके बिस्तर का चादर बदला। उसकी आवश्यकता की सभी वस्तुएँ उपलब्ध करवाई।

प्रश्न 16.
आपके यहाँ एक सप्ताह के लिए यदि आपके नाना नानी आकर रहें तो आप उनकी किस प्रकार सेवा करेंगे?
उत्तर:
मैं अपने नाना-नानी की हर सुविधा का ध्यान रखूँगा। सुबह में सैर कराऊँगा। अपने आसपास के दर्शनीय स्थल की सैर कराऊँगा। उन्हें अच्छे पकवान खिलाऊँगा। उन्हें अपने किताबों की कहानियाँ सुनाऊँगा ताकि वे बोर न हों। उनसे भी उनके अनुभव सुनूँगा। सुबह उठते ही उनके पैर छुऊँगा। उनके आशीर्वाद लूँगा। सोते समय उनके पैर दबाऊँगा। अपने मित्रों को बुलाकर उनसे मिलवाऊँगा। उनके साथ ज्ञानवर्द्धक चर्चाएँ करूँगा।

प्रश्न 17.
तुम कब जाओगे अतिथि पाठ का मूल भाव क्या है?
उत्तर:
तुम कब जाओगे अतिथि पाठ का मूल यह है कि मनुष्य और देवता ज़्यादा देर साथ नहीं रह सकते। इसलिए अपना देवत्व सुरक्षित रखना चाहते हो तो अपने आप विदा हो जाओ।

प्रश्न 18.
अधिक समय रहने पर अतिथि क्या हो जाते हैं?
उत्तर:
अतिथि जब बहुत दिनों तक किसी के घर ठहर जाता है तो ‘अतिथि देवो भव’ का मूल्य हो जाता है। आने के एक दिन बाद वह सामान्य जाता है अर्थात् इतना बुरा भी नहीं लगता इसलिए इसे मानव रूप में कहा है और ज्यादा दिन रह जाए तो राक्षस जैसा प्रतीत जाता है। अर्थात् बुरा लगने लगता है।

प्रश्न 19.
लेखक ने पाठ में एस्ट्रनॉट्स का उल्लेख किस संदर्भ में किया है?
उत्तर:
लेखक ने एस्ट्रनॉट्स का उल्लेख घर आये हुए अतिथि के लिए किया है। लेखक अतिथि को यह बताना चाहता है कि लाखों मील लंबी यात्रा करने के बाद एस्ट्रॉनॉटस भी चाँद पर इतने समय नहीं रुके थे जितने समय से अतिथि लेखक के घर रुका हुआ है।

प्रश्न 20.
दूसरे दिन लेखक को क्या उम्मीद थी?
उत्तर:
लेखक ने अपनी पीडा पी ली और प्रसन्न रहे। लेखक ने फिर दोपहर के भोजन को लंच की गरिमा प्रदान की और रात्रि को अतिथि को सिनेमा दिखाया। हमारे सत्कार का यह आखिरी छोर है, जिससे आगे लेखक कभी किसी के लिए नहीं बढ़े। इसके तुरंत बाद लेखक को अनुमान था कि विदाई का वह भीगा हुआ क्षण आ जाना चाहिए था, जब अतिथि विदा होते और हम तुम्हें स्टेशन तक छोडने जाते। पर तुम ने ऐसा नहीं किया।

प्रश्न 21.
लेखक अपने अतिथि को दिखाकर दो दिनों से कौन सा कार्य कर रहा था और क्यों?
उत्तर:
लेखक अपने अतिथि को दिखाकर दो दिनों से कैलेंडर में तारीखें बदल रहा था। ऐसा करके वह अतिथि को यह बताना चाह रहा था कि उसे यहाँ रहते हुए चौथा दिन शुरु हो गया है। तारीखें देखकर शायद उसे अपने घर जाने की याद आ जाए। पर अतिथि जाने की कोई संभावना प्रतीत नहीं होती।

प्रश्न 22.
तीसरे दिन सुबह अतिथि ने लेखक से क्या कहा?
उत्तर:
तीसरे दिन सुबह अतिथि ने लेखक से कहा कि वह धोबी को कपडे देना चाहता है। लेखक ने अतिथि से कहा कि कपड़ों को किसी लॉण्ड्री पर दे देते हैं जल्दी धुल जाएँगे। लेखक के मन ही मन एक विश्वास पल रहा था कि अतिथि तुम्हें जल्दी जाना है। लॉण्ड्री पर दिए कपडे धुलकर आ गए। अतिथि अब भी लेखक के घर पर ही था।

प्रश्न 23.
लेखक ने अतिथि का स्वागत सत्कार कैसे किया?
उत्तर:
लेखक ने अतिथि को अपने घर आया देखा तो लेखक में स्नेह भीगी मुस्कुराहट के साथ लेखक ने अतिथि से गले मिला था और उसकी पत्नी ने अतिथि को सादर नमस्ते की थी। अतिथि के सम्मान में हमेशा के साधारण भोजन के स्थान पर उच्च मध्यम वर्ग का डिनर में बदल दिया था। जिसमें दो सब्ज़ियों के अलावा रायता और मीठा भी बनवाया था।

AP 9th Class Hindi Sparsh 3rd Lesson Important Questions तुम कब जाओगे, अतिथि

प्रश्न 24.
अतिथि पिछले चार दिनों से लेखक के घर पर क्या कर रहे थे?
उत्तर:
अतिथि लेखक के घर पर पिछले चार दिनों से रह रहा था और अभी तक जाने का नाम नहीं ले रहा था। कैलेंडर की तारीखें अपनी सीमा में नम्रता से पंछी के पंखा की तरह फडफडा रही है।

प्रश्न 25.
सत्कार की ऊष्मा समाप्त होने पर क्या हुआ?
उत्तर:
सत्कार की उष्मा समाप्त होने पर लंच डिनर की जगह खिचडी बनने लगी थी। खाने में सादगी आ गई अब भी अतिथि नहीं जाता तो उपवास तक रखना पड़ सकता था।

भाग – V Q.No.27-28

Q.No. 28

* निम्नलिखित निबंधात्मक प्रश्नों के उत्तर सूचना के अनुसार लिखिए।

प्रश्न 1.
लेखक के स्थान पर यदि आप होते तो अतिथि के चार दिनों तक रुके रहने पर क्या करते?
उत्तर:
लेखक के स्थान पर मैं होता तो – अतिथि को देखकर मुस्कुराहट धीरे – धीरे फीकी पडती हैं। वह आने पर चेहरे पर रंग-बिरंगे हाव – भाव होते हैं। वह थोडे दिन रुके तो अच्छा होता। लेकिन ज़्यादा दिन ठहर जाए तो स्वागत करने वाले की सहनशीलता समाप्त हो जाती है। चेहरे पर आने की मुस्कुराहट उसके अधिक दिन ठहरने के कारण गायब हो जाती है। बातचीत के विषय समाप्त हो जाते हैं। सहृदय प्रेम व्यवहार उदास में बदल जाता है। अतिथि को सत्कार करते करते मैं तंग जाता हूँ। परेशान हो जाता, उपवास तक जाने का तैयार होता हूँ आखिर अतिथि को घर से निकल जाने के लिए आग्रह करता हूँ।

प्रश्न 2.
अतिथि देवो भव उक्ति की व्याख्या करें तथा आधुनिक युग के संदर्भ में इसका स्पष्ट करें।
उत्तर:
भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता का दर्जा दिया जाता है। उसे देवता के समान मानकर उसका आदर सत्कार किया जाता है। आज के आधुनिक भौतिकवादी युग में मनुष्य यांत्रिक जीवन बिता रहा है। उसके पास अपने परिवार के लिए इतना समय नहीं था। अतिथि के लिए समय कैसे निकालते। इस आधुनिक यगु में कमाई भी ज्यादा नहीं है। परिवार के सब सदस्य काम करने पर घर संभाल जाते हैं। इस तरह जीवन होने पर अतिथि को कैसे संभालते महँगाई के इस युग में अपनी घर की जरूरतें पूरी करना कठिन हो रहा है। अतिथि को सत्कार सम्मान करने पर बजट बढ़ती है। इसलिए कोई भी अतिथि देवता जैसे दर्शन देकर घर चले जाने चाहिए। या मनुष्य को अतिथि से दूर ही रहना चाहिए।

प्रश्न 3.
अतिथि की ओर लेखक का मन कैसे बदल गया था?
उत्तर:
लेखक ने अतिथि से घर परिवार, बच्चे, नौकरी, फ़िल्म, राजनीति, रिश्तेदारी, तबादले, पुराने दोस्त, परिवार नियोजन महँगाई, साहित्य और यहाँ तक कि आँख मार मारकर लेखक और अतिथि ने पुरानी प्रेमिकाओं का भी जिक्र कर लिया और अब एक चुप्पी है। हृदय की सरलता अब धीरे – धीरे बोरियत में बदल गई थी। पर अतिथि जा नहीं रहा था। अब लेखक ने मन में बार- बार यह प्रश्न उठा था कि तुम कब जाओगे अतिथि? लेखक की पत्नी ने धीरे से पूछा था, कब तक टिकेंगे ये? लेखक नें कंधे उचकाकर कहा था कि वह क्या कह सकता है। लेखक की पत्नी ने गुस्से से कहा कि वह अब से खिचडी बनाएगी। क्योंकि वह खाने में हल्की रहेगी। अतिथि के सत्कार करने की उसकी क्षमता अब समाप्त हो रही थी डिनर से चले थे, खिचडी पर आ गए थे। अब भी अगर अतिथि नहीं जाता तो लेखक और उसकी पत्नी को उपवास तक जाना होगा।

प्रश्न 4.
तुम कब जाओगे अतिथि पाठ के आधार पर अतिथि सदैव देवता ही नहीं राक्षस भी हो सकता है क्यों?
उत्तर:
अतिथि मनुष्य रूप में आ जाता है। उसका मान सम्मान होता है और ज्यादा दिन तक टिकने पर वह राक्षस का रूप ले लेता है। क्योंकि देवता और मनुष्य दोनों अपने अपने स्थान पर ही अच्छे लगते हैं। देवता मंदिर में और मनुष्य समाज में अतिथि को देवता इसलिए कहता है कि वह कहीं पर भी थोडी देर के लिए जाकर वहाँ की खुशियों को बढ़ा देता है और वैसे ही चला जाता है। जैसे कि भगवान भक्त को दर्शन देकर चले जाते । दोनों में दूरी के कारण ही दोनों में प्रेम भाव बना हुआ है। यदि अतिथि को देवता माना जाए तो वह मनुष्य के साथ नहीं रह सकता। अतिथि को देवता जैसा प्रतीत करते हैं। अतिथि बहुत दिनों तक किसी के घर ठहर जाता है तो ‘अतिथि देवो भव’ कहते हैं आने के एक दिन बाद वह सामान्य हो जाता है। अर्थात् इतना बुरा भी नहीं लगता इसलिए इसे मानव रूप में कहा है और ज्यादा दिन रह जाए तो राक्षस जैसा प्रतीत होता है। ऐसे अतिथि का कोई सम्मान नहीं होता।

प्रश्न 5.
होम को स्वीटनेस को काटने न दौडे। इस वाक्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लेखक का अतिथि ऐसा व्यक्ति है जिसे दूसरों का घर बडा अच्छा लगता है। दूसरों के घर ठहरने पर उस घर के व्यक्ति खर्च जोडने की चिंता से मुक्त रहता है और अपनी सारी परेशानियों को भूलकर आतिथ्य का आनंद लेता है। लेकिन यह व्यवहारिक नहीं है। क्योंकि इससे मेज़बान के सुखी जीवन में खलल पडने लगता है। इसलिए लेखक का मानना है कि अपने घर की मधुरता का आनंद लेना चाहिए। लेकिन किसी दूसरे के घर की सुख-शांति में खलल नहीं डालना चाहिए। इससे एक मध्यवर्गीय परिवार का पूरा बजट बिगड सकता है। इसलिए लेखक उस खर्च को लेकर अपने घर के स्वीटनेस को दूर किया।

प्रश्न 6.
लेखक ने अतिथि का अच्छा सत्कार किया। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लेखक ने अपने घर आए अतिथि को गले लगाकर स्वागत किया। अतिथि अपने आप आया था। फिर भी लेखक ने स्नेह भरी मुस्कुराहट से गले लगाया। अच्छा स्वादिष्ट भोजन खिलाया। भोजन में दो सब्जियाँ रायता और मीठा भी परोसा था। दूसरे दिन लंच कराया और सिनेमा दिखाया। खूब बातें कीं। अतिथि के बोझ को सहन किया। अपने मन की बातों को अतिथि के सामने प्रकट नहीं की । अतिधेय की सारी जिम्मेदारियाँ पूरी कीं ।

प्रश्न 7.
प्रसिद्ध उक्ति है – अतिथि देवो भवः। इसके पक्ष – 1 विपक्ष में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
पक्ष – हमें अपने सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को बनाए रखना चाहिए।

  • हमारे सम्मान देने पर ही कोई हमें सम्मान देता है।
  • किसी की सेवा करने से कोई कंगाल नहीं होता, अपने सामर्थ्य के अनुसार भी सत्कार किया जा सकता है।
  • अच्छा आतिथ्य अच्छा भोजन नहीं बल्कि प्रेमपूर्ण व्यवहार है।

विपक्ष – आज की महँगाई के युग में अतिथि का सत्कार हमारा बजट बिगाड़ सकता है।

  • अतिथि के आगमन से हमारे सारे काम ठहर जाते हैं।
  • आज के नीतिविहीन समाज में अतिथि का मनोभाव समझना भी कठिन है।
  • अतिथि के आने पर हमें उसके लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ती है।

AP 9th Class Hindi Sparsh 3rd Lesson Important Questions तुम कब जाओगे, अतिथि

प्रश्न 8.
पाठ का सारांश स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘तुम कब जाओगे अतिथि!’ एक व्यंग्य रचना है। इसके व्यंग्यकार शरद जोशी जी हैं। वे हिंदी के एक प्रतिष्ठित व्यंग्यकार हैं। इसमें उन्होंने एक मध्यवर्गीय परिवार में अतिथि के आगमन से होने वाली समस्याओं पर व्यंग्य किया है। आज की महँगाई में ‘अतिथि देवो भवः’ जैसे नैतिक मूल्यों का निर्वाह कितना दूभर हो गया है, इसका प्रभावी एवं रोचक चित्रण इस व्यंग्य में हुआ है।

लेखक के घर एक अतिथि आता है। लेखक उसकी आवभगत बड़े ही अच्छे से करते हैं। लेकिन वह मेहमान जाने का नाम नहीं लेता। चार दिन बीत जाते हैं। उसके जाने की कोई संभावना दिखाई नहीं देती। तब लेखक उसके आगमन व रहने संबंधी विषयों को याद करते हुए अपने व्यंग्य विचार लिखते हैं। वे कहते हैं – “हे अतिथि! तुम कब जाओगे? अगर तुम्हें हिसाब लगाना आता है तो यह चौथा दिन है। चाँद पर पहुँचने वाले अंतरिक्ष यात्री भी वहीं इतने दिन नहीं रुके। तुम मेरी काफ़ी मिट्टी खोद चुके। अब तुम लौट जाओ, अतिथि!” इस प्रकार लेखक अपने द्वारा दिये आतिथ्य का प्रतिदिन याद करता है। उन दिनों के बारे में बताते हुए अतिथि के जानेकी कामना करता है।

वह कहता है- “उस दिन जब तुम आए थे, अंदर-ही-अंदर कहीं मेरा बटुआ काँप गया।” इसके बावजूद लेखक अतिथि जल्दी चला जाएगा सोचकर अच्छी मेहमान नवाज़ी करता है उसे बढ़िया भोजन कराता है। सिनेमा दिखाता है। लेकिन वह इस बात से बहुत दुखी है कि अतिथि जाने का नाम नहीं लेता। वह अपने कपड़े धोबी को देने को कहता है। लेखक को इससे आशंका हो जाती है कि अतिथि अधिक दिन रहना चाहता है। इससे वह अत्यंत दुखी होता है। वह अतिथि से विविध तर्क देकर जाने को कहता है। लेखक के इन्हीं विचारों व तर्कों को इस व्यंग्य का विषय बनाया गया है। भाषा अत्यंत रोचक है। हास-परिहास इस लेख की विशेषता मानी जा सकती है। अनेक स्थानों पर यह जीवन के अत्यंत निकट प्रतीत होती है।

Some More Practice Questions

  1. क्या आज भी मेहमान को जान से प्यारा माना जाता है?
  2. मेहमाँ से क्या तात्पर्य है?
  3. आपकी दृष्टि में अच्छे अतिथि के क्या लक्षण हैं?
  4. आज की बदली हुई परिस्थिति में अतिथि के आगमन पर हमारा क्या उत्तरदायित्व है?
  5. प्रसिद्ध उक्ति है अतिथि देवो भवः इसके पक्ष विपक्ष में चर्चा कीजिए।
  6. यदि आप अतिथि बनकर कहीं जाते हैं तो आपकी क्या अपेक्षाएँ होती हैं?
  7. घर आए अतिथि को आप अपनी कौन कौनसी वस्तुएं प्रसन्नता पूर्वक देना चाहेंगे?
  8. गाँव और शहरों के आतिथ्य सत्कार में आपको क्या अंतर दिखाई देता है?

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